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हत्या के अभियुक्त की उम्रकैद की सजा बरकरार
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
Updated Thu, 27 Jul 2017 02:38 AM IST
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हाइकोर्ट ने निचली अदालत बागेश्वर की ओर से हत्या के अभियुक्त को दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। साथ ही कोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों के एसएसपी को आदेशित किया है कि वे 21 साल से कम उम्र वालों को बंदूक का लाइसेंस न दें।
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पिछले पांच साल में जिस व्यक्ति को झगड़े या हिंसा के लिए कोई सजा मिली हो उन्हें भी लाइसेंस न दें। जिस व्यक्ति को शांति बनाए रखने के लिए बांड भरवाया गया हो उसे भी लाइसेंस न दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रम, शादी समारोह, स्कूल, कॉलेज कैंपस या किसी भी ऐसे कार्यक्रम में जहां भीड़ एकत्रित हो वहां हथियार लेकर कोई न जाए।
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बुधवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। भगवान सिंह ने अपील दायर कर निचली अदालत बागेश्वर की ओर से पारित 12 जुलाई 2013 के आदेश को चुनौती दी थी।
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उक्त आदेश में निचली अदालत ने अभियुक्त भगवान सिंह को हत्या के प्रयास और हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
ये था मामला
मामले के अनुसार धरम सिंह ने 21 अप्रैल 2007 को थाना बागेश्वर में मुकदमा दर्ज कर आरोप लगाया था कि अभियुक्त के बेटे की शादी थी। बारात की वापसी पर अभियुक्त ने फायर किया, जिसमें अनिता, खुशहाल सिंह, उमीद सिंह, विमला को छर्र लगे।
सभी को अस्पताल ले जाया गया, जहां अनीता और खुशहाल सिंह की मौत हो गई। इस मामले में निचली अदालत ने अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।