{"_id":"64de772bb22eefd9570791a4","slug":"prepare-better-tiger-conservation-for-uttarakhand-high-court-nainital-news-c-97-1-hld1029-3377-2023-08-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Nainital News: हाईकोर्ट ने दिए सरकार को निर्देश, उत्तराखंड के लिए करें बेहतर टाइगर कंजर्वेशन तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Nainital News: हाईकोर्ट ने दिए सरकार को निर्देश, उत्तराखंड के लिए करें बेहतर टाइगर कंजर्वेशन तैयार
Fri, 18 Aug 2023 02:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Fri, 18 Aug 2023 02:51 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव वन को दिशा निर्देश दिए थे कि वह मानव वन्य जीव संघर्ष को रोकने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करें। कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष का रीयल टाइम डाटा भी वन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करें।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हाईकोर्ट ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की। हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु के नेशनल पार्कों से भी अच्छे प्लान बनाकर उत्तराखंड के लिए बेहतर टाइगर कंजर्वेशन तैयार करें।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने कहा कि मानव वन्यजीव संघर्ष का रीयल टाइम डाटा भी वन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करें। हाईकोर्ट ने राज्य में पौराणिक काल से चले आ रहे वन्यजीव कॉरिडोर की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट दो माह में पेश करने के लिए भी कहा। मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: कोटद्वार में कार खाई में गिरने से एक की मौत, यमुनोत्री के पास पहाड़ी से फिसलकर बुजुर्ग की गई जान
विज्ञापन
यह थी याचिका
देहरादून निवासी अनु पंत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नवंबर 2022 में इस मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव वन को दिशा निर्देश दिए थे कि वह मानव वन्य जीव संघर्ष को रोकने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करें। कहा गया कि पूर्व में तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक विनोद सिंघल की ओर से दाखिल शपथपत्र में केवल कागजी कार्यवाही का उल्लेख था। धरातल पर मानव वन्य जीव संघर्ष को रोकने का कुछ उल्लेख नहीं था। कुछ वर्षों से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा है। कोर्ट से प्रार्थना की गई थी कि मानव-वन्यजीव संघर्ष पर रोक लगाई जाए और पूर्व में कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन कराया जाए।