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धर्म रक्षक और मानवता के सच्चे सेवक थे श्री अर्जुन देव जी: राज्यपाल
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शुक्रवार को नैनीताल स्थित राजभवन में सिखों के पांचवें गुरू श्री अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर आय
- फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने सिखों के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर उन्हें याद किया। उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह धर्मरक्षक और मानवता के सच्चे सेवक थे। उन्होंने राष्ट्र एवं भारतीय समाज के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनका बलिदान देश, समाज एवं मानवता के लिए महत्वपूर्ण है जिसे युगों-युगों तक याद किया जाता रहेगा।
शुक्रवार को राजभवन में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि श्री गुरु अर्जुन देव जी ने अपना जीवन धर्म और लोगों की सेवा में बलिदान कर दिया। वह दिन-रात लोगों की संगत में लगे रहते और सभी धर्मों को एकसमान दृष्टि से देखते थे। कई यातनाओं के बावजूद वह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे जो हमें नई सीख देते हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संपादन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। गुरु ग्रंथ साहिब का मुख्य संदेश समरसता, ज्ञान और विद्या है। गुरु अर्जुन देव जी का जीवन दर्शन भी समरसता से प्रेरित था।
कहा कि आज के युग में उनकी वाणी का एक-एक शब्द पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांधता है। उनके जीवन से परोपकार की भावना की सीख मिलती है। उन्होंने संदेश दिया कि हमें अपनी कमाई के दसवें हिस्से को परोपकार, नेक और अच्छे कार्यों के लिए खर्च करना चाहिए। इस दौरान छबील का आयोजन भी किया गया। विधि परामर्शदाता अमित कुमार सिरोही, राज्यपाल के परिसहाय मेजर तरुण कुमार, विशेष कार्याधिकारी बीपी नौटियाल, प्रमोद चमोली आदि उपस्थित रहे।
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शुक्रवार को राजभवन में आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि श्री गुरु अर्जुन देव जी ने अपना जीवन धर्म और लोगों की सेवा में बलिदान कर दिया। वह दिन-रात लोगों की संगत में लगे रहते और सभी धर्मों को एकसमान दृष्टि से देखते थे। कई यातनाओं के बावजूद वह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे जो हमें नई सीख देते हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के संपादन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। गुरु ग्रंथ साहिब का मुख्य संदेश समरसता, ज्ञान और विद्या है। गुरु अर्जुन देव जी का जीवन दर्शन भी समरसता से प्रेरित था।
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कहा कि आज के युग में उनकी वाणी का एक-एक शब्द पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में बांधता है। उनके जीवन से परोपकार की भावना की सीख मिलती है। उन्होंने संदेश दिया कि हमें अपनी कमाई के दसवें हिस्से को परोपकार, नेक और अच्छे कार्यों के लिए खर्च करना चाहिए। इस दौरान छबील का आयोजन भी किया गया। विधि परामर्शदाता अमित कुमार सिरोही, राज्यपाल के परिसहाय मेजर तरुण कुमार, विशेष कार्याधिकारी बीपी नौटियाल, प्रमोद चमोली आदि उपस्थित रहे।
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