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मरीजों का दूध बंट रहा था स्टाफ में
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हल्द्वानी बेस अस्पताल में छापा मारते सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह। अमर उजाला
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हल्द्वानी। सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल में मरीजों के लिए आने वाला दूध स्टाफ मेें बांटा जा रहा था। सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह के छापे में इसका खुलासा हुआ। साथ ही मरीजों को दी जाने वाली दलिया भी मानक के अनुरूप नहीं दी जा रही थी। दूध और दलिया के सैंपल भराकर जांच के लिए भेजे गए हैं।
डीएम सविन बंसल के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट ने मंगलवार सुबह बेस अस्पताल में छापा मारा। अस्पताल की कैंटीन का निरीक्षण किया गया तो कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। साथ ही किचन में काफी गंदगी थी और खाद्य सामग्री भी खुले में रखी हुई थी। भोजन बनाने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले और भोजन रखने के लिए प्रयोग किए जाने वाले बर्तन भी काफी गंदे थे। मरीजों को बांटे जा रहे दलिया के संबंध में जब कैंटीन कर्मियों से पूछा गया तो मानक संबंधी कोई भी चार्ट नहीं दिया गया। कैंटीन कर्मी ने बताया कि चिकित्सालय परिसर में कार्यरत महिला कार्मिकों (स्टाफ) को उक्त दूध वितरित किया जाता है। जानकारी के बाद सिंह ने वार्ड बी स्थित प्रथम तल अनुभाग का निरीक्षण किया तो एक महिला कार्मिक ने बताया कि खाद्य सामग्री वितरित करने वाले कैंटीन कर्मी ने दूध की थैली लाकर दी। ठेकेदार की ओर से नियुक्त कर्मी ने बताया कि लंबे समय से चिकित्सालय में तैनात स्टाफ नर्सों को दूध की थैलियां उपलब्ध कराई जाती हैं। सिंह ने बताया कि पूछताछ करने पर स्टाफ नर्सों और अन्य कार्मिक संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
सिंह ने बताया कि किचन में गंदगी को लेकर पूर्व में भी ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया था साथ ही अर्थदंड लगाया जा चुका है। इसके बावजूद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल में संचालित कैंटीन में घरेलू रसोई गैस का प्रयोग किया जा रहा था। घरेलू रसोई गैस प्रयोग करने के कारण ठेकेदार पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
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पीपीपी मोड पर संचालित नेफ्रोप्लस प्लस डायलिसिस सेंटर पर छापा मारा तो कई दिनों से रखा हुआ बायो मेडिकल वेस्ट मिला। सिंह ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट खुले में रखा हुआ था और भारी मात्रा में था। सेंटर की ओर से सामान्य कचरे और बायो मेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण नहीं किया जा रहा है। सिंह ने तत्काल एसीएमओ डॉ. एमएम तिवारी को मौके पर बुला लिया। नियमों का उल्लंघन करने के कारण सिटी मजिस्ट्रेट ने उक्त संस्था पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
कैंटीन के लिए कराएंगे टेंडर
हल्द्वानी। सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरीश लाल ने कहा कि कैंटीन में गंदगी मिलने के कारण पूर्व में भी अर्थदंड लगाया जा चुका है। सिटी मजिस्ट्रेट के छापे में आज दोबारा गंदगी मिली है। ठेकेदार को नोटिस दिया जा रहा है। नोटिस के जवाब के बाद ठेका निरस्त किया जाएगा। साथ ही दो दिन के भीतर कैंटीन के लिए नया टेंडर कराया जाएगा।
मानकों के अनुसार मरीजों को खाद्य सामग्री न देने के कारण कैंटीन का संचालन कर रहे ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। साथ ही बायोमेडिकल वेस्ट खुले में रखने की रिपोर्ट शासन को भेजने के साथ ही नेफ्रोप्लस को नोटिस भी दिया जाएगा। स्टाफ नर्सों से पूछताछ की गई थी तो उन्होंने बताया कि दूध की थैली कैंटीन कर्मी से मंगाते हैं और माह में उसका भुगतान करते हैं।
डॉ. हरीश लाल, सीएमएस
20 वर्ष पुरानी मशीनों पर मरीजों का बोझ
सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल की हालत खराब है। 15 से 20 वर्ष पुरानी मशीनों पर मरीजों का बोझ है। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और ओपीजी जैसे मशीनें खराब पड़ी हैं।
बेस अस्पताल में एक्सरे मशीन 2003 में लगी थी। एक दिन में 50 से 60 एक्सरे होते हैं। मशीन के प्रोसेसर को गत्ते से बांधकर चलाया जा रहा है। एक्सरे मशीन आए दिन खराब होती है और उससे ठीक कराने में दस से पंद्रह दिन का समय लग जाता है। दांतों के एक्सरे में प्रयोग होने वाली ओपीजी (आर्थो पेंटोंग्राम) मशीन भी 2005 में लगी थी। मशीन पिछले दो वर्ष से खराब पड़ी है। साथ ही अल्ट्रासाउंड मशीन को सीज कर कंडम घोषित करने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा जा चुका है। अल्ट्रासाउंड मशीन वर्ष 2000 में लगी थी। बता दें कि सीटी स्कैन मशीन भी बिना बैटरी के डायरेक्ट बिजली सप्लाई से चल रही है। सीटी स्कैन मशीन के लिए 36 बैटरी की जरूरत है। मशीन अगर संचालन के दौरान किसी दिन ठप हुई तो कंडम हो जाएगी। रेडियोलाजिस्ट डॉ. विपिन पंत ने बताया कि इसकी रिपोर्ट सीएमएस डॉ. हरीश लाल को 18 नवंबर को दी थी। सीएमएस डॉ. हरीश लाल ने बताया कि स्वास्थ्य महानिदेशक समेत अन्य अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है।
