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Nainital News: परीक्षा देते-देते चीखने लगी छात्रा, भूत-भूत के शोर से मची भगदड़

Tue, 25 Aug 2026 02:44 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Updated Tue, 25 Aug 2026 02:44 AM IST
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A student screamed during an exam, causing a stampede due to cries of "ghosts."
हल्द्वानी। बनभूलपुरा थानाक्षेत्र स्थित ललित आर्या बालिका इंटर में सोमवार सुबह अचानक भगदड़ मच गई। शोर था कि छात्राओं पर भूत-प्रेत का साया आ गया है। एक छात्रा के शोर मचाने पर पूरे स्कूल के बच्चों में चीख-पुकार मच गई। स्कूल प्रशासन के लोग भी घबरा गए। सभी को शांत कराने के बाद परिवार वालों को बुलाकर छात्राओं को घर भेजा गया। स्कूल की एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुई। हालांकि जिस छात्रा की तबीयत बिगड़ी थी उसके पीछे 10वीं की पढ़ाई की चिंता होने का अंदेशा भी जताया जा रहा है।
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सोमवार को कॉलेज में मौजूद प्रभारी प्रधानाचार्य नीलम ने बताया कि 10वीं और 12वीं कक्षा के यूनिट टेस्ट चल रहे हैं। सभी छात्राएं कक्षा में बैठी थीं कि तभी कक्षा 10 की एक छात्रा अचानक जोर-जोर से चीखने लगी। उसे चक्कर भी आने की शिकायत हुई। चीख सुनकर कक्षा की अन्य छात्राओं ने भी अचानक चिल्लाना और रोना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनते ही कॉलेज की अन्य छात्राओं में भगदड़ मच गई। तभी सभी शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों ने बच्चियों को एक स्थान पर बिठाया और उनके परिवार वालों को बुलाया। इस दौरान कॉलेज पहुंचे अभिभावकों ने भूत-प्रेत की बात करना शुरू कर दिया। इसके बाद बच्चों में और भी घबरा गए। शिक्षकों ने अभिभावक और बच्चों को समझाकर शांत कराया। इसके रद्द कर बच्चों को घर भेज दिया गया।
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हिस्टीरिया का अंदेशा
स्कूल में हुई घटना को मास हिस्टीरिया से जोड़कर देखा जा रहा है। मनोचिकित्सक डॉ. युवराज पंत कहते हैं कि आजकल स्कूली बच्चों में हिस्टीरिया (कन्वर्जन डिसऑर्डर) की दिक्कत बड़े स्तर पर सामने आ रही है। अत्यधिक मानसिक तनाव, पढ़ाई के भारी दबाव, परिवार में कलह या स्कूल के सख्त माहौल की वजह से होता है। जब बच्चा अपनी परेशानी या डर को बोलकर नहीं बता पाता तो वह मानसिक तनाव पेट दर्द, बेहोशी या अचानक रोने-चिल्लाने जैसे क्रिया-कलाप करने लगता है। इसे कई बार भूत-प्रेत से जोड़कर देखा जाता है जबकि ऐसा नहीं है। यह केवल बच्चों की मनोस्थिति की वजह से होता है।
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बच्चों की क्षमताओं को देखकर ही दें दबाव
डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. युवराज पंत ने बताया कि जिस बच्ची की अचानक तबीयत बिगड़ी वह कहीं न कहीं पढ़ाई के तनाव में रही होगी। ऐसी स्थिति में सबसे पहला कार्य उसकी काउंसलिंग का होना चाहिए। वहीं बोर्ड की पढ़ाई करने वाले सभी बच्चों के माता-पिता को इस समय सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है। प्रत्येक बच्चे की क्षमता एक समान नहीं होती। इसलिए अपने बच्चे की क्षमता देखते हुए उससे बातचीत करें और उसकी बात सुनें, अनावश्यक दबाव बिल्कुल न डालें। उनके साथ थोड़ा समय बिताएं और उनकी समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करें। खासकर तुलनात्मक प्रतिक्रिया उनके सामने न रखें।
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