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Nainital News: जिन घायलों का इलाज किया, उन्हीं ने बचाई जान
Mon, 12 Feb 2024 04:14 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 12 Feb 2024 04:14 AM IST
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हल्द्वनी। उपद्रव के दिन मलिक के बगीचे में घायलों का उपचार कर रहे 108 एंबुलेंस के चालक हरीश चंद्र आर्या और ईएमटी धारा बल्लभ भट्ट ने बताया कि उन्होंने बीस मिनट तक मौत को करीब से देखा। यदि उनके वाहन में घायल मुस्लिम महिला और युवक न होते तो वे भी आग की भेंट चढ़ जाते। उपद्रवी जान लेने को आतुर थे लेकिन घायल उनकी ढाल बने और उन्हें बाहर निकाला।
हरीश चंद्र आर्या और धारा बल्लभ भट्ट ने बताया कि घटना के दिन प्रशासन के आदेश पर वे 108 लेकर मलिक के बगीचे पहुंचे थे। लगभग 4:30 बजे से पांच बजे के बीच उनके वाहन में दो एसआई समेत छह पुलिस कर्मी, एक मुस्लिम महिला, एक बच्चा दो युवक थे। वे सभी की मरहम पट्टी कर रहे थे। इसी दौरान उपद्रवियों ने वाहन के अंदर पुलिस होने की बात कहकर पत्थरबाजी शुरू कर दी जिससे वाहन में मौजूद महिला और युवक भी घायल हो गए। पांच मिनट में वाहन में सैकड़ों पत्थर पड़े। महिला ने उपद्रवियों से ऐसा न करने की अपील की लेकिन वे नहीं माने और 108 को आग के हवाले करने लगे। महिला की कोशिश से वे किसी तरह बचकर एक घर में गए। यहां घायल युवकों ने उनसे सुरक्षित बाहर तक छुड़वाने का आश्वासन दिया। इसके बाद दोनों भाइयों ने किसी तरह उन्हें रेलवे पटरी से बूचड़खाने तक पहुंचाया। जहां से हमने दूसरी 108 को बुलाया और अस्पताल पहुंचे। संवाद
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हरीश चंद्र आर्या और धारा बल्लभ भट्ट ने बताया कि घटना के दिन प्रशासन के आदेश पर वे 108 लेकर मलिक के बगीचे पहुंचे थे। लगभग 4:30 बजे से पांच बजे के बीच उनके वाहन में दो एसआई समेत छह पुलिस कर्मी, एक मुस्लिम महिला, एक बच्चा दो युवक थे। वे सभी की मरहम पट्टी कर रहे थे। इसी दौरान उपद्रवियों ने वाहन के अंदर पुलिस होने की बात कहकर पत्थरबाजी शुरू कर दी जिससे वाहन में मौजूद महिला और युवक भी घायल हो गए। पांच मिनट में वाहन में सैकड़ों पत्थर पड़े। महिला ने उपद्रवियों से ऐसा न करने की अपील की लेकिन वे नहीं माने और 108 को आग के हवाले करने लगे। महिला की कोशिश से वे किसी तरह बचकर एक घर में गए। यहां घायल युवकों ने उनसे सुरक्षित बाहर तक छुड़वाने का आश्वासन दिया। इसके बाद दोनों भाइयों ने किसी तरह उन्हें रेलवे पटरी से बूचड़खाने तक पहुंचाया। जहां से हमने दूसरी 108 को बुलाया और अस्पताल पहुंचे। संवाद
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