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कुविवि के तीन शोधार्थियों को मिलेगी प्रो, पंत, प्रो. वाल्दिया व प्रो.पांगती छात्रवृत्ति
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नैनीताल स्थित कुविवि के प्रशासनिक भवन में आयोजित शोध सलाहकार समिति की बैठक में हिस्सा लेते कुलप?
- फोटो : NAINITAL
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय की शोध सलाहकार समिति की बैठक में शोध छात्रवृत्ति, प्री-पीएचडी कोर्सवर्क, पीएचडी मौखिकी परीक्षा, पीएचडी प्रवेश परीक्षा आदि से संबंधित कई प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया। तय किया गया कि तीनों संकायों के एक-एक शोधार्थी को प्रो. डीडी पंत, प्रो. केएस वल्दिया और प्रो. वाईपीएस पांगती छात्रवृत्ति दी जाएगी।
बृहस्पतिवार को प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. एनके जोशी ने की। इस दौरान प्री-पीएचडी कोर्सवर्क की परीक्षा के लिए प्रत्येक प्रश्न पत्र में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य करने, शोध कार्य के लिए 62 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके प्राध्यापकों को शोधार्थी आवंटित न करने, पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए केंद्र अध्यक्ष और पर्यवेक्षक के मानदेय बढ़ाने, डी-लिट, डीएससी के लिए पंजीकरण शुल्क व काउंसिलिंग शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
ये प्रस्ताव भी हुए पारित
-यदि कोई शोधार्थी या शोधार्थी दल किसी पेटेंट को फाइल कर उसे प्राप्त करता है तो उसे विवि की ओर से प्रति पेटेंट प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
-सिल्वर जुबली छात्रवृत्ति की धनराशि बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- शोध एवं शिक्षण कार्य में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्राध्यापकों और शोधार्थियों को सम्मानित किया जाएगा
- शासन के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शोध निदेशालय का नाम बदलकर अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ रखा जाएगा
- विवि में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त रिसर्च लैब बनाई जाएगी।
- 200 दिन की उपस्थिति के लिए विभाग पंजिका की छाया प्रति विभागाध्यक्ष डीन डायरेक्टर प्रिंसिपल से प्रमाणित कर थीसिस के साथ अलग से जमा करने का नियम लागू किया जाएगा।
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- साल में एक बार सलाहकार समिति की बैठक अनिवार्य रूप से होगी।
दो शोधार्थी ही होंगे आवंटित
नैनीताल। बैठक में निर्णय लिया कि पीएचडी में प्रवेश के लिए एक काउंसलिंग में एक शिक्षक को अधिकतम दो ही शोधार्थी आवंटित किए जाएंगे। काउंसलिंग केवल एक ही बार होगी। साथ ही प्री पीएचडी कोर्सवर्क में एथिक्स इन रिसर्च विषय पढ़ाया जाएगा। वहीं शोधार्थी के शोध प्रबंध मूल्यांकन के लिए शोध निर्देशक तथा विभागाध्यक्ष की ओर से एक माह के भीतर पैनल प्रस्तुत नहीं किए जाने पर विवि प्रशासन की ओर से परीक्षक नामित कर दिए जाएंगे।
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एक माह के भीतर मूल्यांकन के लिए पैनल अनिवार्य
नैनीताल। शोध निर्देशक व विभागाध्यक्ष की ओर से शोधार्थी के प्री-सबमिशन व शोध ग्रंथ जमा करने के एक माह के भीतर मूल्यांकन के लिए पैनल दिया जाना अनिवार्य होगा। उक्त अवधि के भीतर पैनल न दिए जाने की दशा में विवि प्रशासन की ओर से शोध मूल्यांकन परीक्षा के लिए बाह्य परीक्षक नियुक्त कर दिया जाएगा। शोधार्थी को शोध ग्रंथ जमा करते समय प्लेजरिजम रिपोर्ट एवं दो वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी। साथ ही शोध रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी किया जाएगा।
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यह रहे मौजूद
