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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Nainital News ›   Stuffed shells and used polythene

गूलों और खेतों में भरी पॉलीथिन

Sun, 10 Jan 2016 01:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी। Updated Sun, 10 Jan 2016 01:31 AM IST
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ब्लाक कार्यालय के पास ही लोहरियासाल मल्ला गांव है। करीब आठ हजार की आबादी वाला यह गांव वैसे तो समृद्धि के मामले में शहर से कहीं भी पीछे नहीं है। पर इस गांव में पॉलीथिन मुसीबत बन गयी है। गूलों और खेतों में पॉलीथिन भरी है।

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गूलों में पानी की कमी और खेती के प्रति कम होते रुझान से प्लाटिंग को बढ़ावा मिल रहा है। पहले इस इलाके में दलहन, सब्जी खूब होती थी। अब कुछ खेतों में ही गन्ना और दूसरी फसलें लगाई जा रही हैं।
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उप प्रधान दया शंकर गोस्वामी शिकायत करते हुए कहते हैं कि ब्लाक आफिस के सामने से ही आने वाली सड़क करीब 10 साल से नहीं बनी है।  गूलों में पालीथिन फंसी रहती है। इससे पानी रास्ते में ही बर्बाद हो जाता है।
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 दया किशन पांडे कहते हैं कि ब्लाक कार्यालय से बिठौरिया को निकलने वाला रास्ता जर्जर हालत में है। वह कहते हैं कि यह मार्ग एक दो नहीं बल्कि चार ग्राम सभाओं को जोड़ता है। पर इसे सुधारने पर लोनिवि का ध्यान नहीं है।

हीराबल्लभ जोशी कहते हैं कि अनुपम विहार के पास से गूल बंद पड़ी रहती है। अक्सर सफाई नहीं होती है। डेंगू, मलेरिया जैसे मच्छरजनित रोगों की चपेट में लोग आते हैं। स्थानीय निवासी मोहनी बिष्ट कहती हैं कि पालीथिन बड़ी समस्या है। इससे गांव गंदा हो रहा है। इस समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।

किरन उपाध्याय कहती है  कि मार्ग पर  गड्ढे हैं। इसके कारण लोग घायल हो रहे हैं। पता नहीं मार्ग कब नये सिरे से बनेगा। पूर्व फौजी बहादुर सिंह राणा कहते हैं कि निजी क्षेत्र के सहयोग से घर से कूड़ा उठाने के लिए  60 रुपये प्रति घर के हिसाब से तय हुआ है। इसमें सभी की सहभागिता होनी चाहिए।

मोहनी बिष्ट का कहना है कि बाकी स्थितियां तुलनात्मक तौर पर बेहतर हैं, बस सफाई और पालीथिन की समस्या का स्थायी समाधान हो जाए, तो गांव और अच्छा हो जाएगा।
 
स्थानीय लोगों का आरोप है कि छोटे से फड़ से लेकर दुकानों तक टैक्स जिला पंचायत महकमा वसूलता है, पर उसके बदले कोई भी काम जिला पंचायत के जरिए नहीं होता है।

 
 ग्राम प्रधान मंजू भट्ट का कहना है कि गूलों में पालीथिन और कूड़ा फंस जाता है। उसकी सफाई की व्यवस्था संबंधित विभाग नहीं करते हैं। अपने स्तर से कूड़ा निकलवाना, सफाई आदि का काम किया जाता है। इसके अलावा सड़कों जो गड्ढे हैं, उनको पाटकर काम चलाया जाता है। बिठौरिया मार्ग का स्टेटस ग्रामीण है, जबकि इसे मुख्य मार्ग के मानकों के हिसाब तैयार किया जाना चाहिए। जो भी समस्याएं हैं, मौजूदा संसाधानों के जरिए समाधान करने का प्रयास किया जाता है।

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