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उत्तराखंड के लोगों को केंद्र सरकार की सेवाओं में आरक्षण मिले : किशोर
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नैनीताल रोड स्थित निजी रेस्टोरेंट में पत्रकारों के साथ वार्ता करते कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्
- फोटो : HALDWANI
हल्द्वानी। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि उत्तराखंड राज्य बने 20 वर्ष हो चुके हैं मगर उत्तराखंड के लोगों की स्थिति सुधरने के बजाए खराब होती जा रही है। जल, जंगल और जमीन पर उत्तराखंड के लोगों का अधिकार न होना सबसे बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों को केंद्र सरकार की सेवाओं में आरक्षण मिलना चाहिए।
रविवार को एक रेंस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वनाधिकार कानून 2006 में बना था मगर आज तक धरातल पर नहीं उतर पाया। उत्तराखंड के लोगों को गिरिजन और वनवासी घोषित किया जाए। प्रतिमाह एक गैस सिलिंडर, बिजली और पानी निशुल्क दिया जाए। साथ ही आवास बनाने के लिए लकड़ी, बजरी और पत्थर भी निशुल्क दिया जाए। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क हो। जड़ी बूटियों पर स्थानीय समुदाय का अधिकार हो। जंगली जानवरों द्वारा जनहानि होने पर 25 लाख रुपये क्षतिपूर्ति और परिवार के एक सदस्य को पक्की सरकारी नौकरी दी जाए। जंगली जानवर अगर फसल को नुकसान पहुंचाता है तो प्रति नवली पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति दी जाए। साथ ही राज्य में अविलंब चकबंदी की जाए।
उपाध्याय ने कहा कि जल, जंगल और जमीन में जन भी जोड़ा जाए साथ ही जनता से जुड़े कानूनों को दोबारा परिभाषित किया जाए। उन्होंने कहा कि झारखंड में जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर ही सरकार बनी है। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी इसको लेकर आंदोलन हो रहा है। प्राधिकरण के स्वरूप को सरकार तत्काल बदले या उसे खत्म करे ताकि नक्शे के नाम पर होने वाली लूट बंद हो सके।
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उत्तराखंड वनाधिकार कांग्रेस लड़ेगी पुश्तैनी हक हकूक की लड़ाई
हल्द्वानी। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि उत्तराखंडियों को वनों पर उनके पुश्तैनी हक हकूक और अधिकारों के लिए संघर्ष करने को उत्तराखंड वनाधिकार कांग्रेस बनाई है। संगठन को और अधिक मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक कोआर्डिनेशन कमेटी बनाई जाएगी। जिसमें महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत अलग-अलग राज्यों से लोगों को जोड़ा जाएगा ताकि आंदोलन को बड़ा स्वरूप दिया जा सके। राम पांडे को उत्तराखंड वनाधिकार कांग्रेस का प्रदेश महामंत्री संगठन बनाया गया है। अमित नेगी कोटद्वार, विनोद कार्की पिथौरागढ़, सुरेश गौरी ऊधमसिंह नगर, दीपक दोशी चंपावत और मनोज खुल्बे को जिला संयोजक बनाया गया है। प्रेम बहुखंडी राजेंद्र भंडारी, दीपक बल्यूटिया, जगपाल सिंह सैनी, पुष्कर दुर्गापाल, राजेंद्र सगोई, अर्जुन, राजेंद्र प्रसाद रतूड़ी, हुकुम सिंह कुंवर, केदार पलड़िया को उत्तराखंड वनाधिकार कांग्रेस का संयोजक बनाया है।
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रविवार को एक रेंस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वनाधिकार कानून 2006 में बना था मगर आज तक धरातल पर नहीं उतर पाया। उत्तराखंड के लोगों को गिरिजन और वनवासी घोषित किया जाए। प्रतिमाह एक गैस सिलिंडर, बिजली और पानी निशुल्क दिया जाए। साथ ही आवास बनाने के लिए लकड़ी, बजरी और पत्थर भी निशुल्क दिया जाए। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क हो। जड़ी बूटियों पर स्थानीय समुदाय का अधिकार हो। जंगली जानवरों द्वारा जनहानि होने पर 25 लाख रुपये क्षतिपूर्ति और परिवार के एक सदस्य को पक्की सरकारी नौकरी दी जाए। जंगली जानवर अगर फसल को नुकसान पहुंचाता है तो प्रति नवली पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति दी जाए। साथ ही राज्य में अविलंब चकबंदी की जाए।
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उपाध्याय ने कहा कि जल, जंगल और जमीन में जन भी जोड़ा जाए साथ ही जनता से जुड़े कानूनों को दोबारा परिभाषित किया जाए। उन्होंने कहा कि झारखंड में जल, जंगल और जमीन के मुद्दे पर ही सरकार बनी है। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी इसको लेकर आंदोलन हो रहा है। प्राधिकरण के स्वरूप को सरकार तत्काल बदले या उसे खत्म करे ताकि नक्शे के नाम पर होने वाली लूट बंद हो सके।
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उत्तराखंड वनाधिकार कांग्रेस लड़ेगी पुश्तैनी हक हकूक की लड़ाई
हल्द्वानी। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि उत्तराखंडियों को वनों पर उनके पुश्तैनी हक हकूक और अधिकारों के लिए संघर्ष करने को उत्तराखंड वनाधिकार कांग्रेस बनाई है। संगठन को और अधिक मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक कोआर्डिनेशन कमेटी बनाई जाएगी। जिसमें महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ समेत अलग-अलग राज्यों से लोगों को जोड़ा जाएगा ताकि आंदोलन को बड़ा स्वरूप दिया जा सके। राम पांडे को उत्तराखंड वनाधिकार कांग्रेस का प्रदेश महामंत्री संगठन बनाया गया है। अमित नेगी कोटद्वार, विनोद कार्की पिथौरागढ़, सुरेश गौरी ऊधमसिंह नगर, दीपक दोशी चंपावत और मनोज खुल्बे को जिला संयोजक बनाया गया है। प्रेम बहुखंडी राजेंद्र भंडारी, दीपक बल्यूटिया, जगपाल सिंह सैनी, पुष्कर दुर्गापाल, राजेंद्र सगोई, अर्जुन, राजेंद्र प्रसाद रतूड़ी, हुकुम सिंह कुंवर, केदार पलड़िया को उत्तराखंड वनाधिकार कांग्रेस का संयोजक बनाया है।