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पौने तीन अरब से शहर की बिजली लाइनें होंगी भूमिगत
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हल्द्वानी। शहर की बिजली लाइनों को भूमिगत करने पर दो अरब सत्तर करोड़ का खर्च आएगा। ऊर्जा निगम मुख्यालय योजना का खाका तैयार करने के साथ ही केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के पास बजट के लिए प्रस्ताव भी भेज चुका है। उम्मीद है कि चुनाव आचार संहिता हटने के बाद इस योजना को पूरा करने में तेजी आएगी।
उत्तराखंड के जिला हरिद्वार में पहले ही बिजली लाइनों को भूमिगत किया जा चुका था। कुछ इसी तर्ज पर कुमाऊं मंडल में हल्द्वानी के शहरी क्षेत्र में पहले चरण में 11 केवी और एलटी बिजली लाइनों को अंडर ग्राउंड करने की योजना पर विचार किया गया था। अंडरग्राउंड होने से जहां शहर में बिजली लाइनों के जाल से छुटकारा मिलेगा वहीं बिजली तारों से होने वाले हादसों में कमी आएगी।
अधिशासी अभियंता (नगर) डीएस बिष्ट कहते हैं कि निगम के अधिकारियों के साथ योजना के मद्देनजर व्यापक सर्वे कराया गया है। कहां-कहां पर बिजली लाइनों को भूमिगत किया जा सकता है, इसका सर्वे कराने के बाद प्रस्ताव को उच्चस्तर से केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को भेजा गया है। इस कार्य पर करीब दो अरब सत्तर करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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पहले चरण में शहर का सघन इलाका शामिल
हल्द्वानी। अधिशासी अभियंता डीएस बिष्ट कहते हैं कि पहले चरण में हल्द्वानी नगर के सघन इलाके को शामिल किया गया है। इसके तहत कालाढूंगी सब स्टेशन, 13 बीघा सब स्टेशन और सुभाष नगर सब स्टेशन का राजपुरा क्षेत्र शामिल किया गया है। इन जगहों पर ऊर्जा निगम के करीब 25 हजार उपभोक्ता हैं। यह क्षेत्र संवेदनशील भी हैं। योजना के तहत करीब पांच सौ किमी की 11 केवी और एलटी लाइन को अंडर ग्राउंड करने पर विचार किया गया है। कहा कि भविष्य में जिस संस्था को कार्य आवंटित होगा, संभव है कि वह भी आकलन कर योजना के स्वरूप में आवश्यकतानुसार संशोधन करेगी।
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उत्तराखंड के जिला हरिद्वार में पहले ही बिजली लाइनों को भूमिगत किया जा चुका था। कुछ इसी तर्ज पर कुमाऊं मंडल में हल्द्वानी के शहरी क्षेत्र में पहले चरण में 11 केवी और एलटी बिजली लाइनों को अंडर ग्राउंड करने की योजना पर विचार किया गया था। अंडरग्राउंड होने से जहां शहर में बिजली लाइनों के जाल से छुटकारा मिलेगा वहीं बिजली तारों से होने वाले हादसों में कमी आएगी।
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अधिशासी अभियंता (नगर) डीएस बिष्ट कहते हैं कि निगम के अधिकारियों के साथ योजना के मद्देनजर व्यापक सर्वे कराया गया है। कहां-कहां पर बिजली लाइनों को भूमिगत किया जा सकता है, इसका सर्वे कराने के बाद प्रस्ताव को उच्चस्तर से केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय को भेजा गया है। इस कार्य पर करीब दो अरब सत्तर करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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पहले चरण में शहर का सघन इलाका शामिल
हल्द्वानी। अधिशासी अभियंता डीएस बिष्ट कहते हैं कि पहले चरण में हल्द्वानी नगर के सघन इलाके को शामिल किया गया है। इसके तहत कालाढूंगी सब स्टेशन, 13 बीघा सब स्टेशन और सुभाष नगर सब स्टेशन का राजपुरा क्षेत्र शामिल किया गया है। इन जगहों पर ऊर्जा निगम के करीब 25 हजार उपभोक्ता हैं। यह क्षेत्र संवेदनशील भी हैं। योजना के तहत करीब पांच सौ किमी की 11 केवी और एलटी लाइन को अंडर ग्राउंड करने पर विचार किया गया है। कहा कि भविष्य में जिस संस्था को कार्य आवंटित होगा, संभव है कि वह भी आकलन कर योजना के स्वरूप में आवश्यकतानुसार संशोधन करेगी।