{"_id":"5fc2b0728ebc3e9bd646f87e","slug":"ten-years-of-regular-service-is-not-mandatory-for-pension-the-high-court-directed-the-state-government-to-give-all-pension-related-benefits-to-the-petitioner-nainital-news-hld405546547","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेंशन के लिए दस वर्ष की नियमित सेवा अनिवार्य नहीं, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पेंशन संबंधी समस्त लाभ याचिकाकर्ता को देने के निर्देश दिए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पेंशन के लिए दस वर्ष की नियमित सेवा अनिवार्य नहीं, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पेंशन संबंधी समस्त लाभ याचिकाकर्ता को देने के निर्देश दिए
विज्ञापन
नैनीताल। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को वन श्रमिक संघ के पूर्व अध्यक्ष दलवीर सिंह बिष्ट को उनकी समस्त सेवाओ को जोड़ते हुए पेंशन संबंधी समस्त लाभ अथवा देयकों का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि पेंशन के लिए दस वर्ष की नियमित सेवा अनिवार्य नहीं है।
न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार वन श्रमिक संघ के पूर्व अध्यक्ष दलवीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनकी नियुक्ति 1987 में वन विभाग में बतौर टाइपिस्ट दैनिक श्रमिक के रूप में हुई थी। 2012 में उनका चयन फॉरेस्ट गार्ड के रूप में हो गया और 2019 में वह फॉरेस्ट गार्ड के पद से सेवानिवृत्त हो गए लेकिन विभाग ने उनको पेंशन के समस्त लाभ नहीं दिए। याचिकाकर्ता का कहना था कि विभाग के अनुसार पेंशन संबंधित लाभ के लिए उनकी सेवा 10 वर्ष से कम है इसलिए उनको यह लाभ नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें भी दैनिक श्रमिक के तौर पर पूर्व में की गई सेवाओं को जोड़कर पेंशन संबंधित समस्त लाभ दिए जाएं। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह 1991 से 2012 तक वन श्रमिक संघ के अध्यक्ष भी रहे, इसलिए विभाग उनसे यह पक्षपात कर रहा है, जबकि कई कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर ये समस्त लाभ दिए गए हैं। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को उनकी समस्त सेवाओ को जोड़ते हुए पेंशन संबंधित सभी लाभ अथवा देयकों का भुगतान करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार वन श्रमिक संघ के पूर्व अध्यक्ष दलवीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनकी नियुक्ति 1987 में वन विभाग में बतौर टाइपिस्ट दैनिक श्रमिक के रूप में हुई थी। 2012 में उनका चयन फॉरेस्ट गार्ड के रूप में हो गया और 2019 में वह फॉरेस्ट गार्ड के पद से सेवानिवृत्त हो गए लेकिन विभाग ने उनको पेंशन के समस्त लाभ नहीं दिए। याचिकाकर्ता का कहना था कि विभाग के अनुसार पेंशन संबंधित लाभ के लिए उनकी सेवा 10 वर्ष से कम है इसलिए उनको यह लाभ नहीं दिया गया।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के मामले में दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें भी दैनिक श्रमिक के तौर पर पूर्व में की गई सेवाओं को जोड़कर पेंशन संबंधित समस्त लाभ दिए जाएं। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह 1991 से 2012 तक वन श्रमिक संघ के अध्यक्ष भी रहे, इसलिए विभाग उनसे यह पक्षपात कर रहा है, जबकि कई कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर ये समस्त लाभ दिए गए हैं। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को उनकी समस्त सेवाओ को जोड़ते हुए पेंशन संबंधित सभी लाभ अथवा देयकों का भुगतान करने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं।
विज्ञापन