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नाली में बह जाता है ढाई लाख लीटर पानी
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
Updated Sun, 22 Mar 2015 02:24 AM IST
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जल ही जीवन है, मगर पाइप लाइनों में लीकेज की वजह से यह जल नालियों में बह रहा है। शहर में प्रतिवर्ष दो लाख 80 हजार लीटर पानी नालियों में बह जाता है। ऐसे में जीवन के लिए अमूल्य जल का संवर्द्धन कैसे होगा।
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जल संस्थान पेयजल आपूर्ति के लिए गौला पर आश्रित रहता है। गौला से मिलने वाले पानी को फिल्टर प्लांट में फिल्टर करने के बाद शहर में आपूर्ति की जाती है। शहर के लोगों को प्रतिदिन 28 एमएलडी (दो करोड़ 80 लाख लीटर) पानी की आपूर्ति होती है। दो एमएलडी पानी फिर भी कम पड़ता है। जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार प्रतिवर्ष लगभग दस प्रतिशत (दो लाख 80 हजार लीटर) पानी लीकेज के कारण नालियों में बह जाता है। ऐसे में जल संवर्द्धन की बात बेमानी होगी। सूत्रों के अनुसार यह तो विभागीय आंकड़ा है, जबकि प्रतिवर्ष 20 प्रतिशत पानी (लगभग पांच लाख साठ हजार लीटर) बर्बाद होता है।
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वहीं, वर्ष 2005 में आई रेन हार्वेस्टिंग योजना ने कागजों में ही दम तोड़ दिया। रेन हार्वेस्टिंग मेडिकल कालेज हल्द्वानी के अलावा शायद ही किसी सरकारी कार्यालय में की गई हो। सीडीओ ललित मोहन रयाल के अनुसार हल्द्वानी की 84 ग्राम पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्यों में इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत रेन हार्वेस्टिंग कराई जाएगी। इसके लिए योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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