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एनआईसीयू से गायब डॉक्टर की बर्खास्तगी की सिफारिश
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
Updated Tue, 19 Dec 2017 01:56 AM IST
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सवाई मानसिंह अस्पताल
- फोटो : amar ujala
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सुशीला तिवारी अस्पताल में ड्यूटी रोस्टर में नाम होने के बावजूद नवजात गहन देखभाल इकाई (एनआईसीयू) से गायब डॉक्टर की बर्खास्तगी की सिफारिश चिकित्सा अधीक्षक ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से की है।
रविवार की देर शाम चिकित्सा-शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने सुशीला तिवारी अस्पताल में छापा मारा था। छापे के दौरान एनआईसीयू में डॉक्टर गायब थे और सिर्फ नर्स ड्यूटी पर थीं। बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष का फोन भी बंद था। डॉ. सयाना ने एनएचएम के निदेशक को एनआईसीयू में तैनात डॉक्टर को बर्खास्त करने के निर्देश दिए थे।
राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि ड्यूटी रोस्टर में डॉ. स्वाति का नाम था। एमएस डॉ. एके पांडे ने डॉ. स्वाति को बर्खास्त करने के लिए सीएमओ को पत्र भेज दिया है। उन्होंने कहा कि बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय आर्य से फोन बंद करने को लेकर लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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उन्होंने बताया कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम के दौरे के दौरान भी एनआईसीयू से तीनों डॉक्टर नदारद थे और तीनों को चेतावनी पत्र जारी किया गया था। कहा कि एक शिफ्ट की ड्यूटी करने के बाद शाम को गायब हो जाते हैं और बुलाने पर ही आते हैं। डॉ. आर्य को निर्देश दिए गए कि एनआईसीयू में डॉक्टर शिफ्टों में ड्यूटी करेंगे। साथ ही किसी डॉक्टर के अवकाश पर जाने पर बाल रोग विभाग से एक डॉक्टर की ड्यूटी एनआईसीयू में लगाई जाएगी।
ठीक करें टूटी खिड़की, लगाएं कैमरे
राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने सोमवार को सुशीला तिवारी अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में टूटी खिड़की में तुरंत कांच लगवाने के आदेश दिए। साथ ही कहा कि जिन वार्डों में सीसीटीवी नहीं है वहां तुरंत लगवाएं जाएं। एमएस डॉ. एके पांडे को निर्देश दिए कि वे समय-समय पर एनआईसीयू का निरीक्षण करें और व्यवस्थाओं पर पैनी नजर रखें।
शौचालयों में साफ-सफाई रखने, वार्डों में बीपीएल मरीजों को भोजन समय पर देने के आदेश दिए। नर्सिंग अधीक्षिका को वार्डों में दवाएं रखने को कहा। कैंटीन को साफ रखने के आदेश दिए। इस दौरान प्रबंधक परियोजना परितोष पंत, रवि पाल, पंकज बोरा, प्रकाश डंगवाल आदि थे।
जनऔषधि केंद्र और बिक रही ब्रांडेड दवाएं
सुशीला तिवारी अस्पताल के प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र में ब्रांडेड दवाएं धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। केंद्र से दवा लेने वाले मरीजों को कंप्यूटरीकृत बिल भी नहीं दिया जा रहा है। सोमवार को रेड क्रास सोसायटी की उपाध्यक्ष सरस्वती खेतवाल ने प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र की जांच की। माना कि केंद्र में ब्रांडेड दवाएं बिक रही हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्र ने इस बात का करार कर रखा है कि जो दवा बीपीआई से नहीं मिल पा रही हैं और प्रमुख हैं उन्हें बाहर से लेकर (ब्रांडेड) बेच सकता है। ब्रांडेड दवा की दरें जनऔषधि के अनुरूप ही ली जाएंगी। बताया कि ये व्यवस्था सिर्फ एसटीएच में खुले केंद्र के लिए है। खेतवाल ने कहा कि अगर कंप्यूटरीकृत बिल दो दिन के भीतर उपभोक्ताओं के देने नहीं शुरू किए गए तो कार्रवाई की जाएगी।
बेस में कंप्यूटर से कटने लगे ओपीडी के पर्चे
बेस अस्पताल में सोमवार से कंप्यूटर से ओपीडी के पर्चे बनने लगे। व्यवस्था के पहले दिन लागू होने के कारण ओपीडी के काउंटर पर खासी भीड़ थी। बेस अस्पताल में अभी तक ओपीडी का पर्चा हाथ से बनता था। सोमवार को ओपीडी के काउंटर पर दो कंप्यूटर लग गए और मरीजों के पर्चे कंप्यूटर से काटे गए।
