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हल्द्वानी: ग्लैंडर्स के लक्षण वाला लावारिस घोड़ा लापता, तलाश के लिए पशु पालन विभाग ने नगर निगम को भेजा पत्र

Tue, 01 Sep 2026 12:23 PM IST
Heera गायत्री जोशी
गायत्री जोशी Published by: Heera Updated Tue, 01 Sep 2026 12:23 PM IST
सार

हल्द्वानी शहर में एक लावारिस घोड़े में ग्लैंडर्स के लक्षण पाए गए हैं। यह घोड़ा लापता हो गया है। इससे पशुपालन विभाग में हड़कंप मच गया है और विभाग ने घोड़े की तलाश के लिए नगर निगम को पत्र भेजा है।

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Stray horse with glanders symptoms goes missing in haldwani
सांकेतिक तस्वीर।

विस्तार

हल्द्वानी शहर में एक लावारिस घोड़े में ग्लैंडर्स के लक्षण मिले हैं। रैंडम सैंपलिंग के दौरान बीमारी के संकेत मिलने पर पुष्टि के लिए उसका सैंपल भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (आईसीएआर-एनआरसीई) हिसार भेजा गया, लेकिन चिंता की बात यह है कि घोड़ा लापता हो गया है जिससे पशुपालन विभाग के अफसरों में खलबली मची है। विभाग ने घोड़े को तलाशने के लिए नगर निगम को पत्र भेजा है।

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श्याम विहार में भाजपा कार्यालय के पास रूटीन सैंपलिंग के दौरान पशु चिकित्सकों की टीम को एक लावारिस घोड़े में ग्लैंडर्स के स्पष्ट संकेत मिले। यह एक बेहद गंभीर और संक्रामक बीमारी है, जो ''बर्कहोल्डेरिया मालेई'' नामक खतरनाक जीवाणु से फैलती है। संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, कमजोरी, नाक से स्राव, सांस लेने में तकलीफ और त्वचा पर खतरनाक घाव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह बीमारी पशुओं से इंसानों में भी फैल सकती है। एहतियातन उसे दूसरे पशुओं से अलग कर आइसोलेट किया जाएगा। इसके मद्देनजर पशु चिकित्सकों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

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जिले में लंपी के तीन केस पॉजिटिव
जिले में लंपी स्किन डिजीज की जांच के लिए लिए गए 12 सैंपल में तीन पॉजिटिव और नौ निगेटिव मिले हैं। संक्रमण की रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान चल रहा है। जिले में अब तक 1,17,541 गाय-भैंसों का टीकाकरण किया जा चुका है। विभाग प्रभावित पशुओं की निगरानी भी कर रहा है।

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एक घोड़े में ग्लैंडर्स के लक्षण मिले हैं लेकिन अभी बीमारी की पुष्टि नहीं हुई है। सैंपल जांच के लिए आईसीएआर-एनआरसीई हिसार भेजा जाएगा। एहतियातन घोड़े को आइसोलेट किया जाएगा। जिले में जागरूकता अभियान चलाकर पशुपालकों को संक्रामक बीमारियों के लक्षण और बचाव के उपाय बताए जाएंगे।

- डॉ. राजीव सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, नैनीताल

पशुओं की स्क्रीनिंग पशु विभाग से ही कराई जाएगी। नगर निगम की गोशालाओं में भी पशु चिकित्सक ही बीमार पशुओं का उपचार करेंगे। - सीएस टोलिया, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी

लंपी स्किन डिजीज गाय और भैंस में फैलने वाली एक वायरल बीमारी है। इससे पशुओं के शरीर पर गांठें बन जाती हैं और दूध उत्पादन कम हो जाता है। बचाव के लिए बीमार पशुओं को अलग रखें और समय-समय पर टीकाकरण भी कराएं। - डॉ. अनुज अग्रवाल, वरिष्ठ पशु चिकित्सक

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