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शिक्षक देश और दुनिया बदलने में सक्षम : कोश्यारी
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नैनीताल के समीप वीरभट्टी में आयोजित शिक्षक सम्मेलन के दौरान महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल को सम्
नैनीताल। पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिक्षकों का आह्वान किया है कि वे समाज का आइना हैं। शिक्षक देश और दुनिया को बदल सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया किया कि वह नियमित रूप से अध्ययन और शोध कार्य करते रहें ताकि बच्चों को नवीनतम ज्ञान मिल सके।
कोश्यारी शुक्रवार को शैलनट नाट्य अकादमी के आयोजन में वीरभट्टी स्थित पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार विद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शैक्षिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब जब देश और दुनिया बदली है, उसमें शिक्षकों और आचार्यों का अहम योगदान रहा है। कोश्यारी ने कहा कि मौजूदा समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, इसे देखते हुए शिक्षा व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने की जरूरत है।विशिष्ट अतिथि पूर्व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने शिक्षा के क्षेत्र में सांस्कृतिक एवं शैक्षिक पक्ष को मजबूत करने पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि ध्रुव रौतेला ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इससे पूर्व कोश्यारी, पांडे और सीसीआरटी के पूर्व निदेशक गिरीश चंद्र जोशी ने संयुक्त रूप से सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस दौरान प्रतिभा पंत, चित्रा पाठक व शिवांगी पाठक ने शिव वंदना व गणेश स्तुति और आनंदा एकेडमी हल्द्वानी के बच्चों ने जय हो कुमाऊं, जय हो गढ़वाल नृत्य के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। सम्मेलन के पहले सत्र में कार्यक्रम संयोजक डॉ. डीएन भट्ट ने राष्ट्रीय शैक्षिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रधानाचार्य डाॅ. सूर्य प्रकाश ने विद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी। मुख्य अतिथि कोश्यारी ने अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और बिहार के शिक्षकों को सम्मानित किया। द्वितीय सत्र में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में कलाकारों ने छोलिया और गढ़वाली लोकनृत्य प्रस्तुत किया। अंत में आयोजकों की ओर से प्रो. गिरीश रंजन तिवारी ने कोश्यारी को स्मृति चिह्न भेंट किया।
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कोश्यारी शुक्रवार को शैलनट नाट्य अकादमी के आयोजन में वीरभट्टी स्थित पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार विद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय शैक्षिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब जब देश और दुनिया बदली है, उसमें शिक्षकों और आचार्यों का अहम योगदान रहा है। कोश्यारी ने कहा कि मौजूदा समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, इसे देखते हुए शिक्षा व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने की जरूरत है।विशिष्ट अतिथि पूर्व शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने शिक्षा के क्षेत्र में सांस्कृतिक एवं शैक्षिक पक्ष को मजबूत करने पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि ध्रुव रौतेला ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इससे पूर्व कोश्यारी, पांडे और सीसीआरटी के पूर्व निदेशक गिरीश चंद्र जोशी ने संयुक्त रूप से सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस दौरान प्रतिभा पंत, चित्रा पाठक व शिवांगी पाठक ने शिव वंदना व गणेश स्तुति और आनंदा एकेडमी हल्द्वानी के बच्चों ने जय हो कुमाऊं, जय हो गढ़वाल नृत्य के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। सम्मेलन के पहले सत्र में कार्यक्रम संयोजक डॉ. डीएन भट्ट ने राष्ट्रीय शैक्षिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रधानाचार्य डाॅ. सूर्य प्रकाश ने विद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी। मुख्य अतिथि कोश्यारी ने अरुणाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, असम, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और बिहार के शिक्षकों को सम्मानित किया। द्वितीय सत्र में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में कलाकारों ने छोलिया और गढ़वाली लोकनृत्य प्रस्तुत किया। अंत में आयोजकों की ओर से प्रो. गिरीश रंजन तिवारी ने कोश्यारी को स्मृति चिह्न भेंट किया।
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