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आने वाला दशक उत्तराखंड का: मोदी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Dec 2021 11:21 PM IST
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The coming decade belongs to Uttarakhand: Modi
हल्द्वानी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आने वाला दशक उत्तराखंड का होगा। इसके लिए कई विकास कार्यों पर काम करने की जरूरत पर सरकार जोर दे रही है। उत्तराखंड के लोगों का सामर्थ्य इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाएगा यह पक्का विश्वास है।
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हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज के मैदान में 17547 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने के बाद आयोजित जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उत्तराखंड के दशक की बात वह यों ही नहीं कह रहे हैं। वह यहां की मिट्टी की ताकत को जानते हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बढ़ रहा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, चारधाम महा परियोजना, रेल के सभी रूट्स, नए हाईड्रो प्रोजेक्ट, होम स्टे, पर्यटन, औद्योगिक क्षमता हमारे इस संकल्प को पूरा करेंगे। यहां बढ़ रही प्राकृतिक खेती, यहां के हर्बल उत्पाद, कृषि क्षेत्र भी उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण लाने वाले हैं।
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विपक्ष को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि पहाड़ पर सड़क, बिजली और पानी पहुंचाने के लिए जो मेहनत करनी थी पहले सरकार में बैठे लोग इससे हमेशा दूर भागते रहे। यहां के सैकड़ों गांवों की कितनी पीढ़ियां अच्छी सड़कों के अभाव में, अच्छी सुविधाओं के अभाव में प्यारे उत्तराखंड को छोड़कर कहीं और जाकर बस गईं।
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हल्द्वानी को दी दो हजार करोड़ की सौगात
हल्द्वानी। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत में ही हल्द्वानी के लोगों का दिल जीतने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि वह नए साल की सौगात लेकर आए हैं। हल्द्वानी शहर के ओवरऑल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए दो हजार करोड़ की योजना लेकर आए हैं। अब हल्द्वानी में पानी, सीवरेज सड़क, पार्किंग, स्ट्रीट लाइट सभी जगह पर अभूतपूर्व विकास होगा।
कुमाऊंनी से भाषण शुरू, कुमाऊंनी में ही खत्म
शुरुआत: गोलज्यू की यह पवित्र धरती कुमाऊं में आपूं सबै भाई बैंणिन कें म्योर शत शत नमस्कार, सबै नानतिनान कैं म्योर प्यार आशीष। (गोलज्यू की इस पवित्र धरती कुमाऊं में आप सभी भाई और बहनों को मेरा शत-शत नमस्कार। सभी बच्चों को मेरा प्यार आशीष।)
समापन: पोरू बटि साल 2022 उनेर छ । आपूं सब उत्तराखंडीन कैं नई सालै बधै ऊंण साथै घुघुती त्यारैकि लेक बधै। (परसों से साल 2020 शुरू हो रहा है। आप सभी उत्तराखंड के लोगों को नए साल की बधाई साथ ही घुघुती त्योहार की भी बधाई।)
पुरानी चीजों को ठीक करने में जा रहा समय
हल्द्वानी। प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरा सात साल का रिकॉर्ड देख लीजिए। खोज खोजकर ऐसी पुरानी चीजों को ठीक करने मेरा टाइम जा रहा है। अब मैं काम को ठीक कर रहा हूं और आप उनको (विपक्ष को) ठीक कीजिए।
गंगोत्री से गंगा सागर तक हम मिशन में जुटे
हल्द्वानी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गंगोत्री से गंगा सागर तक हम एक मिशन में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि शौचालय के निर्माण से, बेहतर सीवरेज सिस्टम से, पानी के ट्रीटमेंट की आधुनिक सुविधाओं से गंगा में गिरने वाले गंदे नालों की संख्या तेजी से कम हो रही है।
खुद को पहाड़ से जोड़ा
हल्द्वानी। प्रधानमंत्री ने अपने 35 मिनट के भाषण में खुद को पहाड़ से जोड़ने की कोशिश की। जागेश्वर, बागेश्वर और सोमेश्वर तीर्थ स्थलों को प्रमाण करते हुए इनके संरक्षण और संवर्द्धन पर जोर दिया। पं. बद्रीदत्त पांडे को याद करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तरायणी मेले में कुली बेगार प्रथा का अंत हुआ था। आज कुमाऊं आने का सौभाग्य मिला है आपके साथ जो गहरा नाता रहा है उसकी पुरानी यादें ताजा होना लाजिमी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने उन्हें कुमाऊंनी टोपी पहनाई तो मोदी ने कहा कि उत्तराखंड की टोपी पहनाई गई है। उनके लिए इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है। मैं इसे छोटा सम्मान नहीं मानता। उत्तराखंड के गर्व के साथ मेरी भावनाएं जुड़ जाती हैं।
कर्णप्रयाग-ऋषिकेश रेल रूट बन रहा है टनकपुर बागेश्वर रेल रूट भी बनेगा
हल्द्वानी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें बताया गया है कि टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को लेकर उत्तराखंड विरोधी नए भ्रम फैला रहे हैं। फाइनल सर्वे इस प्रोजेक्ट का बहुत बड़ा आधार है। यह सब इसलिए हो रहा है कि ताकि रेल लाइन पर जल्दी से जल्दी काम शुरू हो सके। आज मैं विश्वास दिलाने आया हूं कि कर्णप्रयाग-ऋषिकेश रेल रूट बन रहा है। कल टनकपुर-बागेश्वर रूट भी बनेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले जो सरकार में रहे हैं योजनाओं को लटकाना उनका परमानेंट ट्रेडमार्क रहा है। लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना का भी यही हाल है। इस परियोजना के बारे में 1976 में पहली बार सोचा गया था। करीब 46 साल बाद हमारी सरकार ने इस काम का शिलान्यास किया है। जो काम 1974 में सोचा गया 46 साल लग गए यह बड़ा गुनाह है। यह देश का दुर्भाग्य है कि करीब-करीब पांच दशक से एक योजना फाइलों में इधर से उधर लटकी रही।
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