{"_id":"575852004f1c1bee5a9c5c9b","slug":"the-helpless-passengers-and-tourists","type":"story","status":"publish","title_hn":"यात्री और सैलानी हुए बे-बस ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यात्री और सैलानी हुए बे-बस
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Wed, 08 Jun 2016 10:42 PM IST
विज्ञापन
रोडवेज कर्मियों की हड़ताल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने संविदा, आउटसोर्स कर्मियों को नियमित करने की मांग और सीधी भर्ती प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। यूनियन ने बुधवार को धरना, प्रदर्शन की घोषणा की थी, लेकिन बड़ी संख्या में कर्मी काम पर नहीं गए। निगम प्रबंधन के मुताबिक कई बसों का संचालन भी आंदोलनकारियों ने बाधित किया।
इसके चलते सैकड़ों बसों के संचालन और राजस्व पर असर पड़ा। इसके चलते सैलानी और यात्री दिनभर परेशान हुए। वहीं, यूनियन ने धरना-प्रदर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह को सौंपा। धरने में काठगोदाम, भवाली, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, रानीखेत आदि डिपो से बड़ी संख्या में कर्मचारी पहुंचे।
नैनीताल रीजन से करीब 300 बसों का संचालन होता है। इसमें से भी करीब 150 बसें हल्द्वानी और काठगोदाम डिपो की चलती है। उत्तराखंड रोडवेज यूनियन की शक्ति का केंद्र भी हल्द्वानी में है। ऐसे में दोनों डिपो की बसों पर ज्यादा असर पड़ा। बसें डिपो से बाहर तक नहीं आ सकी। छिटपुट बसों का बड़ी मुश्किल से संचालन हो सका। निगम प्रबंधन के मुताबिक करीब 200 बसें नहीं चल सकी।
विज्ञापन
ऐसे में पहाड़ से लेकर दिल्ली, पंजाब, बरेली आदि जगहों को जाने वाली बस सेवा प्रभावित हुईं। इधर, आरएम नैनीताल रीजन सीपी कपूर का कहना है कि प्रतिदिन नैनीताल रीजन में 52 लाख तक औसत आय होती है। बसों का संचालन न होने से करीब 30 लाख तक के नुकसान का अनुमान है। शाम को आंदोलन समाप्त हो गया है। ऐेसे में अतिरिक्त बसों को लगाकर यात्रियों को भेजने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, एआरएम इंद्रा जंगपांगी का कहना है कि चक्काजाम की कोई भी घोषणा नहीं थी। केवल धरना-प्रदर्शन की बात कर्मियों ने कही थी। लेकिन, आंदोलनकारी कर्मियों ने कई सेवाओं के संचालन प्रभावित किया। कम ही बसें चल पायी हैं।
हर स्तर पर संघर्ष करने का एलान
हल्द्वानी। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के हल्द्वानी बस अड्डे पर दिए गए धरने में वक्ताओं ने तत्काल सीधी भर्ती प्रक्रिया रोकने की मांग की। प्रांतीय अध्यक्ष एचआर बहुगुणा ने कहा कि जो कर्मचारी वर्षों से रोडवेज को सेवा दे रहे हैं, पहले उनको नियमित किया जाना चाहिए। पदाधिकारी मुकेश वर्मा, राम अवध यादव, मो. जमील खां, कमल पपनै ने कहा कि मांगों को लेकर हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। इस दौरान शमीम अहमद, प्रदीप शर्मा, प्रकाश तिवारी, गुरदेव सिंह, सोहन लाल गुप्ता आदि मौजूद थे।
...तो अभी भी चल रही हड़ताल
हल्द्वानी। परिवहन कर्मी स्थानांतरण के विरोध में दो जून को हड़ताल पर चले गए थे। लोगों को हड़ताल की सूचना हो, इसके लिए बाकायदा आरटीओ ऑफिस के कमरे के पास नोटिस भी चस्पा भी कर दिया गया। हड़ताल के बाद परिवहन मुख्यालय ने स्थानांतरण सूची में संशोधन का आश्वासन दिया। इसके बाद से हड़ताल स्थगित हो गई। लेकिन, हड़ताल करने का नोटिस अभी भी आरटीओ कार्यालय के पास लगा हुआ है। इसको देखने की फुर्सत न तो हड़ताल कर्मियों को है न अधिकारियों को। दूसरी तरफ अभी स्थानांतरण को लेकर बताया जाता है कि अंदरखाने खींचतान चल रही है। इसके अलावा पदाधिकारियों के पद और पदाधिकारी रहते हुए कितने समय बाद स्थानांतरण हो सकता है, इसको लेकर भी खींचतान है। ऐसे में एक बार फिर मोर्चा खुल सकता है। वहीं, एआरटीओ डॉ. गुरदेव सिंह का कहना है कि स्थितियां सामान्य है।
