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रामनगर में मिट्टी के बर्तन के अवशेष मिले
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रामनगर नंदपुर गैबुआ में खुदाई के बाद जांच पड़ताल करते वैज्ञानिक प्रो. जावेद मलिक। अमर उजाला
- फोटो : RAMNAGAR
रामनगर (नैनीताल)। आईआईटी कानपुर के भूगर्भ वैज्ञानिकों की टीम ने तीसरे दिन नंदपुर गैबुआ में खुदाई के दौरान मिट्टी के बर्तन का अवशेष मिला है। अवशेष को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। दूसरी ओर 25 से 27 फरवरी के बीच विदेशी वैज्ञानिक भी यहां जांच के लिए पहुंचने वाले हैं। टीम नंदपुर गैबुआ, कालाढूंगी और नैनीताल सहित पूरे इलाके की जांच पड़ताल करेगी।
आईआईटी कानपुर के भू-वैज्ञानिक प्रो. जावेद मलिक ने बताया कि बुधवार को तीसरे दिन खुदाई के दौरान गड्ढे से मिट्टी के बर्तन का अवशेष मिला है। मिट्टी के बर्तन का अवशेष सतह से एक मीटर की गहराई में मिला है। यहां पर भूकंप का केंद्र था और मिट्टी की सतह भी ज्यादा पुरानी नहीं है। जांच के बाद पता चलेगा कि यह कितना पुराना और किस सभ्यता से जुड़ा होगा। इसके अलावा टीम ने दिनभर जांच के लिए खोदे गए गड्डे की दीवारों को साफ किया और पेड़ों की जड़ों को भी काटा। टीम यहां तीन से चार दिन और रुकेगी। चारों दीवारों की मैपिंग करने के साथ फॉल्ट को तलाशा जाएगा। फाल्ट की मूवमेंट को जानेंगे और पता लगाया जाएगा कि भूकंप कितने समय पहले आया होगा।
56 साल बाद दिल्ली में होगी कॉफ्रेंस
आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने बताया कि दिल्ली में इंटरनेशनल जियोलॉजिकल कांग्रेस की कांफ्रेंस 2 मार्च से 8 मार्च तक प्रस्तावित है। कांफ्रेंस भारत में 56 साल बाद हो रही है। इसे देखते हुए देश-विदेश के वैज्ञानिक जुटेंगे और भूकंप से संबंधित जानकारियों पर गहनता से जांच करेंगे।
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आईआईटी कानपुर के भू-वैज्ञानिक प्रो. जावेद मलिक ने बताया कि बुधवार को तीसरे दिन खुदाई के दौरान गड्ढे से मिट्टी के बर्तन का अवशेष मिला है। मिट्टी के बर्तन का अवशेष सतह से एक मीटर की गहराई में मिला है। यहां पर भूकंप का केंद्र था और मिट्टी की सतह भी ज्यादा पुरानी नहीं है। जांच के बाद पता चलेगा कि यह कितना पुराना और किस सभ्यता से जुड़ा होगा। इसके अलावा टीम ने दिनभर जांच के लिए खोदे गए गड्डे की दीवारों को साफ किया और पेड़ों की जड़ों को भी काटा। टीम यहां तीन से चार दिन और रुकेगी। चारों दीवारों की मैपिंग करने के साथ फॉल्ट को तलाशा जाएगा। फाल्ट की मूवमेंट को जानेंगे और पता लगाया जाएगा कि भूकंप कितने समय पहले आया होगा।
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56 साल बाद दिल्ली में होगी कॉफ्रेंस
आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने बताया कि दिल्ली में इंटरनेशनल जियोलॉजिकल कांग्रेस की कांफ्रेंस 2 मार्च से 8 मार्च तक प्रस्तावित है। कांफ्रेंस भारत में 56 साल बाद हो रही है। इसे देखते हुए देश-विदेश के वैज्ञानिक जुटेंगे और भूकंप से संबंधित जानकारियों पर गहनता से जांच करेंगे।
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