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बिना प्रोफेसर के पढ़ेंगे मेडिकल के छात्र
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Mon, 20 Feb 2017 12:07 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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एमबीबीएस और पीजी की मान्यता को लेकर फंसा पेच अभी सुलझ नहीं पाया है। मई में रेडियोलाजी विभाग में तैनात एकमात्र प्रोफेसर भी सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ऐसे में रेडियोलाजी विभाग के छात्र-छात्राएं क्या बिना प्रोफेसर के पढ़ाई करेंगे। डाक्टरों की कमी झेल रहे मेडिकल कॉलेज के सामने फिर से मान्यता का संकट हो सकता है।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की मान्यता को लेकर मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया पांच वर्षों में निरीक्षण करती है। पिछले निरीक्षण के बाद एमसीआई से किसी ने खामियां बताते हुए शिकायत कर दी थी। इस पर मान्यता लटक गई थी। एमसीआई ने प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और सीनियर रेजीडेंट की कमी पूरी करने के साथ ही मशीनें भी पूरी करने को कहा था। सूत्रों की मानें तो मेडिसिन, रेडियोलाजी, बायो केमिस्ट्री, दंत रोग विभाग, फारेंसिक विभाग की फैकल्टी पूरी नहीं है।
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जनवरी में देहरादून में साक्षात्कार हुए थे मगर आचार संहिता के चलते परिणाम नहीं आ सका है। सूत्रों की मानें तो प्राचार्य ने मानक पूरे होने की रिपोर्ट एमसीआई को भेज दी है साथ ही निरीक्षण के लिए शुल्क जमा कर दिया है। प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि दो एक्स रे मशीनें लगी चुकी हैं और ईको मशीन भी जल्द आ जाएगी। डॉ. भैसोड़ा ने माना कि अभी 10 एसआर की कमी है और मान्यता में पेच फंस सकता है।
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पीजी की सीट बढ़ाने को भेजा प्रस्ताव
हल्द्वानी। राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि पीजी की अभी 27 सीटें हैं और 65 सीट करने का प्रस्ताव एमसीआई को भेजा है। बताया कि पहले एक प्रोफेसर पर दो और एक एसोसिएट प्रोफेसर पर एक सीट की मान्यता का प्रावधान था। इसे बढ़ाकर तीन और दो कर दिया गया है। फैकल्टी की कमी पीजी की सीट बढ़ने में बाधा बन सकती है।