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नैनीताल के लिए नई त्रासदी लाएगा प्रस्तावित रोपवे : प्रो. रावत
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नैनीताल के लिए नई त्रासदी लाएगा प्रस्तावित रोपवे : प्रो. रावत
पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत ने चेताया, न करें निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
नैनीताल। नैनीताल में वाहनों का दबाव कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित रानीबाग-हनुमानगढ़ी रोपवे नैनीताल के लिए विकास नहीं बल्कि विनाश का कारण बनेगा। इसके बनने से इस क्षेत्र में भूस्खलन बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। यह कहना है जाने-माने पर्यावरणविद् प्रोफेसर अजय रावत का।
प्रो. रावत ने कहा कि जिस क्षेत्र में रोपवे का निर्माण प्रस्तावित है वह नैनीताल का सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र है। यहां पर किया जाने वाला निर्माण भूस्खलन को बढ़ावा देगा और उससे समूचे शहर के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। उनका कहना है कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया अपने एक सर्वेक्षण में यह कह चुका है कि बलिया घाटी अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है। यहां मिट्टी की जांच में पाया गया कि इसमें 98 फीसदी मिट्टी और 2 फीसदी भुरभुरी चट्टान है।
रावत के अनुसार यदि कोई निर्माण किया जाता है तो वह टिकाऊ हो ही नहीं सकता। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में यहां वन विभाग की कॉलोनी का निर्माण प्रस्तावित था। इसके लिए तत्कालीन मुख्य सचिव एसके दास ने एक समिति गठित की थी। समिति ने इस जगह पर निर्माण की इजाजत नहीं दी। बाद में 2010 में यहां हेलीपैड निर्माण की कवायद शुरू हुई। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दी थी, जिस पर हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट निर्देश दिया कि इस क्षेत्र को पार्क के रूप में विकसित किया जाए।
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प्रो. रावत ने कहा कि इस क्षेत्र में स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर का भी एक बड़ा क्षेत्र धीरे-धीरे धंस रहा है, इसके प्रति भी सतर्क रहना जरूरी है। इसके अलावा इसके नीचे के क्षेत्र में ताकुला के पास सीवर लाइन निर्माण में भी भारी समस्या आई और वह बार-बार टूट जाता था क्योंकि ठीक इसी क्षेत्र से शिवालिक तथा लैसर हिमालय की विभाजक रेखा ‘मेन बाउंड्री थ्रस्ट’ गुजरती है। यहीं से नैनीताल थ्रस्ट और कोरिया थ्रस्ट भी गुजरते हैं, जिसके कारण यह क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील है। प्रो. रावत का कहना है कि वैसे भी यहां रोपवे निर्माण से पर्यटकों को कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि इसके लिए पहले पर्यटक हल्द्वानी से रानीबाग तक वाहन से आएंगे फिर वहां से हनुमानगढ़ी रोपवे और हनुमानगढ़ी से फिर टैक्सी से नैनीताल जाएंगे। रोपवे का किराया भी बहुत ज्यादा होगा और असुविधा बनी रहेगी।
इनसेट
जायका को भी जायका नहीं मिला परियोजना में
नैनीताल। बलियाघाटी क्षेत्र में यूं तो पिछली शताब्दी से ही भूस्खलन होता रहा है लेकिन बीते दो दशकों से यहां भूस्खलन बहुत बढ़ गया है। स्थिति यह है कि यहां से हर बरसात में कई परिवारों को विस्थापित किया जाता रहा है। क्षेत्र में भूस्खलन की रोक को सरकार ने जापान की संस्था जैपनीज इंटरनेशनल कंस्ट्रक्शन एसोसिएशन (जायका) से सर्वेक्षण करवाया था, जिसमें 70 मीटर गहराई तक खुदाई के बाद भी संस्था को मिट्टी ही मिट्टी मिली। प्रो. रावत का कहना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षित निर्माण की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
फोटो
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पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत ने चेताया, न करें निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
नैनीताल। नैनीताल में वाहनों का दबाव कम करने के उद्देश्य से प्रस्तावित रानीबाग-हनुमानगढ़ी रोपवे नैनीताल के लिए विकास नहीं बल्कि विनाश का कारण बनेगा। इसके बनने से इस क्षेत्र में भूस्खलन बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। यह कहना है जाने-माने पर्यावरणविद् प्रोफेसर अजय रावत का।
प्रो. रावत ने कहा कि जिस क्षेत्र में रोपवे का निर्माण प्रस्तावित है वह नैनीताल का सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र है। यहां पर किया जाने वाला निर्माण भूस्खलन को बढ़ावा देगा और उससे समूचे शहर के लिए खतरा पैदा हो जाएगा। उनका कहना है कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया अपने एक सर्वेक्षण में यह कह चुका है कि बलिया घाटी अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है। यहां मिट्टी की जांच में पाया गया कि इसमें 98 फीसदी मिट्टी और 2 फीसदी भुरभुरी चट्टान है।
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रावत के अनुसार यदि कोई निर्माण किया जाता है तो वह टिकाऊ हो ही नहीं सकता। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 में यहां वन विभाग की कॉलोनी का निर्माण प्रस्तावित था। इसके लिए तत्कालीन मुख्य सचिव एसके दास ने एक समिति गठित की थी। समिति ने इस जगह पर निर्माण की इजाजत नहीं दी। बाद में 2010 में यहां हेलीपैड निर्माण की कवायद शुरू हुई। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दी थी, जिस पर हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट निर्देश दिया कि इस क्षेत्र को पार्क के रूप में विकसित किया जाए।
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प्रो. रावत ने कहा कि इस क्षेत्र में स्थित हनुमानगढ़ी मंदिर का भी एक बड़ा क्षेत्र धीरे-धीरे धंस रहा है, इसके प्रति भी सतर्क रहना जरूरी है। इसके अलावा इसके नीचे के क्षेत्र में ताकुला के पास सीवर लाइन निर्माण में भी भारी समस्या आई और वह बार-बार टूट जाता था क्योंकि ठीक इसी क्षेत्र से शिवालिक तथा लैसर हिमालय की विभाजक रेखा ‘मेन बाउंड्री थ्रस्ट’ गुजरती है। यहीं से नैनीताल थ्रस्ट और कोरिया थ्रस्ट भी गुजरते हैं, जिसके कारण यह क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील है। प्रो. रावत का कहना है कि वैसे भी यहां रोपवे निर्माण से पर्यटकों को कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि इसके लिए पहले पर्यटक हल्द्वानी से रानीबाग तक वाहन से आएंगे फिर वहां से हनुमानगढ़ी रोपवे और हनुमानगढ़ी से फिर टैक्सी से नैनीताल जाएंगे। रोपवे का किराया भी बहुत ज्यादा होगा और असुविधा बनी रहेगी।
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जायका को भी जायका नहीं मिला परियोजना में
नैनीताल। बलियाघाटी क्षेत्र में यूं तो पिछली शताब्दी से ही भूस्खलन होता रहा है लेकिन बीते दो दशकों से यहां भूस्खलन बहुत बढ़ गया है। स्थिति यह है कि यहां से हर बरसात में कई परिवारों को विस्थापित किया जाता रहा है। क्षेत्र में भूस्खलन की रोक को सरकार ने जापान की संस्था जैपनीज इंटरनेशनल कंस्ट्रक्शन एसोसिएशन (जायका) से सर्वेक्षण करवाया था, जिसमें 70 मीटर गहराई तक खुदाई के बाद भी संस्था को मिट्टी ही मिट्टी मिली। प्रो. रावत का कहना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षित निर्माण की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
फोटो