ज्योलीकोट: सिस्टम ने किया बीमार, निजी अस्पतालों में जांच- दवा के नाम पर हजारों रुपये खर्च होने से मुश्किल बढ़ी
ज्योलीकोट में पीलिया ने भयावह रूप ले लिया है, घर-घर में यह बीमारी फैल गई है। बीमारी से भी ज्यादा खतरनाक इलाज का बढ़ता खर्च साबित हो रहा है, जिससे परिजनों के चेहरे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गई हैं।
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ज्योलीकोट आज दर्द की घाटी बन गया है। यहां घर-घर में पीलिया ने डेरा डाल रखा है, और इस बीमारी से ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है इलाज का खर्च। लोगों की आंखों का पीलापन तो दवाओं से उतर भी जाए, पर परिजनों के चेहरे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं।
सरकारी अस्पताल में सुविधाएं न होने और प्राइवेट में सही इलाज न मिलने से लोग अपना घर, अपना गांव छोड़कर हल्द्वानी, बरेली और दिल्ली तक इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई परिवार तो इलाज करवाकर अपनों को बचाने में कामयाब हुए, लेकिन कुछ परिवार सबकुछ खर्च करके भी अपनों को नहीं बचा पाए। अब वह सिर्फ बेबस होकर अपने हालात को कोस रहे हैं।
भाई-बहन को पीलिया, परिजन परेशान
तल्ला बेलुवाखान निवासी करन कुमार आर्य ने बताया कि उनके सात वर्षीय भतीजे रुद्राक्ष आर्य की अचानक तबीयत बिगड़ गई। 27 अगस्त को उसे एसके नर्सिंग हल्द्वानी में भर्ती कराया। दो दिनों बाद स्थिति बिगड़ने पर उसे बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां छह सितंबर तक उसका इलाज चला। रूद्राक्ष के दिमाग तक बुखार चढ़ गया था। अभी उसकी स्थिति में सुधार है, लेकिन दस दिनों बाद दोबारा जांच के लिए ले जाना है। उसके इलाज में करीब दो लाख रुपये तक खर्च आया है। वहीं अब रूद्राक्ष की चार वर्षीय बहन लक्षिता को भी पीलिया की शिकायत है। उसकी जांच हल्द्वानी में करवाई गई है। परिवार रुपयों के साथ बच्चों की सुरक्षा की चिंता में काफी परेशान है। परिवार से दूर अस्पताल में एक-एक दिन भारी पड़ता है। हल्द्वानी के सरकारी अस्पतालों में ज्यादा बेहतर सुविधा नहीं हैं इसलिए निजी अस्पतालों में ले जाना पड़ता है।
बीमारी एक को, गरीबी पूरे परिवार को
क्षेत्र में पीलिया सिर्फ मरीज के शरीर को नहीं खोखला कर रहा, पूरे परिवार की कमर तोड़ रहा है। पीड़ितों के परिजनों के कहना है कि एक तो रोजगार पहले से कम, ऊपर से पहाड़ से नीचे आकर इलाज कराना। जांचों के नाम पर हजारों रुपये, दवाइयों के नाम पर हजारों रुपये। जो परिवार महीने का 10-15 हजार कमाता है, वो लाखों का बिल कहां से भरे? सबसे बड़ा दर्द है अपनों से दूरी का। पहाड़ का आदमी अपने घर, अपने लोगों के बिना रह नहीं पाता। लेकिन अस्पताल की मजबूरी ने पिता को बेटी से, पति को पत्नी से सैकड़ों किलोमीटर दूर कर दिया है। फोन पर सिर्फ एक ही बात होती है पैसे और भेज दो।
जिले के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा इलाज ज्योलीकोट क्षेत्र के कई लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं। सभी मरीजों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। ऐसे में उनके परिजनों की चिंता और बढ़ गई है। ज्योलीकोट निवासी गौरव पाठक, गोविंद बल्लभ पाठक का इलाज कृष्णा अस्पताल, बीना बर्गली का इलाज बेस अस्पताल, गौर कुमार, महेश चंद्रा और एसके गुप्ता का इलाज हल्द्वानी में चल रहा है। इसी तरह अन्य परिवारों के लोग अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। कोट... क्षेत्र में लोगों की लगातार जांच की जा रही है। उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सभी व्यवस्थाएं की जा रही है। मंगलवार को 80 लोगों के ब्लड सैंपल भी लिए गए हैं। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलीकोट में निजी चिकित्सालयों के फिजिशियन एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे।- डॉ. रश्मि पंत, सीएमओ
ज्योलीकोट में नहीं थम रहा जल जनित बीमारी का प्रकोप
ज्योलीकोट क्षेत्र में जल जनित बीमारी का प्रकोप लगातार बना हुआ है। संक्रमण की चपेट में आ रहे मरीजों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। मंगलवार को ज्योलीकोट समेत आसपास के क्षेत्रों से 15 से अधिक मरीज उपचार के लिए बीडी पांडे अस्पताल पहुंचे, जिनमें तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। लगातार सामने आ रहे मामलों से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।
बता दें कि ज्योलीकोट क्षेत्र में बीते करीब दो माह से दूषित पानी के कारण संक्रमण फैलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। संक्रमण के चलते क्षेत्र में एक महिला और एक छात्र की मौत भी हो चुकी है। दो मौतों के बाद लोगों के आक्रोश को देखते हुए जल संस्थान और स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में निगरानी एवं जांच बढ़ाई है, लेकिन इसके बावजूद बीमारी पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। मंगलवार को ज्योलीकोट, बेलुवाखान, वीरभट्टी, गेठिया और गांजा क्षेत्र से करीब 15 मरीज उपचार के लिए बीडी पांडे अस्पताल पहुंचे। अस्पताल की वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएस दुग्ताल ने बताया कि सोमवार को क्षेत्र के 11 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। मंगलवार को तीन और मरीजों को भर्ती किया गया है। सभी भर्ती मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है।