फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Scientists first recorded evidence of gamma-ray explosion

चंद सेकंड में निकली सूर्य के पूरे जीवनकाल के बराबर की ऊर्जा, पहली बार मिले प्रमाण

Thu, 21 Nov 2019 09:00 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Thu, 21 Nov 2019 09:00 AM IST
विज्ञापन
Scientists first recorded evidence of gamma-ray explosion
पत्रकारों से वार्ता करते निदेशक वहाबउद्दीन, वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. शशि भूषण पांडे व डा. कुंतल मिश्र - फोटो : अमर उजाला
सुदूर अंतरिक्ष में हुए गामा रे विस्फोट को पहली बार वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड कर इसका विश्लेषण करने में सफलता प्राप्त की है। इस विस्फोट में मात्र 22 सेकेंड में इतनी ऊर्जा निकली, जितनी हमारे सूर्य से उसके पूरे जीवन काल में निकलेगी।
विज्ञापन


यह ऊर्जा इतनी ज्यादा है कि यदि यह विस्फोट किसी निकटवर्ती गैलेक्सी में हुआ होता तो यह समूचा सौरमंडल नष्ट होकर अंतरिक्ष में विलीन हो जाता। इस विस्फोट से ऊर्जा उत्पन्न होने की अब तक की स्थापित थ्योरी के अतिरिक्त एक नई थ्योरी भी प्रतिपादित हुई है। इस खोज से एरीज के वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे और डॉ. कुंतल मिश्रा भी जुड़े हुए हैं।
विज्ञापन


अंतरिक्ष में अब तक जिस घटना की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, उसके साक्षात प्रमाण को वैज्ञानिकों ने दर्ज किया है और इसके साथ ही भौतिक विज्ञान का एक नया सिद्धांत प्रतिपादित हुआ है। विश्व भर में इस खोज को बुधवार को जारी किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पृथ्वी से 4.5 अरब प्रकाश वर्ष की दूरी पर हुआ ये विस्फोट

इस शोध से जुड़े रहे आर्य भट्ट शोध एवं प्रेक्षण विज्ञान संस्थान (एरीज) के वैज्ञानिकों ने पत्रकार वार्ता में इस खोज की जानकारी दी। यह शोध विश्व की सर्वाधिक प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका नेचर के शुक्रवार के अंक में प्रकाशित हो रही है।

अत्यंत जटिल इस खोज को साधारण शब्दों में यूं समझा जा सकता है कि पृथ्वी से 4.5 अरब प्रकाश वर्ष की दूरी पर हुए गामा-रे विस्फोट को वैज्ञानिकों ने दर्ज किया। वैज्ञानिकों के अनुसार यह विश्व में पहली बार हुआ है, जब ऐसे विस्फोट के प्रमाण मिले और दर्ज हुए हैं।

जीआरबी से ही पहली बार टैरा इलैक्ट्रिक बोर (टीईवी) फोटोन्स की खोज हुई और इस विस्फोट से इसके विश्लेषण से एक नई थ्योरी प्रतिपादित हुई है। इसके अनुसार पहली बार यह जानकारी मिली है कि अत्यंत उच्च स्तर की ऊर्जा इनवर्स कॉम्प्टन प्रभाव से भी पैदा हो सकती है, जबकि अब तक वैज्ञानिक यह मानते थे कि ऐसी ऊर्जा केवल थर्मल प्रक्रिया से ही उत्पन्न होती है।
 

विश्व की दो दर्जन अन्य वेधशालाओं से भी इसका अवलोकन किया गया

एरीज के निदेशक डॉ. वहाबुद्दीन सहित खोज से जुड़े एरीज के वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण और डॉ. कुंतल ने यहां इस खोज की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गत 14 जनवरी 2019 को अंतरिक्ष में स्थित सेटेलाइट्स और स्पेन के ला पाल्मा स्थित मैजिक टेलिस्कोप से वैज्ञानिकों को 4.5 अरब प्रकाश वर्ष की दूरी पर हुए गामा रे बर्स्ट (जीबीआर) की जानकारी और प्रमाण मिले।

 

विश्व की दो दर्जन अन्य वेधशालाओं से भी इसका अवलोकन किया गया। इस विस्फोट को 190114 सी नाम दिया गया। विश्व की विभिन्न वेधशालाओं से जुड़े कार्यक्रम के तहत कई भारतीय वैज्ञानिक भी इस खोज और प्राप्त डेटा विश्लेषण से जुड़े थे।

 

जिनमें एरीज के डॉ. शशिभूषण और डॉ. कुंतल मिश्रा सहित आईआईएसटी त्रिवेंद्रम के प्रो. एल रश्मि, एसवी चेरुकुरी, वी जैसवाल शामिल हैं। डॉ.शशिभूषण ने बताया कि भविष्य में एरीज के देवस्थल स्थित 3.6 मीटर टेलिस्कोप से भी इस प्रकार के विश्लेषण किए जा सकेंगे।

क्या होते हैं गामा-रे विस्फोट

अंतरिक्ष में विशाल तारों के विध्वंस या न्यूट्रॉन तारों के आपस में विलय से अचानक उत्पन्न होने वाली अतुलनीय ऊर्जा को गामा-रे विस्फोट कहते हैं। डॉ. शशिभूषण पांडे ने बताया कि यह घटना सुदूर गैलेक्सियों में प्रतिदिन होती है।

 

इस दौरान एक सेकेंड के चंद अंश से लेकर कुछ सौ सेकेंड के भीतर उतनी ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है जो सूर्य के पूरे जीवन काल में उत्सर्जित होने वाली ऊर्जा के बराबर होती है। यह प्रक्रिया चंद सेकेंड में पूरी हो जाती है, हालांकि इसकी आभा थोड़े समय तक रहती है।


अंतरिक्ष में हुए गामा-रे विस्फोट को रिकार्ड करने वाले वैज्ञानिकों की टीम में एरीज के भी दो वैज्ञानिक शामिल रहे। यह एरीज के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई इस खोज में हमारे दोनों वैज्ञानिकों ने योगदान देकर एरीज समेत पूरे देश को गौरवान्वित किया है। भविष्य में भी एरीज के वैज्ञानिक विश्व में देश का परचम लहराएंगे।

-डॉ. वहाबुद्दीन निदेशक एरीज नैनीताल

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed