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Nainital News: जैवविविधता से परिपूर्ण सीटीआर बन रहा वन्यजीवों का स्वर्ग
Fri, 22 May 2026 12:13 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 22 May 2026 12:13 AM IST
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रामनगर। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) दुनिया भर में अपनी जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र के लिए प्रसिद्ध है। इसके चलते यहां बाघों के साथ ही पक्षी, जलीय जंतु भी मौजूद हैं। शांत और सुरक्षित माहौल वन्यजीवों की पहली पसंद बना रहा है।
देश में बाघों की घटती संख्या को देखते हुए कॉर्बेट नेशनल पार्क को पहला नेशनल पार्क बनाया गया था। शुरुआत में इसका नाम हेली नेशनल पार्क रखा गया था। बाघों की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों के चलते यहां बाघों की 260 पहुंच गई है जो घनत्व के मामले में सबसे अधिक है। वहीं बढ़ती सुरक्षा के चलते बाघों के साथ ही अन्य वन्यजीवों के लिए सीटीआर स्वर्ग माना जाता है। यहां हर साल हाथियों के झुंड के साथ ही प्रवासी पक्षी भी विचरण के लिए आते हैं।
रामगंगा नदी की सबसे अधिक भूमिका
टाईगर कंजरवेशन फाउंडेशन के पूर्व सदस्य एजी अंसारी ने बताया कि सीटीआर से होकर गुजरने वाली रामगंगा नदी यहां के पारिस्थितिक तंत्र की रीढ़ है। उन्होंने बताया कि इस नदी में मगरमच्छ, घड़ियाल, ऊदबिलाव समेत कई जलीय जंतु निवास करते हैं। इसके साथ ही हाथी, बाघ के साथ अन्य वन्यजीव भी इस पर निर्भर हैं। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने बताया कि बदलता जलवायु चक्र, लगातार सिमटते वन्यजीव कॉरिडोर इस प्राकृतिक संतुलन को धीरे-धीरे कमजोर कर रहे हैं।
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पार्क में हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल कर वन्यजीवों की सुरक्षा की जा रही है। सुरक्षित माहौल और बेहतर जैव विविधता के चलते वन्यजीव यहां विचरण करना पसंद कर रहे हैं।
डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर
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देश में बाघों की घटती संख्या को देखते हुए कॉर्बेट नेशनल पार्क को पहला नेशनल पार्क बनाया गया था। शुरुआत में इसका नाम हेली नेशनल पार्क रखा गया था। बाघों की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों के चलते यहां बाघों की 260 पहुंच गई है जो घनत्व के मामले में सबसे अधिक है। वहीं बढ़ती सुरक्षा के चलते बाघों के साथ ही अन्य वन्यजीवों के लिए सीटीआर स्वर्ग माना जाता है। यहां हर साल हाथियों के झुंड के साथ ही प्रवासी पक्षी भी विचरण के लिए आते हैं।
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रामगंगा नदी की सबसे अधिक भूमिका
टाईगर कंजरवेशन फाउंडेशन के पूर्व सदस्य एजी अंसारी ने बताया कि सीटीआर से होकर गुजरने वाली रामगंगा नदी यहां के पारिस्थितिक तंत्र की रीढ़ है। उन्होंने बताया कि इस नदी में मगरमच्छ, घड़ियाल, ऊदबिलाव समेत कई जलीय जंतु निवास करते हैं। इसके साथ ही हाथी, बाघ के साथ अन्य वन्यजीव भी इस पर निर्भर हैं। वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने बताया कि बदलता जलवायु चक्र, लगातार सिमटते वन्यजीव कॉरिडोर इस प्राकृतिक संतुलन को धीरे-धीरे कमजोर कर रहे हैं।
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पार्क में हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल कर वन्यजीवों की सुरक्षा की जा रही है। सुरक्षित माहौल और बेहतर जैव विविधता के चलते वन्यजीव यहां विचरण करना पसंद कर रहे हैं।
डॉ. साकेत बडोला, निदेशक, सीटीआर