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कविताओं में पंत और शेरदा का योगदान अविस्मरणीय
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, भीमताल (नैनीताल)।
Updated Sat, 21 May 2016 01:15 AM IST
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पंत-शेरदा का स्मरण
- फोटो : अमर उजाला
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भीमताल (नैनीताल)। कुमाऊं विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और कुमाऊंनी भाषा विभाग के समन्वयक प्रो.एसएस बिष्ट ने कहा कि महाकवि सुमित्रानंदन पंत की कविताओं में न केवल कलात्मक भाषा का बल्कि प्रभावशाली बिंबों और प्रतीकों का ऐसा प्रयोग दिखाई देता है जिसने हिंदी कविता को नए आयाम दिए।
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प्रो.बिष्ट शुक्रवार को रामगढ़ स्थित महादेवी वर्मा सृजन पीठ में सुमित्रानंदन पंत के 117वें जन्मदिन और कुमाऊंनी कवि शेरदा अनपढ़ की पांचवीं पुण्य तिथि पर आयोजित संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। कहा भाषा के परिमार्जन में पंत का योगदान अविस्मरणीय है। वरिष्ठ कुमाऊंनी कवि मथुरादत्त मठपाल ने कहा आदिकवि गुमानी से कुमाऊंनी काव्य शुरू हुआ और शेरदा से आधुनिक कविता।
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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बागेश्वर में सहायक प्राध्यापक डा.दीपा गोबाड़ी ने शेरदा को रसज्ञ कवि बताया। उन्होंने कहा कि शेरदा में नीरस को भी सरस बना देने की अद्भुत कला थी। इस मौके पर शोध छात्रा शालिनी नागर ने शेरदा अनपढ़ के व्यक्तित्व व कृतित्व पर आधारित प्रो.चंद्रकला रावत का शोध आलेख पढ़ा।
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संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एचएस धामी ने लोकभाषा और लोकबोली के संवर्धन एवं संरक्षण की दिशा में प्रयास किए जाने पर जोर दिया। उन्होने कहा अपनी बोली भाषा से जुड़े बगैर कोई भी सभ्य समाज जीवन में तरक्की नहीं कर सकता है। पीठ के निदेशक प्रो.देव सिंह पोखरिया ने पीठ की ओर से किए जाने वाले कार्यक्रमों के बारे में बताया। इस मौके पर उत्तराखंड के राज्य गीत के लेखक हेमंत बिष्ट को सम्मानित और डा.दीपा कांडपाल की पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में विभिन्न स्थानों से आए कवियों ने कुमाऊंनी कविता पाठ किया। इस मौके पर सरवत उस्मानी, मनोहर ब्रजवाल, मधु जोशी, डा. नीलम पांडे, जावेद अली, सुनीता बिष्ट, शीला आर्या, कंचन बिष्ट, कमलेश साह, दीवान सिंह दरम्वाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत ने सभी का आभार जताया।