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Nainital News: इस बार होली में कुमाऊं होली की देखने को मिलेगी प्राचीन परंपरा
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हल्द्वानी। बसंत और फाग का महीना रंगोत्सव और फागोत्सव का महीना माना जाता है। कुमाऊं की विलुप्त हो रही समृद्धशाली गायन परंपरा को जीवंत बनाने और भावी पीढ़ी को सिखाने का संकल्प महिला संगठनों ने लिया है। होली का आयोजन करा रहीं महिलाओं और संगठनों का कहना है कि वे होली जैसी गौरवशाली परंपरा को अपने अतीत से जोड़ते हुए भावी पीढ़ी को इससे रूबरू कराएंगे। इस बार होली में कुमाऊं होली की प्राचीन परंपरा देखने को मिलेगी।
पहाड़ में पारंपरिक होलियां होती हैं
इसमें बुजुर्ग लोग गाते थे, स्वांग का आयोजन होता था जिससे स्वस्थ मनोरंजन की परंपरा बनी रहती थी। वर्तमान में कहीं कहीं फूहड़ता आ चुकी है। इसे दूर करने का काम महिलाएं ही कर रही हैं। 2003 से होली का आयोजन कर रही हूं जिसमें छह-सात संगठन की करीब 300 से अधिक महिलाएं होली गायन में भागीदारी करती हैं। सभी महिलाओं का मानना है कि हमें युवा पीढ़ी को इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है इसीलिए होली गायन में महिलाएं अपने बच्चों को भी आगे ला रही हैं।
महिलाएं होली तो काॅपी कर ही रही हैं साथ ही परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। हमने अब युवा पीढ़ी को भी आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। हम अपने बच्चों को क्या सिखा रहे हैं, यह दिखाना है। होली आयोजनों में महिलाओं के साथ युवतियों और बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित हो, इसके लिए सभी महिला संगठनों और महिलाओं से भी अपील कर रहे हैं कि वह त्योहारों से जुड़ी परंपराओं में अपने बच्चों को भी शामिल करें।
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पहाड़ में पारंपरिक होलियां होती हैं
इसमें बुजुर्ग लोग गाते थे, स्वांग का आयोजन होता था जिससे स्वस्थ मनोरंजन की परंपरा बनी रहती थी। वर्तमान में कहीं कहीं फूहड़ता आ चुकी है। इसे दूर करने का काम महिलाएं ही कर रही हैं। 2003 से होली का आयोजन कर रही हूं जिसमें छह-सात संगठन की करीब 300 से अधिक महिलाएं होली गायन में भागीदारी करती हैं। सभी महिलाओं का मानना है कि हमें युवा पीढ़ी को इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है इसीलिए होली गायन में महिलाएं अपने बच्चों को भी आगे ला रही हैं।
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महिलाएं होली तो काॅपी कर ही रही हैं साथ ही परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। हमने अब युवा पीढ़ी को भी आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। हम अपने बच्चों को क्या सिखा रहे हैं, यह दिखाना है। होली आयोजनों में महिलाओं के साथ युवतियों और बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित हो, इसके लिए सभी महिला संगठनों और महिलाओं से भी अपील कर रहे हैं कि वह त्योहारों से जुड़ी परंपराओं में अपने बच्चों को भी शामिल करें।
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