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खगोल विज्ञानियों के लिए बेहद मददगार होगी नई दूरबीनें
अमर उजाला ब्यूरो नैनीताल
Updated Wed, 16 Nov 2016 01:33 AM IST
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खगोल विज्ञानियों के लिए बेहद मददगार होगी नई दूरबीनें
- फोटो : अमर उजाला
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टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोनॉमी पुणे के निदेशक डॉ. एसके घोष ने कहा है कि नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक के देवस्थल में अगले साल मार्च तक चार मीटर क्षमता वाली लिक्विड मिरर टेलीस्कोप की स्थापना कर दी जाएगी।
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इससे भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के अंतरिक्ष विज्ञानियों को ब्रह्मांड के अनसुलझे सवालों को समझने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकेगी।
डॉ. घोष मंगलवार को यहां उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी में आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) की ओर से बेल्जो-इंडियन नेटवर्क फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (बीना) की चार दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इससे पहले देवस्थल में 3.6 मीटर क्षमता वाली दूरबीन की स्थापना देश के लिए गर्व की बात है।
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यह दूरबीन केवल भारत की ही नहीं बल्कि एशिया की अपने तरह की पहली दूरबीन है, जिससे अंतरिक्ष में होने वाली घटनाओं पर वृहद स्तर पर शोधकार्य किया जा सकेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कार्यशाला के माध्यम से खगोल विज्ञानियों को देवस्थल में लग चुकी 3.6 मीटर और निकट भविष्य में लगने वाली चार मीटर की लिक्विड मिरर टेलीस्कोप को कहीं अधिक अच्छी तरह समझने में मदद मिलेगी।
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एरीज के निदेशक डॉ. वहाबुद्दीन ने मुख्य अतिथि समेत देश विदेश से आए वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के बारे में बताया। बेल्जो इंडियन नेटवर्क फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (बीना) के बेल्जियम से पहुंचे प्रतिनिधि डॉ. पीटर डी कैट ने बीना के उद्देश्य बताए।
डॉ. अमितेश ओमर ने 3.6 मीटर दूरबीन से किए जा सकने वाले शोधकार्यों के बारे में बताया। डॉ. बृजेश कुमार ने देवस्थल की भौगोलिक स्थिति की जानकारी देते हुए इसे दुनिया के श्रेष्ठ और सर्वोच्च स्थलों में से एक बताया। वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे ने कहा कि 3.6 मीटर की दूरबीन वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है और भविष्य में इससे दुनियाभर के वैज्ञानिकों को मदद मिलेगी।
बीना के भारत के संयोजक और मुख्य अनुसंधानकर्ता डॉ. संतोष जोशी, कार्यशाला आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. एके पांडे ने चार दिनी कार्यशाला के उन विषयों के बारे में बताया जिन पर देशी-विदेशी वैज्ञानिक मंथन करेंगे।
संचालन डॉ. कुंतल मिश्रा ने किया। कार्यशाला के द्वितीय सत्र में एरीज के वैज्ञानिक बसंत सनवाल, बृजेश कुमार, अमितेष ओमर, एसवी पांडे ने देवस्थल में स्थापित दूरबीन से प्राप्त चित्रों आदि शोध कार्यों की जानकारी दी। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के देवेंद्र ओझा, एएन रामप्रकाश, जापान से आए केएन कोबायाशी, नैनीताल के केएम गोपीनाथन, बेल्जियम के जीन सरदेज, माइकल डी बेकर, अहमदाबाद के सचिंदर नाइक, बेंगलूरु के बृजेश कुमार ने भी 3.6 मीटर दूरबीन के विभिन्न पक्षों के अलावा अन्य शोधकार्यों की जानकारी दी।
डॉ. कुंतल मिश्रा ने संचालन किया। इस दौरान एरीज के पूर्व निदेशक प्रो. रामसागर, कुलसचिव रविंद्र कुमार, डॉ. प्रवीण सोलंकी, डॉ. यूसी दुम्का, डॉ. सतीश कुमार, प्रो. एचसी चंदोला, एटीआई के उपनिदेशक जगदीश कांडपाल, एसके वार्ष्णेय, आनंद श्रीवास्तव समेत विभिन्न देशों से पहुंचे वैज्ञानिक थे।
बीना से होगा शोध और तकनीक का आदान प्रदान
अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में होने वाले नए शोध कार्यों और नई तकनीक के प्रचार-प्रसार के बारे में एक दूसरे को सहयोग करने और शोध कार्यों का आदान-प्रदान करने के लिए मकसद से दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने बेल्जो-इंडियन नेटवर्क फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स साइंस्टिफिक प्रोग्राम (बीना) का गठन किया है।
बीना के भारतीय संयोजक डॉ. संतोष जोशी ने बताया कि बीना का गठन दोनों देशों के वैज्ञानिकों के लिए बेहद मददगार साबित होगा।
दूरबीनों के महत्व पर होगा मंथन
उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी में जुटे देश-विदेश के खगोल वैज्ञानिक अगले तीन दिनों तक देवस्थल में लगी 3.6 मीटर क्षमता वाली दूरबीन से प्राप्त होने वाले चित्र और उनकी उपयोगिता पर चर्चा करेंगे वहीं वह देवस्थल में निकट भविष्य में स्थापित होने वाली चार मीटर क्षमता वाली लिक्विड मिरर दूरबीन की स्थापना के बाद उसकी उपयोगिता पर मंथन करेंगे।
इतना ही नहीं कार्यशाला के दौरान खगोल वैज्ञानिकों की टीम देवस्थल और एरीज का भ्रमण भी करेगी।
बैल्जियम में होगी दूसरी कार्यशाला
बेल्जो-इंडियन नेटवर्क फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स साइंस्टिफिक प्रोग्राम के तहत सरोवर नगरी में आयोजित यह पहली कार्यशाला है। इसमें विभिन्न देशों के खगोल विज्ञानी अंतरिक्ष के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। कार्यशाला के दौरान यह भी बताया गया कि प्रोग्राम की दूसरी कार्यशाला निकट भविष्य में बेल्जियम में आयोजित की जाएगी।