पवेलियन से डालाकोटी की बैटिंग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस से लालकुआं विधानसभा में टिकट की दौड़ में रन आउट होने के बाद डालाकोटी दंपति ने पवेलियन से धुआंधार बैटिंग शुरू कर दी है। गौलापार क्षेत्र में डालाकोटी दंपति का दबदबा है।
डालाकोटी दंपति ने ग्रामीणों के चुनाव बहिष्कार आंदोलन में घी डाल दिया है। आंदोलन की आंच क्षेत्र की कई ग्राम सभाओं तक पहुंच गई है। कांग्रेस प्रत्याशी हरीश चंद्र दुर्गापाल के मैदान में उतरते ही गौलापार से एलबीडब्ल्यू होने की संभावना बढ़ गई है।
लालकुआं विधानसभा में बागी हरेंद्र बोरा के बाद अब डालाकोटी दंपति ने हरीश चंद्र दुर्गापाल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पूर्व ब्लाक प्रमुख संध्या डालाकोटी और कांग्रेसी नेता किरण डालाकोटी के अलावा हरेंद्र बोरा कांग्रेस से टिकट की दौड़ में थे।
कांग्रेस हाईकमान ने पीडीएफ के कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल को कांग्रेस सिंबल के साथ चुनाव मैदान में उतार दिया। इससे हरेंद्र बोरा तो बागी होकर चुनाव मैदान में कूद गए, लेकिन डालाकोटी दंपति ने हाथ पीछे खींच लिए।
डालाकोटी दंपति ने मैदान छोड़कर चुनावी शतरंज की बिसातें बिछने पर पवेलियन से धुआंधार बैटिंग शुरू कर दी है। गौलापार की ग्राम पंचायतों में चुनाव बहिष्कार आंदोलन सुलगकर शोला बन गया है। इसकी आंच कई ग्राम पंचायतों में फैल चुकी है।
करीब आठ हजार वोटर अलग-अलग गांवों में हुई पंचायतों में चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर चुके हैं। आंदोलन को हवा देकर डालाकोटी दंपति ने अपनी ताकत का एहसास करा दिया है।
इससे दुर्गापाल के साथ ही भाजपा प्रत्याशी नवीन दुम्का को भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। गौलापार और चोरगलिया क्षेत्र दुर्गापाल का सबसे कमजोर गढ़ है। इस आंदोलन से उन्हें झटका लग सकता है।
क्षेत्र की जनता का हित सर्वोपरि है। गौलापार क्षेत्र विकास की दौड़ में आज भी पीछे है। हर चुनाव में प्रत्याशी जनता को सब्जबाग दिखाते हैं। चुनाव जीतने के बाद पलटकर नहीं देखते। सूखी नदी पर दशकों बाद भी पुल नहीं बना है। हर चुनाव में यह मुद्दा बनता है और प्रत्याशियों की प्राथमिकता में शामिल होता है। क्षेत्र की जनता प्रत्याशियों के झूठे वादों से तंग आकर चुनाव बहिष्कार को मजबूर है। वह खुद स्थानीय जनप्रतिनिधि हैं। जनता के बुलावे पर पंचायतों में शामिल हो रहे हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रत्याशी या दल के खिलाफ नहीं है। प्रत्याशियों को स्थानीय जनता के वोट की ताकत का एहसास कराना जरूरी है। - किरण डालाकोटी, कांग्रेसी नेता