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Nainital News: नाटकों के जरिये समझाया जीवन का मकसद और राजधर्म
Sun, 28 Sep 2025 10:25 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sun, 28 Sep 2025 10:25 AM IST
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हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज सभागार जीलो जिंदगी नाटक प्रस्तुत करते कलाकार। अमर उजाला
हल्द्वानी। नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला में तैयार दो नाटक जी लो जिंदगी और राजा मूछो सिंह का मंचन राजकीय मेडिकल कॉलेज सभागार में हुआ। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली, शैलनट और आनंदा अकादमी हल्द्वानी के संयुक्त संयोजन में हुए आयोजन के मुख्य अतिथि गदरपुर विधायक अरविंद पांडे ने कहा कि हल्द्वानी शहर में ऐसी कार्यशालाएं होती रहनी चाहिए जिससे यहां के बच्चों को अभिनय के गुर सीखने के अधिक से अधिक अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि शैलनट ने हल्द्वानी ही नहीं पूरे प्रदेश में रंगमंच को नए आयाम दिए हैं।
जी लो जिंदगी रूस के प्रसिद्ध नाटककार निकोलाई एडमैन के प्रसिद्ध नाटक द सुसाइड से प्रेरित है जो कि रंगमंच का पहला ब्लैक कॉमेडी नाटक कहा जाता है। नाटक बेरोजगार व्यक्ति के जीवन पर आधारित है जिसमें हताशा के बाद उस पात्र को कामयाबी प्राप्त होती है। बीच बीच में विभिन्न प्रकार के संगठनों द्वारा उसका शोषण किया जाता है परंतु अपनी जीवन संगिनी के सहयोग से इसमें साहस जागता है और वो अपने जीवन का उद्देश्य प्राप्त कर लेता है। वहीं राजा मूछो सिंह एक हास्य-व्यंग्य नाटक है जिसमें एक राजा अपनी मूछों को अपनी शान और सत्ता का प्रतीक मान बैठता है। नाटक हंसी-ठिठोली और व्यंग्यपूर्ण है। राजाज्ञा से हर चीज मूछों वाली बनेगी जानवर, पलंग, यहां तक कि बच्चों के खिलौने भी। राजा मूछों के लिए नए नए कानून बनवा देता है। चोर उचक्के मूछों पर कविता और गीत सुनाकर ससम्मान बरी हो जाते है। इसी बीच एक बहरूपिया पड़ोसी राज्य का जासूस, नाई बनकर आता है और राजा की मूछें काट देता है। तब राजा को समझ आता है कि एक राजा का क्या कर्तव्य है और राजा की असली शान मूछों में नहीं, राजधर्म निभाने में है।
इससे पहले मुख्य अतिथि के अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, पूर्व जिपं उपाध्यक्ष आनंद दरम्वाल, एडीएम शैलेंद्र नेगी, वरिष्ठ रंगकर्मी श्रीश डोभाल, चंदन बिष्ट, रचना बिष्ट, डीएन भट्ट, भूपेंद्र बिष्ट आदि ने दीप जलाकर मंचन का शुभारंभ किया। रंगकर्मी चंदन बिष्ट, चित्रा बिष्ट और वरिष्ठ रंगकर्मी और शैलनट के संस्थापक श्रीश डोभाल के सानिध्य में प्रशिक्षुओं ने नाटक का मंचन किया। नाट्य मंचन के बाद दर्शकों के साथ सवाल-जवाब भी हुए। शैलनट के कला निदेशक डॉ. डीएन भट्ट ने कहा कि बहुत जल्द इन नाटकों का मंचन अन्य स्थानों पर होगा। इस मौके पर आनंदा अकादमी के निदेशक भूपेंद्र बिष्ट, राजीव कुमार शर्मा, डॉ. दीपक मेहता, गौरव जोशी, ललित कर्नाटक, डॉ. केदार पलड़िया, दीक्षा बिष्ट, माया बिष्ट, जगमोहन रौतेला, हरीश उप्रेती, भास्कर भौर्याल आदि रंगकर्मी मौजूद रहे।
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जी लो जिंदगी रूस के प्रसिद्ध नाटककार निकोलाई एडमैन के प्रसिद्ध नाटक द सुसाइड से प्रेरित है जो कि रंगमंच का पहला ब्लैक कॉमेडी नाटक कहा जाता है। नाटक बेरोजगार व्यक्ति के जीवन पर आधारित है जिसमें हताशा के बाद उस पात्र को कामयाबी प्राप्त होती है। बीच बीच में विभिन्न प्रकार के संगठनों द्वारा उसका शोषण किया जाता है परंतु अपनी जीवन संगिनी के सहयोग से इसमें साहस जागता है और वो अपने जीवन का उद्देश्य प्राप्त कर लेता है। वहीं राजा मूछो सिंह एक हास्य-व्यंग्य नाटक है जिसमें एक राजा अपनी मूछों को अपनी शान और सत्ता का प्रतीक मान बैठता है। नाटक हंसी-ठिठोली और व्यंग्यपूर्ण है। राजाज्ञा से हर चीज मूछों वाली बनेगी जानवर, पलंग, यहां तक कि बच्चों के खिलौने भी। राजा मूछों के लिए नए नए कानून बनवा देता है। चोर उचक्के मूछों पर कविता और गीत सुनाकर ससम्मान बरी हो जाते है। इसी बीच एक बहरूपिया पड़ोसी राज्य का जासूस, नाई बनकर आता है और राजा की मूछें काट देता है। तब राजा को समझ आता है कि एक राजा का क्या कर्तव्य है और राजा की असली शान मूछों में नहीं, राजधर्म निभाने में है।
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इससे पहले मुख्य अतिथि के अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, पूर्व जिपं उपाध्यक्ष आनंद दरम्वाल, एडीएम शैलेंद्र नेगी, वरिष्ठ रंगकर्मी श्रीश डोभाल, चंदन बिष्ट, रचना बिष्ट, डीएन भट्ट, भूपेंद्र बिष्ट आदि ने दीप जलाकर मंचन का शुभारंभ किया। रंगकर्मी चंदन बिष्ट, चित्रा बिष्ट और वरिष्ठ रंगकर्मी और शैलनट के संस्थापक श्रीश डोभाल के सानिध्य में प्रशिक्षुओं ने नाटक का मंचन किया। नाट्य मंचन के बाद दर्शकों के साथ सवाल-जवाब भी हुए। शैलनट के कला निदेशक डॉ. डीएन भट्ट ने कहा कि बहुत जल्द इन नाटकों का मंचन अन्य स्थानों पर होगा। इस मौके पर आनंदा अकादमी के निदेशक भूपेंद्र बिष्ट, राजीव कुमार शर्मा, डॉ. दीपक मेहता, गौरव जोशी, ललित कर्नाटक, डॉ. केदार पलड़िया, दीक्षा बिष्ट, माया बिष्ट, जगमोहन रौतेला, हरीश उप्रेती, भास्कर भौर्याल आदि रंगकर्मी मौजूद रहे।
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