विश्व स्ट्रोक दिवस: नशा करने वालों में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
हल्द्वानी में धूम्रपान करने वालों में स्ट्रोक का खतरा दो से चार गुना अधिक होता है। विश्व स्ट्रोक दिवस पर राजकीय मेडिकल कॉलेज के न्यूरोसर्जन डॉ. अखिलेश जोशी ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
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सिगरेट, बीड़ी और तंबाकू का सेवन सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, दिमाग की नसों को भी नुकसान पहुंचाता है। धूम्रपान करने वालों में स्ट्रोक का खतरा धूम्रपान न करने वालों की तुलना में दो से चार गुना तक अधिक हो सकता है। ऐसे में चेहरे का अचानक टेढ़ा होना, हाथ-पैर में कमजोरी आना या बोलने में परेशानी होना जिंदगी के लिए खतरे की घंटी है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।
विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। न्यूरोसर्जन डॉ. अखिलेश जोशी ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। इसके अलावा मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, मोटापा और सुस्त जीवनशैली भी खतरा बढ़ाते हैं। समय पर लक्षण पहचानकर अस्पताल पहुंचना मरीज की जान बचाने और स्थायी विकलांगता का जोखिम कम करने में अहम भूमिका निभाता है। डॉ. जोशी ने कहा कि शुरुआती घंटों में थक्का घोलने वाली दवा और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी से जान बचाई जा सकती है।
लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
अचानक चेहरे का एक तरफ झुक जाना, हाथ-पैर में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने और समझने में दिक्कत। ये स्ट्रोक के बड़े लक्षण हैं। ऐसा दिखे तो जरा भी देरी न करें, तुरंत अस्पताल पहुंचें।
इनका ध्यान रखें
बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रखें। रोज व्यायाम करें, संतुलित खाना खाएं, वजन कंट्रोल रखें और तंबाकू-बीड़ी से दूरी बनाएं। समय-समय पर जांच जरूर कराएं।