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दूसरों के ही भरोसे वाहन प्रदूषण की जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Sat, 23 Jul 2016 12:19 AM IST
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल वाहन प्रदूषण को लेकर सख्त है, लेकिन कुमाऊं में परिवहन विभाग के पास सड़क पर भी प्रदूषण जांच की मशीन तक नहीं है। जो चालान होते भी हैं, उसके लिए भी परिवहन विभाग की चेकिंग दूसरों के संसाधन और अभिलेखों पर ही निर्भर है।
परिवहन विभाग ने तीन महीनों (अप्रैल, मई और जून) में 404 वायु प्रदूषण और 65 ध्वनि प्रदूषण में चालान किए हैं। इसमें वायु प्रदूषण में जो चालान हुए हैं, उसमें बड़ी संख्या में चालान ‘कागज’ के आधार पर हुए हैं। जिन कॉमर्शियल वाहनों के पास वायु प्रदूषण के प्रमाण पत्रों में तारीख निकल गई, उनका चालान किया गया। कुछ का संदेह होने पर निजी क्षेत्र के प्रदूषण जांच केंद्र में जांच कराकर चालान किया गया।
ध्वनि प्रदूषण जांच भी वाहन स्वामी के भरोसे ही टीम रही। जिन वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगा था, उसको देखकर टीम ने चालान किया है। पर जो बाइक सवार साइलेंसर में बदलाव कर कान फोड़ू आवाज के साथ सड़कों पर दौड़ते हैं, उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। यही नहीं ओवर स्पीड जांचने की भी कोई मशीन विभाग के पास नहीं है। एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. गुरदेव सिंह कहते हैं कि प्रदूषण को लेकर तीन महीने में 469 वाहनों का चालान किया गया है।
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परिवहन विभाग ने तीन महीनों (अप्रैल, मई और जून) में 404 वायु प्रदूषण और 65 ध्वनि प्रदूषण में चालान किए हैं। इसमें वायु प्रदूषण में जो चालान हुए हैं, उसमें बड़ी संख्या में चालान ‘कागज’ के आधार पर हुए हैं। जिन कॉमर्शियल वाहनों के पास वायु प्रदूषण के प्रमाण पत्रों में तारीख निकल गई, उनका चालान किया गया। कुछ का संदेह होने पर निजी क्षेत्र के प्रदूषण जांच केंद्र में जांच कराकर चालान किया गया।
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ध्वनि प्रदूषण जांच भी वाहन स्वामी के भरोसे ही टीम रही। जिन वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगा था, उसको देखकर टीम ने चालान किया है। पर जो बाइक सवार साइलेंसर में बदलाव कर कान फोड़ू आवाज के साथ सड़कों पर दौड़ते हैं, उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। यही नहीं ओवर स्पीड जांचने की भी कोई मशीन विभाग के पास नहीं है। एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. गुरदेव सिंह कहते हैं कि प्रदूषण को लेकर तीन महीने में 469 वाहनों का चालान किया गया है।
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