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डीएम सविन बंसल के आदेश पर सिटी मजिस्ट्रेट ने मंगलवार सुबह बेस अस्पताल में छापा मारा। अस्पताल की कैंटीन का निरीक्षण किया गया तो कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। साथ ही किचन में काफी गंदगी थी और खाद्य सामग्री भी खुले में रखी हुई थी। भोजन बनाने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले और भोजन रखने के लिए प्रयोग किए जाने वाले बर्तन भी काफी गंदे थे। मरीजों को बांटे जा रहे दलिया के संबंध में जब कैंटीन कर्मियों से पूछा गया तो मानक संबंधी कोई भी चार्ट नहीं दिया गया। कैंटीन कर्मी ने बताया कि चिकित्सालय परिसर में कार्यरत महिला कार्मिकों (स्टाफ) को उक्त दूध वितरित किया जाता है। जानकारी के बाद सिंह ने वार्ड बी स्थित प्रथम तल अनुभाग का निरीक्षण किया तो एक महिला कार्मिक ने बताया कि खाद्य सामग्री वितरित करने वाले कैंटीन कर्मी ने दूध की थैली लाकर दी। ठेकेदार की ओर से नियुक्त कर्मी ने बताया कि लंबे समय से चिकित्सालय में तैनात स्टाफ नर्सों को दूध की थैलियां उपलब्ध कराई जाती हैं। सिंह ने बताया कि पूछताछ करने पर स्टाफ नर्सों और अन्य कार्मिक संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
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सिंह ने बताया कि किचन में गंदगी को लेकर पूर्व में भी ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया था साथ ही अर्थदंड लगाया जा चुका है। इसके बावजूद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल में संचालित कैंटीन में घरेलू रसोई गैस का प्रयोग किया जा रहा था। घरेलू रसोई गैस प्रयोग करने के कारण ठेकेदार पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।
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पीपीपी मोड पर संचालित नेफ्रोप्लस प्लस डायलिसिस सेंटर पर छापा मारा तो कई दिनों से रखा हुआ बायो मेडिकल वेस्ट मिला। सिंह ने बताया कि बायो मेडिकल वेस्ट खुले में रखा हुआ था और भारी मात्रा में था। सेंटर की ओर से सामान्य कचरे और बायो मेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण नहीं किया जा रहा है। सिंह ने तत्काल एसीएमओ डॉ. एमएम तिवारी को मौके पर बुला लिया। नियमों का उल्लंघन करने के कारण सिटी मजिस्ट्रेट ने उक्त संस्था पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
कैंटीन के लिए कराएंगे टेंडर
हल्द्वानी। सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरीश लाल ने कहा कि कैंटीन में गंदगी मिलने के कारण पूर्व में भी अर्थदंड लगाया जा चुका है। सिटी मजिस्ट्रेट के छापे में आज दोबारा गंदगी मिली है। ठेकेदार को नोटिस दिया जा रहा है। नोटिस के जवाब के बाद ठेका निरस्त किया जाएगा। साथ ही दो दिन के भीतर कैंटीन के लिए नया टेंडर कराया जाएगा।
मानकों के अनुसार मरीजों को खाद्य सामग्री न देने के कारण कैंटीन का संचालन कर रहे ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। साथ ही बायोमेडिकल वेस्ट खुले में रखने की रिपोर्ट शासन को भेजने के साथ ही नेफ्रोप्लस को नोटिस भी दिया जाएगा। स्टाफ नर्सों से पूछताछ की गई थी तो उन्होंने बताया कि दूध की थैली कैंटीन कर्मी से मंगाते हैं और माह में उसका भुगतान करते हैं।
डॉ. हरीश लाल, सीएमएस
20 वर्ष पुरानी मशीनों पर मरीजों का बोझ
सोबन सिंह जीना बेस अस्पताल की हालत खराब है। 15 से 20 वर्ष पुरानी मशीनों पर मरीजों का बोझ है। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और ओपीजी जैसे मशीनें खराब पड़ी हैं।
बेस अस्पताल में एक्सरे मशीन 2003 में लगी थी। एक दिन में 50 से 60 एक्सरे होते हैं। मशीन के प्रोसेसर को गत्ते से बांधकर चलाया जा रहा है। एक्सरे मशीन आए दिन खराब होती है और उससे ठीक कराने में दस से पंद्रह दिन का समय लग जाता है। दांतों के एक्सरे में प्रयोग होने वाली ओपीजी (आर्थो पेंटोंग्राम) मशीन भी 2005 में लगी थी। मशीन पिछले दो वर्ष से खराब पड़ी है। साथ ही अल्ट्रासाउंड मशीन को सीज कर कंडम घोषित करने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा जा चुका है। अल्ट्रासाउंड मशीन वर्ष 2000 में लगी थी। बता दें कि सीटी स्कैन मशीन भी बिना बैटरी के डायरेक्ट बिजली सप्लाई से चल रही है। सीटी स्कैन मशीन के लिए 36 बैटरी की जरूरत है। मशीन अगर संचालन के दौरान किसी दिन ठप हुई तो कंडम हो जाएगी। रेडियोलाजिस्ट डॉ. विपिन पंत ने बताया कि इसकी रिपोर्ट सीएमएस डॉ. हरीश लाल को 18 नवंबर को दी थी। सीएमएस डॉ. हरीश लाल ने बताया कि स्वास्थ्य महानिदेशक समेत अन्य अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है।