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Nainital News: राजस्थान से बेहोशी की हालत में पहुंचा घर, चार दिन बाद तोड़ा दम
Sun, 02 Mar 2025 01:33 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sun, 02 Mar 2025 01:33 AM IST
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हल्द्वानी। काठगोदाम क्षेत्र के दमुवाढूंगा के रहने वाले 22 वर्षीय युवक की शुक्रवार रात एसटीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह राजस्थान में काम करता था और 23 फरवरी को बेहोशी की हालत में बस से अपने घर पहुंचा। परिवार वालों ने भर्ती कराया लेकिन इलाज के दौरान मौत हो गई। उसे पेट में गंभीर इंफेक्शन था लेकिन मौत का कारण सामने नहीं था। ऐसे में चिकित्सकों ने पुलिस को सूचना दी। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही मौत की गुत्थी खोलेगी।
भूपराम का 22 वर्षीय पुत्र मनीष मौर्य राजस्थान की एक कंपनी में कार्यरत था। 22 फरवरी को उसके साथी का फोन आया कि मनीष की तबीयत खराब है और उसे दिल्ली की बस में बिठा दिया है। दिल्ली से मनीष ने दूसरी बस पकडी और हल्द्वानी आ गया। 23 फरवरी की शाम को वह किसी तरह घर पहुंचा लेकिन आते ही बेहोश हो गया। परिवार वाले उसे लेकर अस्पताल गए। यहां चिकित्सक भी पूरी बीमारी नहीं समझ पाए। जो लक्षण दिखे उसके तहत उसका इलाज किया। जांच में इंफेक्शन भी सामने आया। शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। यह भी माना गया कि जहरीला पदार्थ खाने से मौत हुई होगी। मौत की असली वजह जानने के लिए उसका पोस्टमार्टम हुआ। पिता भूपराम ने बताया कि उनके छह बच्चे हैं। मनीष बड़ा बेटा और घर में इकलौता कमाने वाला था। वह खुद बड़े घरों में जाकर काम करते हैं। बेटे की मौत ने उन्हें तोड़ दिया है।
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भूपराम का 22 वर्षीय पुत्र मनीष मौर्य राजस्थान की एक कंपनी में कार्यरत था। 22 फरवरी को उसके साथी का फोन आया कि मनीष की तबीयत खराब है और उसे दिल्ली की बस में बिठा दिया है। दिल्ली से मनीष ने दूसरी बस पकडी और हल्द्वानी आ गया। 23 फरवरी की शाम को वह किसी तरह घर पहुंचा लेकिन आते ही बेहोश हो गया। परिवार वाले उसे लेकर अस्पताल गए। यहां चिकित्सक भी पूरी बीमारी नहीं समझ पाए। जो लक्षण दिखे उसके तहत उसका इलाज किया। जांच में इंफेक्शन भी सामने आया। शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। यह भी माना गया कि जहरीला पदार्थ खाने से मौत हुई होगी। मौत की असली वजह जानने के लिए उसका पोस्टमार्टम हुआ। पिता भूपराम ने बताया कि उनके छह बच्चे हैं। मनीष बड़ा बेटा और घर में इकलौता कमाने वाला था। वह खुद बड़े घरों में जाकर काम करते हैं। बेटे की मौत ने उन्हें तोड़ दिया है।
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