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बढ़ी चुनौती: वन्यजीव आ रहे हैं आबादी के करीब
सुरेश कांडपाल, नैनीताल।
Updated Sun, 31 Jul 2016 11:37 PM IST
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तेंदुआ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पर्यटन नगरी नैनीताल के लिये अब चुनौती बढ़ती ही जा रही है। कुछ समय पहले ही सरोवर नगरी में भालू चला आया था। इसी महीने अब तेंदुआ चला आया। शहरी आबादी में वन्य जीवों का इस तरह चले आने को पर्यावरणविद् जंगलों पर बढ़ रहे दबाव को भी कारण मान रहे है। भालू और फिर तेंदुआ के शहरी आबादी में पहुंचने के बाद का घटनाक्रम बता रहा है कि वन्यजीव के शहरी आबादी के बीच आने से उपजे हालात से निपटने के भी पुख्ता इंतजाम नहीं है। सामने आई तो बदहवासी और कोई नुकसान न होने पर किस्मत का लाख-लाख शुक्र।
पिछली 10 जुलाई को एक भालू ने तल्लीताल क्षेत्र के दो होटल में दी थी दस्तक उसके बाद वह झील में तैरता हुआ ठंड़ी सडक से जंगल को चला गया था। 31 जुलाई को भी सुबह के वक्त तेंदुआ भी नैनीताल में चला आया। 31 जुलाई रविवार को भी सुबह के वक्त तेंदुए ने तल्लीताल क्षेत्र के शशि होटल में शीशे में अपना प्रतिबिंब देखा और शीशे में पंजा मारकर शीशा तोड़ दिया। तेंदुए के कमरे में प्रवेश करने पर कमरे में मौजूद लोग भी बदहवास हो गए।
यह संयोग ही रहा कि भालू और इसके बाद तेंदुआ भी रविवार को ही शहर की ओर निकला। एक माह में वन्य जीवों का दो बार शहर की ओर रुख करना बता रहा है कि हालात सामान्य नहीं हैं। पर्यावरणविदों के मुताबिक जंगलों में भोजन की कमी भी वन्य जीवों को अपने हैवीवेट से दूर निकल जाने को मजबूर कर रही है। चिंताजनक बात यह भी है कि वन्यजीवों के शहरी आबादी में पहुंचने पर लोग भी नहीं समझ पा रहे हैं कि क्या किया जाए।
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ऐसे में बदहवासी का आलम रहता है और अफवाहों का बाजार गरम हो जा रहा है। वन दरोगा हीरा सिंह शाही ने होटल के बाथरूम में घुसे तेंदुए को पकड़ने के लिए काफी कड़ी मेहनत की, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। रोशनदान से जब तेंदुआ बहार आने की कोशिश कर रहा था तब शाही ने लकड़ी के स्टूल से रोशनदान का छेद बंद कर दिया। लेकिन तेंदुआ जगह मिलते ही भाग खड़ा हुआ।
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पिछली 10 जुलाई को एक भालू ने तल्लीताल क्षेत्र के दो होटल में दी थी दस्तक उसके बाद वह झील में तैरता हुआ ठंड़ी सडक से जंगल को चला गया था। 31 जुलाई को भी सुबह के वक्त तेंदुआ भी नैनीताल में चला आया। 31 जुलाई रविवार को भी सुबह के वक्त तेंदुए ने तल्लीताल क्षेत्र के शशि होटल में शीशे में अपना प्रतिबिंब देखा और शीशे में पंजा मारकर शीशा तोड़ दिया। तेंदुए के कमरे में प्रवेश करने पर कमरे में मौजूद लोग भी बदहवास हो गए।
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यह संयोग ही रहा कि भालू और इसके बाद तेंदुआ भी रविवार को ही शहर की ओर निकला। एक माह में वन्य जीवों का दो बार शहर की ओर रुख करना बता रहा है कि हालात सामान्य नहीं हैं। पर्यावरणविदों के मुताबिक जंगलों में भोजन की कमी भी वन्य जीवों को अपने हैवीवेट से दूर निकल जाने को मजबूर कर रही है। चिंताजनक बात यह भी है कि वन्यजीवों के शहरी आबादी में पहुंचने पर लोग भी नहीं समझ पा रहे हैं कि क्या किया जाए।
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ऐसे में बदहवासी का आलम रहता है और अफवाहों का बाजार गरम हो जा रहा है। वन दरोगा हीरा सिंह शाही ने होटल के बाथरूम में घुसे तेंदुए को पकड़ने के लिए काफी कड़ी मेहनत की, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। रोशनदान से जब तेंदुआ बहार आने की कोशिश कर रहा था तब शाही ने लकड़ी के स्टूल से रोशनदान का छेद बंद कर दिया। लेकिन तेंदुआ जगह मिलते ही भाग खड़ा हुआ।