विज्ञापन
इसके चलते सैकड़ों बसों के संचालन और राजस्व पर असर पड़ा। इसके चलते सैलानी और यात्री दिनभर परेशान हुए। वहीं, यूनियन ने धरना-प्रदर्शन करने के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट हरबीर सिंह को सौंपा। धरने में काठगोदाम, भवाली, हल्द्वानी, अल्मोड़ा, रानीखेत आदि डिपो से बड़ी संख्या में कर्मचारी पहुंचे।
विज्ञापन
नैनीताल रीजन से करीब 300 बसों का संचालन होता है। इसमें से भी करीब 150 बसें हल्द्वानी और काठगोदाम डिपो की चलती है। उत्तराखंड रोडवेज यूनियन की शक्ति का केंद्र भी हल्द्वानी में है। ऐसे में दोनों डिपो की बसों पर ज्यादा असर पड़ा। बसें डिपो से बाहर तक नहीं आ सकी। छिटपुट बसों का बड़ी मुश्किल से संचालन हो सका। निगम प्रबंधन के मुताबिक करीब 200 बसें नहीं चल सकी।
विज्ञापन
ऐसे में पहाड़ से लेकर दिल्ली, पंजाब, बरेली आदि जगहों को जाने वाली बस सेवा प्रभावित हुईं। इधर, आरएम नैनीताल रीजन सीपी कपूर का कहना है कि प्रतिदिन नैनीताल रीजन में 52 लाख तक औसत आय होती है। बसों का संचालन न होने से करीब 30 लाख तक के नुकसान का अनुमान है। शाम को आंदोलन समाप्त हो गया है। ऐेसे में अतिरिक्त बसों को लगाकर यात्रियों को भेजने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं, एआरएम इंद्रा जंगपांगी का कहना है कि चक्काजाम की कोई भी घोषणा नहीं थी। केवल धरना-प्रदर्शन की बात कर्मियों ने कही थी। लेकिन, आंदोलनकारी कर्मियों ने कई सेवाओं के संचालन प्रभावित किया। कम ही बसें चल पायी हैं।
हर स्तर पर संघर्ष करने का एलान
हल्द्वानी। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के हल्द्वानी बस अड्डे पर दिए गए धरने में वक्ताओं ने तत्काल सीधी भर्ती प्रक्रिया रोकने की मांग की। प्रांतीय अध्यक्ष एचआर बहुगुणा ने कहा कि जो कर्मचारी वर्षों से रोडवेज को सेवा दे रहे हैं, पहले उनको नियमित किया जाना चाहिए। पदाधिकारी मुकेश वर्मा, राम अवध यादव, मो. जमील खां, कमल पपनै ने कहा कि मांगों को लेकर हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा। इस दौरान शमीम अहमद, प्रदीप शर्मा, प्रकाश तिवारी, गुरदेव सिंह, सोहन लाल गुप्ता आदि मौजूद थे।
...तो अभी भी चल रही हड़ताल
हल्द्वानी। परिवहन कर्मी स्थानांतरण के विरोध में दो जून को हड़ताल पर चले गए थे। लोगों को हड़ताल की सूचना हो, इसके लिए बाकायदा आरटीओ ऑफिस के कमरे के पास नोटिस भी चस्पा भी कर दिया गया। हड़ताल के बाद परिवहन मुख्यालय ने स्थानांतरण सूची में संशोधन का आश्वासन दिया। इसके बाद से हड़ताल स्थगित हो गई। लेकिन, हड़ताल करने का नोटिस अभी भी आरटीओ कार्यालय के पास लगा हुआ है। इसको देखने की फुर्सत न तो हड़ताल कर्मियों को है न अधिकारियों को। दूसरी तरफ अभी स्थानांतरण को लेकर बताया जाता है कि अंदरखाने खींचतान चल रही है। इसके अलावा पदाधिकारियों के पद और पदाधिकारी रहते हुए कितने समय बाद स्थानांतरण हो सकता है, इसको लेकर भी खींचतान है। ऐसे में एक बार फिर मोर्चा खुल सकता है। वहीं, एआरटीओ डॉ. गुरदेव सिंह का कहना है कि स्थितियां सामान्य है।