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जेल महानिदेशक ने हाईकोर्ट को दी जेलों की विस्तृत जानकारी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 10:17 PM IST
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The Director General of Prisons gave detailed information about the jails to the High Court
नैनीताल। प्रदेश की जेलों में सीसीटीवी कैमरे सहित अन्य सुविधाओं को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान जेल महानिदेशक ने शपथपत्र के माध्यम से हाईकोर्ट को जेल प्रशासन की ओर से लिए गए निर्णयों, जेलों में कैदियों की संख्या और उन्हें दी जा रहीं सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष रामचंद्र उर्फ राजू व संतोष उपाध्याय की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
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पूर्व में हाईकोर्ट ने जेल महानिदेशक से पूछा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का कितना पालन हुआ है, राज्य के जेलों में कितने सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जेल में कैदियों के रहने के लिए क्या व्यवस्था है, क्या उन्हें जेल में शिक्षा या रोजगार दिया जा रहा है, जेल मैनुअल में संसोधन किया गया है या नहीं, जेलों की क्षमता कितनी है। इस पर जेल महानिदेशक की ओर से शपथपत्र पेश कर कहा गया कि प्रथम चरण में देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी उपकारागार में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय ले लिया गया है।
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शपथपत्र में बताया गया कि दूसरे चरण में राज्य के सभी जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया है। कैदियो के रोजगार के लिए कौशल विकास योजना अपनाई जा रही है। कैदियों का जीवन सुधारने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग का सहारा लिया जा रहा है। जेलों में कैदियों के रहने के लिए आवासों के निर्माण के लिए टेंडर निकाए गए हैं और तीन नई जेलें पिथौरागढ़, चंपावत व ऊधम सिंह नगर में बनाने का प्रस्ताव भेजा है।
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शपथपत्र में बताया गया कि देहरादून में 580 की जगह 1421 कैदी, हरिद्वार में 840 की जगह 1328 और सब जेल हल्द्वानी में 382 के जगह 1756 कैदी है। तीनों जेलों में 3540 कैदियों की क्षमता है जबकि इन जेलों में 6608 कैदी हैं।

यह थी याचिका
मामले के अनुसार रामचंद्र उर्फ राजू व संतोष उपाध्याय ने हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में एक आदेश जारी कर सभी राज्यों से कहा था कि वे अपने राज्य की जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाएं व जेलों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं। राज्य में खाली पड़े राज्य मानवाधिकार आयोग के पदों को भी भरें। याचिका में कहा गया कि लेकिन इतना समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। ी
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