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जंगल में जल का संकट, मुश्किल में वन्यजीव

Wed, 30 Mar 2016 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। Updated Wed, 30 Mar 2016 12:09 AM IST
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 जंगल में पानी का संकट गहरा रहा है। ऐसे में वन महकमे के सामने वन्यजीवों को प्यास और गर्मी में सक्रिय होने वाले शिकारियों से बचाने की चुनौती है। जंगलों में प्राकृतिक जलस्रोत होते हैं, वहां पर गर्मी और पानी की कम होती स्थिति को देखते हुए पंपिंग योजना से लेकर कृत्रिम जल स्रोत बनाये जा रहे हैं। दावा है कि पानी की कमी होने पर वन्यजीव आबादी की तरफ जा सकते हैं, ऐसे में गांव वालों को भी सचेत किया जा रहा है।

पानी की सबसे ज्यादा कमी भाबर वाले इलाके में होने का अंदेशा है। बढ़ती गर्मी स्थिति खराब होने का संकेत दे रही है। तराई केंद्रीय वन प्रभाग  के डीएफओ सनातन कहते हैं कि भाबर के इलाके में सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है।
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इसके मद्देनजर बरहैनी, भाखड़ा, गदगदिया और हल्द्वानी रेंज में 12 जगहों पर बड़े और पक्के जलाशय बनाये गए हैं। इनमें टैंकरों से पानी भरा जा रहा है। तराई में पंपिंग सेट भी लगाया गया है। जो प्लांटेशन वाले पौधों को पानी देने के साथ वन्यजीवों के लिए बने कृत्रिम जलाशय के लिए भी मददगार होंगे।
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गर्मी के समय जब अधिकांश जलस्रोत सूख जाते हैं और चुनिंदा ही जलस्रोतों में पानी रहता है। तो वन्यजीवों की तलाश करना बेहद आसान होता है। ऐसे में शिकारी इन्हीं जलस्रोत के पास घात लगाते हैं। इन जगहों पर बाघ पानी पीने के लिए आता है। तराई पूर्वी वन प्रभाग डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि पूर्व का अनुभव बताता है कि शिकारी गर्मी के मौसम में ज्यादा सक्रिय होते हैं।


इस समय शिकार की तलाश, खाल सुखाने आदि बातें उनके पक्ष में जाती हैं। ऐसे में जलस्रोतों के पास नियमित गश्त, नजर रखने का निर्देश वन कर्मियों को दिया गया है। सभी जलस्रोतों की सूची आदि भी तैयार की गई है। रही बात पानी के संकट की तो उससे निपटने के इंतजाम किये जा रहे हैं। डौली, दक्षिण जौलासाल रेंज आदि जगहों पर कृत्रिम जलस्रोत बनाये गए हैं। पानी की तलाश में वन्यजीवों के आबादी की तरफ जाने का भी खतरा है, इसके लिए गांव वालों को सतर्क रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है। 
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