पर्चों पर अब मरीजों का नाम प्रिंट होकर आ रहा है। पहले दिन व्यवस्था लागू होने के कारण ओपीडी काउंटर पर काफी भीड़ लगी रही। बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसबी ओली ने बताया कि अभी पुराने पर्चों का प्रयोग किया जा रहा है। पुराने पर्चों का कागज पतला है। जल्द ही नए पर्चे छपवाएं जाएंगे।
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रविवार की देर शाम चिकित्सा-शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने सुशीला तिवारी अस्पताल में छापा मारा था। छापे के दौरान एनआईसीयू में डॉक्टर गायब थे और सिर्फ नर्स ड्यूटी पर थीं। बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष का फोन भी बंद था। डॉ. सयाना ने एनएचएम के निदेशक को एनआईसीयू में तैनात डॉक्टर को बर्खास्त करने के निर्देश दिए थे।
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राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने बताया कि ड्यूटी रोस्टर में डॉ. स्वाति का नाम था। एमएस डॉ. एके पांडे ने डॉ. स्वाति को बर्खास्त करने के लिए सीएमओ को पत्र भेज दिया है। उन्होंने कहा कि बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजय आर्य से फोन बंद करने को लेकर लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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उन्होंने बताया कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम के दौरे के दौरान भी एनआईसीयू से तीनों डॉक्टर नदारद थे और तीनों को चेतावनी पत्र जारी किया गया था। कहा कि एक शिफ्ट की ड्यूटी करने के बाद शाम को गायब हो जाते हैं और बुलाने पर ही आते हैं। डॉ. आर्य को निर्देश दिए गए कि एनआईसीयू में डॉक्टर शिफ्टों में ड्यूटी करेंगे। साथ ही किसी डॉक्टर के अवकाश पर जाने पर बाल रोग विभाग से एक डॉक्टर की ड्यूटी एनआईसीयू में लगाई जाएगी।
ठीक करें टूटी खिड़की, लगाएं कैमरे
राजकीय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने सोमवार को सुशीला तिवारी अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल में टूटी खिड़की में तुरंत कांच लगवाने के आदेश दिए। साथ ही कहा कि जिन वार्डों में सीसीटीवी नहीं है वहां तुरंत लगवाएं जाएं। एमएस डॉ. एके पांडे को निर्देश दिए कि वे समय-समय पर एनआईसीयू का निरीक्षण करें और व्यवस्थाओं पर पैनी नजर रखें।
शौचालयों में साफ-सफाई रखने, वार्डों में बीपीएल मरीजों को भोजन समय पर देने के आदेश दिए। नर्सिंग अधीक्षिका को वार्डों में दवाएं रखने को कहा। कैंटीन को साफ रखने के आदेश दिए। इस दौरान प्रबंधक परियोजना परितोष पंत, रवि पाल, पंकज बोरा, प्रकाश डंगवाल आदि थे।
जनऔषधि केंद्र और बिक रही ब्रांडेड दवाएं
सुशीला तिवारी अस्पताल के प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र में ब्रांडेड दवाएं धड़ल्ले से बेची जा रही हैं। केंद्र से दवा लेने वाले मरीजों को कंप्यूटरीकृत बिल भी नहीं दिया जा रहा है। सोमवार को रेड क्रास सोसायटी की उपाध्यक्ष सरस्वती खेतवाल ने प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र की जांच की। माना कि केंद्र में ब्रांडेड दवाएं बिक रही हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्र ने इस बात का करार कर रखा है कि जो दवा बीपीआई से नहीं मिल पा रही हैं और प्रमुख हैं उन्हें बाहर से लेकर (ब्रांडेड) बेच सकता है। ब्रांडेड दवा की दरें जनऔषधि के अनुरूप ही ली जाएंगी। बताया कि ये व्यवस्था सिर्फ एसटीएच में खुले केंद्र के लिए है। खेतवाल ने कहा कि अगर कंप्यूटरीकृत बिल दो दिन के भीतर उपभोक्ताओं के देने नहीं शुरू किए गए तो कार्रवाई की जाएगी।
बेस में कंप्यूटर से कटने लगे ओपीडी के पर्चे
बेस अस्पताल में सोमवार से कंप्यूटर से ओपीडी के पर्चे बनने लगे। व्यवस्था के पहले दिन लागू होने के कारण ओपीडी के काउंटर पर खासी भीड़ थी। बेस अस्पताल में अभी तक ओपीडी का पर्चा हाथ से बनता था। सोमवार को ओपीडी के काउंटर पर दो कंप्यूटर लग गए और मरीजों के पर्चे कंप्यूटर से काटे गए।
पर्चों पर अब मरीजों का नाम प्रिंट होकर आ रहा है। पहले दिन व्यवस्था लागू होने के कारण ओपीडी काउंटर पर काफी भीड़ लगी रही। बेस अस्पताल के सीएमएस डॉ. एसबी ओली ने बताया कि अभी पुराने पर्चों का प्रयोग किया जा रहा है। पुराने पर्चों का कागज पतला है। जल्द ही नए पर्चे छपवाएं जाएंगे।