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संस्कृत में बसती है देश की आत्मा : पाठक

Mon, 29 May 2017 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 29 May 2017 01:59 AM IST
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The soul of the country dwells in Sanskrit: reader
sanskrit - फोटो : amar ujala

संस्कृत समृद्धशाली भाषा है। इसमें देश की आत्मा बसती है। यह बात कुमाऊं विश्वविद्यालय के शोध एवं प्रसार के निदेशक प्रो. मानवेंद्र पाठक ने कही। वह डीएसबी परिसर के संस्कृत विभाग द्वारा हरियाणा ग्रंथ अकादमी के सहयोग से हरमिटेज भवन सभागार में संस्कृत साहित्य में राष्ट्रीय भावना विषयक दो दिनी राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर बोल रहे थे।

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इस अवसर पर संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. जय दत्त उप्रेती ने कहा कि वेद मानवता की जननी है और ज्ञान से परिपूर्ण होते हैं। विशिष्ट अतिथि प्राचार्य डॉ. बीडी कांडपाल ने कहा कि ऋषियों ने शील, इच्छा शक्ति, तर्क शक्ति और लग्नता से जिस भाषा को समृद्ध किया है वह संस्कृत ही है। प्रो. किरन टंडन ने भी संबोधित किया।
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रविवार को तीन सत्रों में चले सेमीनार में शोधार्थियों ने 63 शोध पत्र पढे़। प्रस्तुत शोध पत्रों के आधार पर महेश उनियाल देहरादून को पहला, नैनीताल के कैलाश सनवाल को दूसरा, अल्मोड़ा के संदीप पांडे को तीसरा स्थान दिया गया।
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नैनीताल की भावना जोशी, दिल्ली की उपमा और अल्मोड़ा के भुवन मेलकानी को सांत्वना पुरस्कार से नवाजा गया। तीनों सत्रों की अध्यक्षता क्रमश: डॉ. विनय विद्या अंलकार, डॉ. श्वेता शर्मा, डॉ. लज्जा भट्ट ने की। आयोजक सचिव प्रो. जया तिवारी ने सभी का स्वागत किया।


संचालन प्रो. ललित तिवारी ने किया। इस मौके पर डॉ. सुचेतन साह, डॉ. शिवांगी चन्याल, डॉ. नीता आर्या, डॉ. हेमवती नंदन पनेरू, हरियाणा ग्रंथ अकादमी के डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. अयोध्या नाथ वैष्णव, प्रो. जेके गोदियाल आदि थे।   

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