आपदा से बचाव के नाम पर खनन का खुला खेल
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शुक्रवार को यह भी साबित हुआ कि रिवर ट्रेनिंग के नाम पर खनन का खुला खेल भी खेला जाता है। रिवर ट्रेनिंग नीति साफ तौर पर कहती है कि नदी का तल ऊंचा उठ रहा हो तो आरबीएम निकाला जा सकता है। इस आरबीएम को बेचने की अनुमति के बाद ही सारा खेल शुरू होता है। यह ऐसे भी समझा जा सकता है कि नंधौर में आरबीएम को बेचने की अनुमति वन विभाग ने नहीं दी तो अब रिवर ट्रेनिंग का काम भी अटक गया।
वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक करीब-करीब हर आरक्षित वन की नदी में रिवर ट्रेनिंग की अनुमति मांगी जा रही है। नंधौर के अलावा दाबका, कैलाश, देवा आदि नदियों के लिए यह कोशिश हो रही है। नंधौर में भी अनुमति मांगी गई है। यहां वन विभाग ने साफ किया कि किसी भी सूरत में आरबीएम को बेचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसकेबाद से ही नंधौर में रिवर ट्रेनिंग की मांग ठंडी पड़ गई है। जमरानी में भी एक बच्चे की मौत के बाद से राजस्व क्षेत्र के पट्टों से खनन बंद था। अब रिवर ट्रेनिंग के नाम पर अनुमति मिली तो नदी का सीना चाक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।