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नदियों का पानी बांट रहा बीमारी!
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
Updated Wed, 03 May 2017 01:14 AM IST
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नदी
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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जीवनदायिनी गौला, क्षिप्रा और कोसी नदी का पानी आप संभलकर पीएं। इन नदियों का पानी आपको बीमारी बांट रहा है। रामगनर की कोसी और हल्द्वानी की गौला नदी के पानी से तो पीलिया जैसी बीमारी होने का खतरा है। जबकि क्षिप्रा के पानी में डायरिया के बैक्टीरिया पर्याप्त मात्रा में हैं।
पिछले साल बारिश के बाद डेंगू, मलेरिया, पीलिया का प्रकोप बढ़ने के बा स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया था। स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों ने पेयजल के नमूने लेकर जुलाई, अगस्त और अक्तूबर में जांच के लिए भेजे थे। अक्तूबर 2016 में उक्त तीनों नदियों का पानी पीने योग्य नहीं मिला था।
खास बात तो ये थी कि रामनगर की कोसी नदी में जानवरों का मलमूत्र मिला था। कोसी और गौला नदी के पानी में पर्याप्त मात्रा में बैक्टीरिया मिले थे जो सेहत के लिए काफी खतरनाक हैं और आपको बीमार कर सकते हैं। जिला संक्रामक रोग विश्लेषक नंदन कांडपाल ने बताया कि क्षिप्रा नदी में इ-कोलाई बैक्टीरिया मिला था।
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इस बैक्टीरिया के पेट में जाने से डायरिया हो जाता है। इसकी रिपोर्ट सीएमओ को दी गई थी। सीएमओ के स्तर से रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई थी साथ ही जल संस्थान के अधिकारियों को समय-समय पर पानी के नमूनों की जांच कराने और क्लोरीनेशन करने को कहा गया था।
सीएमओ डॉ. एलएम उप्रेती ने बताया कि रिपोर्ट स्वास्थ्य महानिदेशक को और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी थी। रिपोर्ट जाने के बाद कार्रवाई भी हुई थी।
ज्योलीकोट और गरमपानी में स्रोत का पानी शुद्ध
जिला संक्रामक रोग विशलेषक नंदन कांडपाल ने बताया कि गरमपानी में बाजार के पास स्रोत से आने वाला पानी पूरी तरह शुद्ध है। इस पानी को बेधड़क पीने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। साथ ही ज्योलीकोट के पास भी स्रोत से आने वाला पानी भी शुद्ध है।
फेल हुए जल संस्थान के नमूने
स्वास्थ्य विभाग की जांच में जल संस्थान की ओर से लोगों के घरों तक पहुंचाए जा रहे पानी के नमूने फेल हुए हैं। जिला संक्रामक रोग विश्लेषक नंदन कांडपाल ने बताया कि सोमवार को बरेली रोड, आजाद नगर, इंदिरा नगर, सफदर का बगीचा आदि क्षेत्रों में पेयजल के 12 नमूने लिए गए थे।
एक दर्जन नमूनों में आठ सैंपल फेल हो गए थे। इसकी जानकारी जल संस्थान के अधिकारियों और नगर निगम को दी गई थी। मंगलवार को इन क्षेत्रों में छह नमूने लिए गए तो पानी में क्लोरीनेशन मिला था। ये नमूने सही मिले थे।
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पिछले साल बारिश के बाद डेंगू, मलेरिया, पीलिया का प्रकोप बढ़ने के बा स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया था। स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों ने पेयजल के नमूने लेकर जुलाई, अगस्त और अक्तूबर में जांच के लिए भेजे थे। अक्तूबर 2016 में उक्त तीनों नदियों का पानी पीने योग्य नहीं मिला था।
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खास बात तो ये थी कि रामनगर की कोसी नदी में जानवरों का मलमूत्र मिला था। कोसी और गौला नदी के पानी में पर्याप्त मात्रा में बैक्टीरिया मिले थे जो सेहत के लिए काफी खतरनाक हैं और आपको बीमार कर सकते हैं। जिला संक्रामक रोग विश्लेषक नंदन कांडपाल ने बताया कि क्षिप्रा नदी में इ-कोलाई बैक्टीरिया मिला था।
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इस बैक्टीरिया के पेट में जाने से डायरिया हो जाता है। इसकी रिपोर्ट सीएमओ को दी गई थी। सीएमओ के स्तर से रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई थी साथ ही जल संस्थान के अधिकारियों को समय-समय पर पानी के नमूनों की जांच कराने और क्लोरीनेशन करने को कहा गया था।
सीएमओ डॉ. एलएम उप्रेती ने बताया कि रिपोर्ट स्वास्थ्य महानिदेशक को और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजी थी। रिपोर्ट जाने के बाद कार्रवाई भी हुई थी।
ज्योलीकोट और गरमपानी में स्रोत का पानी शुद्ध
जिला संक्रामक रोग विशलेषक नंदन कांडपाल ने बताया कि गरमपानी में बाजार के पास स्रोत से आने वाला पानी पूरी तरह शुद्ध है। इस पानी को बेधड़क पीने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। साथ ही ज्योलीकोट के पास भी स्रोत से आने वाला पानी भी शुद्ध है।
फेल हुए जल संस्थान के नमूने
स्वास्थ्य विभाग की जांच में जल संस्थान की ओर से लोगों के घरों तक पहुंचाए जा रहे पानी के नमूने फेल हुए हैं। जिला संक्रामक रोग विश्लेषक नंदन कांडपाल ने बताया कि सोमवार को बरेली रोड, आजाद नगर, इंदिरा नगर, सफदर का बगीचा आदि क्षेत्रों में पेयजल के 12 नमूने लिए गए थे।
एक दर्जन नमूनों में आठ सैंपल फेल हो गए थे। इसकी जानकारी जल संस्थान के अधिकारियों और नगर निगम को दी गई थी। मंगलवार को इन क्षेत्रों में छह नमूने लिए गए तो पानी में क्लोरीनेशन मिला था। ये नमूने सही मिले थे।