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ट्रिंचिंग ग्राउंड की आग से हल्द्वानी की आवो-हवा दूषित, आरएसपीएम पहुंचा 100 के भी पार..

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 20 Apr 2022 11:55 PM IST
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the climate of haldwani deteriorated due to the fir of the trenching  ground
हल्द्वानी। ट्रंचिंग ग्राउंड में चार दिन से कूड़े के ढेर में धधक रही आग अब पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में प्रदूषण मापक रेस्पिरेबल सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम) 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक से कहीं ज्यादा मापा गया है। वहीं नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा फिलहाल तय मानक से कम है।
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रविवार को ट्रंचिंग ग्राउंड में आग लगी थी। लाख कोशिशों के बावजूद संबंधित विभाग आग पर काबू नहीं पा सके हैं। वहीं चार दिनों से धधक रही आग अब पर्यावरण और हल्द्वानी के लोगों के लिए हानिकारक होती जा रही है। मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण मापने के लिए ट्रंचिंग ग्राउंड में मशीनें लगाई थीं। बुधवार को आई रिपोर्ट ने प्रशासन की चिंताओं को और भी बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक आरएसपीएम 136.9 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक आया है, जिसे 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक तक ही रहना चाहिए। वहीं पर्यावरण में नाइट्रोजन की मात्रा तय मानक 80 से कम 27.2 है और सल्फर डाई ऑक्साइड तय मानक 80 से कम 14.6 मापा गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डीके जोशी ने बताया कि अगर आरएसपीएम की मात्रा को एक्यूआई माध्यम में देखा जाए तो यह 125 आंका गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया तो यह आंकड़े बदल भी सकते हैं।
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आंख, नाक, कान व गले की समस्या आ सकती है सामने
सुशीला तिवारी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके सत्यवली ने बताया कि लंबे समय तक अगर आग पर काबू नहीं पाया गया और पर्यावरण में हानिकारक धुएं का विस्तार जारी रहा तो आंख, नाक, कान व गले की समस्या के साथ-साथ त्वचा से जुड़ी बीमारी भी लोगों में बढ़ सकती है। इसके साथ ही ज्यादा दिनों तक धुआं रहने की वजह से कभी-कभी कैंसर के लक्षण भी पैदा हो जाते हैं, तो इसका भी ध्यान रखना होगा।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है कम
फिजिशियन डॉ. नीलांबर भट्ट ने बताया कि लंबे समय तक धुआं पर्यावरण में रहने की वजह से जहां लोगों में बीमारी फैलने की दिक्कतें रहती हैं वहीं लोगों के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। इसकी वजह से बीमारी कभी-कभी बड़ा रूप भी इख्तयार कर लेती है।
ऐसे करें बचाव
1-नाक और गले की परेशानी से बचने के लिए लोग बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग जरूर करें।
2-आंखों को बचाने के लिए धूप का चश्मा या अन्य तरह के चश्मे भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
3-घर पहुंचने पर हाथ, मुंह और पैरों को अच्छी तरह से धोएं, ताकि त्वचा संबंधी समस्या से राहत मिल सके।
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