- बैठक में कुलसचिव दिनेश चंद्रा, वित्त अधिकारी अनीता आर्या, कार्यपरिषद सदस्य डॉ. प्रकाश पांडे, डॉ. सुरेश डालाकोटी, कैलाश जोशी, डॉ. बीएस जीना, संकायाध्यक्ष कला प्रो. आरके पांडे, संकायाध्यक्ष वाणिज्य प्रो. अतुल जोशी, संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो. एबी मेलकानी, शोध एवं प्रसार निदेशक प्रो. ललित तिवारी, प्रो. एलएम जोशी, प्रदीप गोस्वामी, प्रो. संजय पंत, डॉ. युगल जोशी, डॉ. आशीष तिवारी, डॉ. महेश आर्या, डॉ. सुषमा टम्टा आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार को प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. एनके जोशी ने की। इस दौरान प्री-पीएचडी कोर्सवर्क की परीक्षा के लिए प्रत्येक प्रश्न पत्र में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य करने, शोध कार्य के लिए 62 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके प्राध्यापकों को शोधार्थी आवंटित न करने, पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए केंद्र अध्यक्ष और पर्यवेक्षक के मानदेय बढ़ाने, डी-लिट, डीएससी के लिए पंजीकरण शुल्क व काउंसिलिंग शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
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ये प्रस्ताव भी हुए पारित
-यदि कोई शोधार्थी या शोधार्थी दल किसी पेटेंट को फाइल कर उसे प्राप्त करता है तो उसे विवि की ओर से प्रति पेटेंट प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
-सिल्वर जुबली छात्रवृत्ति की धनराशि बढ़ाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
- शोध एवं शिक्षण कार्य में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्राध्यापकों और शोधार्थियों को सम्मानित किया जाएगा
- शासन के निर्देशानुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शोध निदेशालय का नाम बदलकर अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ रखा जाएगा
- विवि में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त रिसर्च लैब बनाई जाएगी।
- 200 दिन की उपस्थिति के लिए विभाग पंजिका की छाया प्रति विभागाध्यक्ष डीन डायरेक्टर प्रिंसिपल से प्रमाणित कर थीसिस के साथ अलग से जमा करने का नियम लागू किया जाएगा।
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- साल में एक बार सलाहकार समिति की बैठक अनिवार्य रूप से होगी।
दो शोधार्थी ही होंगे आवंटित
नैनीताल। बैठक में निर्णय लिया कि पीएचडी में प्रवेश के लिए एक काउंसलिंग में एक शिक्षक को अधिकतम दो ही शोधार्थी आवंटित किए जाएंगे। काउंसलिंग केवल एक ही बार होगी। साथ ही प्री पीएचडी कोर्सवर्क में एथिक्स इन रिसर्च विषय पढ़ाया जाएगा। वहीं शोधार्थी के शोध प्रबंध मूल्यांकन के लिए शोध निर्देशक तथा विभागाध्यक्ष की ओर से एक माह के भीतर पैनल प्रस्तुत नहीं किए जाने पर विवि प्रशासन की ओर से परीक्षक नामित कर दिए जाएंगे।
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एक माह के भीतर मूल्यांकन के लिए पैनल अनिवार्य
नैनीताल। शोध निर्देशक व विभागाध्यक्ष की ओर से शोधार्थी के प्री-सबमिशन व शोध ग्रंथ जमा करने के एक माह के भीतर मूल्यांकन के लिए पैनल दिया जाना अनिवार्य होगा। उक्त अवधि के भीतर पैनल न दिए जाने की दशा में विवि प्रशासन की ओर से शोध मूल्यांकन परीक्षा के लिए बाह्य परीक्षक नियुक्त कर दिया जाएगा। शोधार्थी को शोध ग्रंथ जमा करते समय प्लेजरिजम रिपोर्ट एवं दो वार्षिक रिपोर्ट जमा करनी होगी। साथ ही शोध रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण भी किया जाएगा।
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यह रहे मौजूद
- बैठक में कुलसचिव दिनेश चंद्रा, वित्त अधिकारी अनीता आर्या, कार्यपरिषद सदस्य डॉ. प्रकाश पांडे, डॉ. सुरेश डालाकोटी, कैलाश जोशी, डॉ. बीएस जीना, संकायाध्यक्ष कला प्रो. आरके पांडे, संकायाध्यक्ष वाणिज्य प्रो. अतुल जोशी, संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रो. एबी मेलकानी, शोध एवं प्रसार निदेशक प्रो. ललित तिवारी, प्रो. एलएम जोशी, प्रदीप गोस्वामी, प्रो. संजय पंत, डॉ. युगल जोशी, डॉ. आशीष तिवारी, डॉ. महेश आर्या, डॉ. सुषमा टम्टा आदि मौजूद रहे।