फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Three years after the foundation of the bridge to make

शिलान्यास के तीन साल बाद भी नहीं बना पुल

Sat, 11 Jun 2016 10:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। Updated Sat, 11 Jun 2016 10:57 PM IST
विज्ञापन
Three years after the foundation of the bridge to make
सूखी नदी-1 - फोटो : अमर उजाला
गौलापार नकायल के ग्रामीणों के लिए सूखी नदी परेशानी का सबब बनी है। बरसात में सूखी नदी में बाढ़ आने से बच्चे हफ्तों तक स्कूल नहीं जा पाते हैं। वहीं इलाके में राशन, पानी, बिजली का संकट पैदा हो जाता है। ग्रामीणों का संपर्क क्षेत्र से कट जाता है।  तीन साल पूर्व सूखी नदी में पुल और विजय पुर में काजवे का शिलान्यास गौलापुल के साथ ही किया गया था। लेकिन शिलान्यास का पत्थर लगने के बावजूद अभी तक पुल निर्माण की दिशा में कोई काम नहीं किया गया है। जिससे ग्रामीणों में खासा रोष है। क्षेत्रवासियों ने शीघ्र पुल का निर्माण नहीं किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
विज्ञापन


फोटो
सूखी नदी में बाढ़ आने पर बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। बीमार लोगों को अस्पताल ले जाना मुश्किल हो जाता है। शासन से कई बार गुहार लगा चुके हैं लेकिन अभी तक पुल निर्माण के लिए कोई काम नहीं हुआ है।
विज्ञापन

- भास्करानंद भट्ट, नकायल, गौलापार।

फोटो
सूखी नदी तो हमारे लिए अभिशाप बन गई है। डेरी में दूध ले जाना मुश्किल हो जाता है। बच्चे एक-एक हफ्ते तक स्कूल नहीं जा पाते हैं। बरसात में राशन नहीं मिलने से भोजन के भी लाले पड़ जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

- पनुली देवी, नकायल, गौलापार।

फोटो
सूखी नदी में जब बाढ़ आती है तो दहशत बनी रहती है। घरों को भी खतरा पैदा हो जाता है। पानी, बिजली सप्लाई सब ठप हो जाती है। 40 परिवारों के इस गांव के लोगों को हमेशा भय बना रहता है। शासन प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा है।

फोटो
- बालम सिंह देउपा, नकायल, गौलापार।
सूखी नदी में पुल नहीं होने के कारण उन्हें अपनी ट्राई साइकिल से गौलापार या हल्द्वानी जाने के लिए एक के सहारे की जरूरत पड़ती है। बगैर सहारे के वह कहीं आ जा नहीं पाते हैं। अगर पुल बन गया होता तो वह स्वयं की आना जाना कर लेते। 
- लक्ष्मीदत्त भट्ट, विकलांग. नकायल गौलापार।

फोटो
सूखी नदी में बाढ़ आने से कई जानवर अब तक बह चुके हैं। एक बार गांव के पधान हीराबल्लभ भट्ट सूखी में बह गए थे। ग्रामीणों के अथक प्रयास से उन्हें बचाया जा सका। सूखी में पुल स्वीकृत होने के बावजूद नहीं बनना क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बना है।
- योगिता भट्ट, नकायल, गौलापार।

फोटो
बाढ़ आने पर राशन की किल्लत हो जाती है। बिजली, पानी के अभाव में काफी परेशानियां होती हैं। जानवर चुगने के लिए जंगल नहीं जा पाते हैं। जंगल गए जानवर घर आते समय नदी में बह जाते हैं। सरकार को जल्द से जल्द पुल का निर्माण करना चाहिए।
- माया भट्ट, नकायल, गौलापार।

 फोटो
कई बार सूखी नदी में पुल बनाने के लिए मंत्रियों,  अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। पुल स्वीकृति के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा रहा है। नदी के भू कटाव होने से लोगों की जमीन को भी खतरा बना हुआ है। मामले को कई बार बीडीसी बैठक में उठा चुका हूं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

- ललित प्रसाद आर्य, ग्राम प्रधान लछमपुर।

फोटो
सूखी नदी में स्वीकृत पुल का शिलान्यास 2013 में गौला पुल के साथ ही किया गया। पुल के शिलान्यास के नाम पर एक पत्थर जरूर लगा दिया गया है लेकिन निर्माण शुरू नहीं किया गया है। कई बार जिला पंचायत की बैठकों में नकैल पुल और बिजयपुर में काजवे का निर्माण शुरू कराने की मांग की गई है। अधिकारी आश्वासन देकर कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। 
- प्रकाश गरजौला, जिला पंचायत सदस्य, लाखनमंडी-चोरगलिया। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed