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बाघिन ने चालाकी में लोमड़ी को भी दी मात
विजेंद्र श्रीवास्तव
Updated Thu, 20 Oct 2016 01:05 AM IST
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गुस्सैल बाघिन
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चालाकी की बात हो तो लोमड़ी का जिक्र जरूर आता है। लेकिन, रामनगर की आदमखोर बाघिन ने अपनी चालाकी, चपलता से सभी को मात दे दिया है। आदमखोर बाघिन उसकी तलाश में लगाए गए आधुनिक संसाधनों से लेकर कई शिकारी और खोज में लगाए गए कुत्ते सबको लगातार चकमा दे रही है।
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बता दें कि किसी आदमखोर को पकड़ने या मारने का देश भर में यह अपनी तरह का पहला सबसे बड़ा अभियान है। रामनगर की आदमखोर बाघिन को मारने या पकड़ने के तमाम उपाय कर लिए गए हैं। खोजबीन में ड्रोन से लेकर हेलीकॉप्टर तक का इस्तेमाल कर लिया गया।
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लेकिन, बाघिन छलावा ही साबित हुई। मौजूदा समय में विभिन्न प्रभागों के 100 वन कर्मी और 100 हाका लगाने वालों को अभियान में शामिल किया गया। बाघिन का मूवमेंट पता करने के लिए एक-दो नहीं बल्कि 65 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।
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शुरुआत में तो बाघिन कैमरा ट्रैप में आ गई, लेकिन बाद में शायद वह इस बात को समझ गई और करीब एक सप्ताह से वह उस तरफ फटकी भी नहीं जहां-जहां कैमरा लगाए गए हैं। अभियान से जुड़े लोगों के अनुसार बाघिन चालाकी के साथ खेतों के मेड़ के रास्ते पर चल रही है, जबकि पहले वह मुख्य रास्तों की तरफ भी मूवमेंट कर रही थी।
बाघिन की चालाकी यहीं नहीं रुकी अब वह एक बार वह जिस इलाके में कोई घटना करती है, तो वहां कुछ समय के लिए नहीं जाती है। हर बार वह इलाका बदल रही है। खेतों में सूअर, नील गाय से लेकर भरपूर पानी है, ऐसे में उसे खाने-पीने की दिक्कत नहीं है।
इसके अलावा गन्ने के खेत और बगीचे उसके छिपने में मददगार साबित हुए हैं। विभिन्न घटनाओं से यह पता चलता है कि बाघिन का जन्म भी इसी इलाके में हुआ है, ऐसे में उसे करीब हर रास्ता और दांव पता है। इसके चलते ही सौ हाका लगाने वाले, तीन हाथी, पांच शिकारी (बाद में दो शिकारी चले गए) से लेकर बड़ी संख्या में शिकारी कुत्ते भी बाघिन तक नहीं पहुंच सके हैं।
इससे पूर्व वन विभाग कोई ऐसा चालाक वन्यजीव सामने आया हो, वह याद नहीं है। बहरहाल, विभाग का हौसला बुधवार से आई उस खबर से बढ़ा है, जिसमें बाघिन को गोली लगने और घायल होने की बात कही जा रही है। अधिकारी मान रहे हैं जल्द ही चालाक बाघिन का किस्सा खत्म हो जाएगा।