{"_id":"58ac8ede4f1c1b4a55b246db","slug":"revelations-focus-on-more-pressing-matters","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुलासे से ज्यादा मामलों को दबाने पर ध्यान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खुलासे से ज्यादा मामलों को दबाने पर ध्यान
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
Updated Wed, 22 Feb 2017 12:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार्बेट पार्क में शिकारियों की घुसपैठ होती रही है, लेकिन मामलों के खुलासे से ज्यादा उन्हें दबाने या घुमाने को लेकर पार्क के अधिकारी ज्यादा सक्रियता दिखाते हैं। वहीं, केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाली स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स का गठन आज तक नहीं हो सका है।
विज्ञापन
मई 2012 में शिकारियों ने कार्बेट पार्क में घुसकर बाघ को मार गिराया था। कार्बेट पार्क की टीम ने कड़का से लेकर मारे गए बाघ का मांस तक बरामद किया था, लेकिन तत्कालीन कार्बेट पार्क के अधिकारी मामले को दबाने में ही लगे रहे। मार्च 2016 में हरिद्वार के पास एसटीएफ ने बाघ की पांच खालें बरामद की थीं।
विज्ञापन
उस समय संदेह था कि बाघों का शिकार कार्बेट पार्क में हुआ है, लेकिन कार्बेट पार्क समेत देहरादून में बैठे अधिकारी कैमरा ट्रैप की रिपोर्ट के आधार पर मारे गए बाघों को ‘अपना’ बताते रहे, लेकिन शिकार कार्बेट पार्क में हुआ है, उससे इनकार करते रहे।
विज्ञापन
बाद में कार्बेट पार्क में ही बाघों का शिकार होने और वन कर्मियों की लापरवाही की बात सामने आई थी। इससे पहले दिसंबर 2012 में कार्बेट पार्क से सटे अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में भी दो बाघों का शिकार हुआ था। इसमें 12 शिकारी पकड़े गए थे।
कार्बेट पार्क में बाघों को बचाने के लिए लंबे समय से स्पेशल टाइगर प्रोटेेक्शन फोर्स बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जो अब तक पूरी नहीं हो सकी है। जबकि, इस फोर्स को केंद्र सरकार की नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी आर्थिक आदि मदद देगी।
गश्त के लिए हाथी लेने कर्नाटक पहुंचे अफसर
कार्बेट पार्क में गश्त आदि के लिए वन विभाग कर्नाटक से हाथी लेकर आएगा। इसके लिए कार्बेट उप निदेशक को कर्नाटक भेजा गया है। जंगल की कुछ जगह ऐसी हैं, जहां वाहन और पैदल गश्त करना मुश्किल होता है। ऐसे में बेहतर गश्त और सुरक्षा के मद्देनजर कार्बेट पार्क प्रबंधन ने कर्नाटक से हाथियों की मांग की है।
उप निदेशक अमित वर्मा कहते हैं कि नौ हाथी मंगाए जा रहे हैं। इसके लिए करीब सभी औपचारिकता पूरी हो गई है। कर्नाटक में हाथियों के प्रशिक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, विभाग हाथियों के प्रशिक्षण के संबंध में भी जानकारी जुटा रहा है, जिससे बेहतर ढंग से कार्य हो सके।