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दीपा हत्याकांड में हत्या का दोष साबित
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नैनीताल। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की अदालत में दीपा हत्याकांड के दोनों आरोपियों पर हत्या का दोष साबित हो गया है। दोनों अभियुक्तों को 18 दिसंबर को सजा सुनाई जाएगी। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर जेल भेजने के आदेश दिए हैं।
अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया कि सात जुलाई 2016 को जोगा राम उर्फ जग्गू पुत्र मोहन राम निवासी दुपरौली थाना बेड़ीनाग, जिला पिथौरागढ़ और मोहन राम पुत्र गुंसाई राम ग्राम बना, तहसील कांडा, जिला बागेश्वर वाहन टाटा सूमो से मुखानी चौराहे से दीपा पुत्री रंजीत राम निवासी बड़यूडा, पोस्ट देवराड़ी पंत, तहसील गणाई गंगोली, जिला पिथौरागढ़ को घुमाने के बहाने कालाढूंगी, रामनगर होते हुए बाजपुर और काशीपुर ले गए।
बताया गया कि दोनों ने काशीपुर में जाकर शराब पी। बाद में हल्द्वानी की ओर लौटते समय दोनों ने गड़प्पू जंगल के पास दीपा से छेड़खानी की और शारीरिक संबंध बनाने को कहा। विरोध करते हुए दीपा ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी। बताया गया कि इस पर जोगा राम और मोहन राम ने दीपा की हत्या कर शव को भाखड़ा पुल के पास फेंक दिया और अपने वाहन से हल्द्वानी आ गए।
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11 जुलाई को वनवीट वाचर फतेहपुर रेंज कालीगाड़ गणेश राम ने फोन से थाने में शव पड़ा होने की सूचना दी। शव की शिनाख्त कमलेश कुमार पुत्र रंजीत राम ने अपनी बहन दीपा के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में थाना कालाढूंगी में अज्ञात के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की और जांच के बाद जोगा राम व मोहन राम को गिरफ्तार कर लिया गया। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन तथ्यों को साबित करने के लिए 13 गवाह पेश किए। न्यायालय में शर्मा ने सर्विलांस से संबंधित मुख्य साक्षी हुसैन एम जैदी (नोडल अधिकारी आईडिया सेल्यूलर लि. नोएडा) को मृतका व दोनों आरोपियों की कॉल डिटेल व मोबाइल लोकेशन साबित कराने के लिए पेश किए। इससे यह साबित हुआ कि घटना के रोज मृतका दीपा व दोनों अभियुक्त जोगा राम व मोहन राम एक साथ थे।
दोनों पक्षों व गवाहों के बयान सुनने और अभिलेखों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने हत्यारोपी जोगा राम व मोहन राम को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 व 201 के तहत हत्या का दोषी करार दिया और दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए।
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अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया कि सात जुलाई 2016 को जोगा राम उर्फ जग्गू पुत्र मोहन राम निवासी दुपरौली थाना बेड़ीनाग, जिला पिथौरागढ़ और मोहन राम पुत्र गुंसाई राम ग्राम बना, तहसील कांडा, जिला बागेश्वर वाहन टाटा सूमो से मुखानी चौराहे से दीपा पुत्री रंजीत राम निवासी बड़यूडा, पोस्ट देवराड़ी पंत, तहसील गणाई गंगोली, जिला पिथौरागढ़ को घुमाने के बहाने कालाढूंगी, रामनगर होते हुए बाजपुर और काशीपुर ले गए।
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बताया गया कि दोनों ने काशीपुर में जाकर शराब पी। बाद में हल्द्वानी की ओर लौटते समय दोनों ने गड़प्पू जंगल के पास दीपा से छेड़खानी की और शारीरिक संबंध बनाने को कहा। विरोध करते हुए दीपा ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी। बताया गया कि इस पर जोगा राम और मोहन राम ने दीपा की हत्या कर शव को भाखड़ा पुल के पास फेंक दिया और अपने वाहन से हल्द्वानी आ गए।
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11 जुलाई को वनवीट वाचर फतेहपुर रेंज कालीगाड़ गणेश राम ने फोन से थाने में शव पड़ा होने की सूचना दी। शव की शिनाख्त कमलेश कुमार पुत्र रंजीत राम ने अपनी बहन दीपा के रूप में की। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में थाना कालाढूंगी में अज्ञात के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की और जांच के बाद जोगा राम व मोहन राम को गिरफ्तार कर लिया गया। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अभियोजन तथ्यों को साबित करने के लिए 13 गवाह पेश किए। न्यायालय में शर्मा ने सर्विलांस से संबंधित मुख्य साक्षी हुसैन एम जैदी (नोडल अधिकारी आईडिया सेल्यूलर लि. नोएडा) को मृतका व दोनों आरोपियों की कॉल डिटेल व मोबाइल लोकेशन साबित कराने के लिए पेश किए। इससे यह साबित हुआ कि घटना के रोज मृतका दीपा व दोनों अभियुक्त जोगा राम व मोहन राम एक साथ थे।
दोनों पक्षों व गवाहों के बयान सुनने और अभिलेखों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने हत्यारोपी जोगा राम व मोहन राम को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 व 201 के तहत हत्या का दोषी करार दिया और दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिए।