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भारतीय चिकित्सा परिषद के चुनाव परिणाम की घोषणा पर रोक
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प्रतीकात्मक फोटो।
नैनीताल। हाईकोर्ट ने भारतीय चिकित्सा परिषद के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के बाद 19 फरवरी को प्रस्तावित चुनाव परिणाम की घोषणा पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि इससे संबंधित वाद की सुनवाई के निर्णय के बाद ही चुनाव परिणाम के संबंध में आगे की कार्रवाई की जाए।
न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार यूनानी चिकित्सक हकीम फैजुद्दीन हक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि चुनाव परिषद की ओर से हर तीन वर्ष में चुनाव कराए जाते हैं। याचिका में कहा गया कि इस चुनाव प्रक्रिया में प्रदेश के आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सक भाग लेते हैं। इनकी संख्या करीब 5000 है। याचिका में कहा गया कि चिकित्सा परिषद के चुनाव 1956 की नियमावली के क्रम में कराए जा रहे हैं, जो गलत है।
याचिका में कहा गया कि इस चुनाव के तहत सदस्यों को पोस्टल बैलेट भेजे गए हैं। कई चिकित्सकों को दो-दो बैलेट मिले हैं, जबकि कई चिकित्सकों तक बैलेट पहुंचे ही नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से चुनाव की पारदर्शिता ठीक न होने के चलते इस पर रोक लगाने की मांग की गई थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को 19 फरवरी को चुनाव परिणाम की घोषणा पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
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न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार यूनानी चिकित्सक हकीम फैजुद्दीन हक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि चुनाव परिषद की ओर से हर तीन वर्ष में चुनाव कराए जाते हैं। याचिका में कहा गया कि इस चुनाव प्रक्रिया में प्रदेश के आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सक भाग लेते हैं। इनकी संख्या करीब 5000 है। याचिका में कहा गया कि चिकित्सा परिषद के चुनाव 1956 की नियमावली के क्रम में कराए जा रहे हैं, जो गलत है।
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याचिका में कहा गया कि इस चुनाव के तहत सदस्यों को पोस्टल बैलेट भेजे गए हैं। कई चिकित्सकों को दो-दो बैलेट मिले हैं, जबकि कई चिकित्सकों तक बैलेट पहुंचे ही नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से चुनाव की पारदर्शिता ठीक न होने के चलते इस पर रोक लगाने की मांग की गई थी। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को 19 फरवरी को चुनाव परिणाम की घोषणा पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
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