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ऑनलाइन पढ़ाई रामभरोसे रही, सरकारी स्कूलों में 90 फीसदी अध्यापक स्कूल नहीं आए
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हल्द्वानी। शासन के स्पष्ट आदेश न होने के कारण पहली जुलाई से सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की उपस्थिति न के बराकर ही रही। 90 फीसदी अध्यापक स्कूल नहीं आए जबकि 10 फीसदी अध्यापकों ने विद्यालय पहुंचकर नए सत्र में कुछ बच्चों के दाखिले भी किए। संसाधनों की कमी के चलते सरकारी स्कूलों के गरीब बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई नहीं कर पाए। न तो बच्चों के पास एनरॉयड फोन हैं और न ही स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षण के संसाधन। इधर, पब्लिक स्कूलों में संसाधन होने के चलते ऑनलाइन पढ़ाई विधिवत शुरू हो गई।
अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण निदेशक सीमा जौनसारी ने पहली जुलाई से नये सत्र में प्रवेश लेने से वंचित बच्चों को चिह्नित कर उनका दाखिला किए जाने के आदेश जारी किए थे। उन्होंने कहा कि स्कूल खुलने पर ऑफलाइन एवं विद्यालय न खुलने की स्थिति में ऑनलाइन दाखिले किए जाने को कहा था। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से भी बुधवार को आदेश जारी किया गया था ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के साथ ही पहली जुलाई से सरकारी एवं निजी विद्यालयों में अध्यापकों की ओर से बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया।
कक्षा एक और कक्षा 6 में प्रवेश के लिए कोई अभियान नहीं चला। 90 प्रतिशत विद्यालय इस मुहिम से दूर रहे। इसका एक कारण अधिकारियों की ओर से प्रवेश प्रक्रिया सुचारू करने एवं विद्यालय परिसर को दुरुस्त करने एवं शिक्षण के ऑनलाइन व्यवस्था न होने पर अन्य विकल्पों के माध्यम से पढ़ाई करवाने में दिलचस्पी नहीं लेना भी रहा। ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के उपरांत भी अध्यापक अपने कार्यस्थल जाने को तैयार नहीं है। सभी ग्रुपों में अध्यापक अपने नेताओं से यही पूछ रहे हैं कि क्या विद्यालय जाना जरूरी है या घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई करा दें। कुछ शिक्षक नेता 25 अप्रैल का पत्र घुमा कर यह कहते नजर आ रहे हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई घर से की जानी है।
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मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता का कहना है कि ऑनलाइन शिक्षण कार्य हर हाल में किया जाए, यह देखने की जिम्मेदारी संबंधित प्रधानाचार्य की होगी कि अध्यापक ऑनलाइन पढ़ा भी रहे हैं या नहीं। स्कूल खोलने के बारे में निदेशालय की ओर से कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। इसलिए हमने अपने स्तर से कोई आदेश नहीं किया है। यह भी जानकारी में आया कि स्वैच्छा से कुछ अध्यापक पहले दिन स्कूल गए भी और उन्होंने बच्चों की पढ़ाई कराए जाने के लिए वर्कशीट आदि भी तैयार की हैं।
देवलचौड़ संकुल में जीरो, चोरगलिया में दो दाखिले
हल्द्वानी। चोरगलिया संकुल में 11 प्राथमिक स्कूल हैं। इस संकुल की समन्वयक दीक्षा जोशी ने बताया कि उन्होंने पहली जुलाई को खुद दो दाखिले किए हैं। संकुल क्षेत्र के अन्य स्कूलों में दाखिले किए गए हैं। देवलचौड़ संकुल का हाल यह है कि राजकीय प्राइमरी विद्यालय देवलचौड़ में ही छात्र नामांकन कक्षा एक में जीरो है। प्रधानाध्यापक मनोहर लाल का कहना है कि हमने पहले दिन एक भी दाखिला नहीं किया।
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अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण निदेशक सीमा जौनसारी ने पहली जुलाई से नये सत्र में प्रवेश लेने से वंचित बच्चों को चिह्नित कर उनका दाखिला किए जाने के आदेश जारी किए थे। उन्होंने कहा कि स्कूल खुलने पर ऑफलाइन एवं विद्यालय न खुलने की स्थिति में ऑनलाइन दाखिले किए जाने को कहा था। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से भी बुधवार को आदेश जारी किया गया था ग्रीष्मावकाश समाप्त होने के साथ ही पहली जुलाई से सरकारी एवं निजी विद्यालयों में अध्यापकों की ओर से बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई कराई जाएगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया।
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कक्षा एक और कक्षा 6 में प्रवेश के लिए कोई अभियान नहीं चला। 90 प्रतिशत विद्यालय इस मुहिम से दूर रहे। इसका एक कारण अधिकारियों की ओर से प्रवेश प्रक्रिया सुचारू करने एवं विद्यालय परिसर को दुरुस्त करने एवं शिक्षण के ऑनलाइन व्यवस्था न होने पर अन्य विकल्पों के माध्यम से पढ़ाई करवाने में दिलचस्पी नहीं लेना भी रहा। ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के उपरांत भी अध्यापक अपने कार्यस्थल जाने को तैयार नहीं है। सभी ग्रुपों में अध्यापक अपने नेताओं से यही पूछ रहे हैं कि क्या विद्यालय जाना जरूरी है या घर से ही ऑनलाइन पढ़ाई करा दें। कुछ शिक्षक नेता 25 अप्रैल का पत्र घुमा कर यह कहते नजर आ रहे हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई घर से की जानी है।
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मुख्य शिक्षा अधिकारी केके गुप्ता का कहना है कि ऑनलाइन शिक्षण कार्य हर हाल में किया जाए, यह देखने की जिम्मेदारी संबंधित प्रधानाचार्य की होगी कि अध्यापक ऑनलाइन पढ़ा भी रहे हैं या नहीं। स्कूल खोलने के बारे में निदेशालय की ओर से कोई स्पष्ट आदेश नहीं है। इसलिए हमने अपने स्तर से कोई आदेश नहीं किया है। यह भी जानकारी में आया कि स्वैच्छा से कुछ अध्यापक पहले दिन स्कूल गए भी और उन्होंने बच्चों की पढ़ाई कराए जाने के लिए वर्कशीट आदि भी तैयार की हैं।
देवलचौड़ संकुल में जीरो, चोरगलिया में दो दाखिले
हल्द्वानी। चोरगलिया संकुल में 11 प्राथमिक स्कूल हैं। इस संकुल की समन्वयक दीक्षा जोशी ने बताया कि उन्होंने पहली जुलाई को खुद दो दाखिले किए हैं। संकुल क्षेत्र के अन्य स्कूलों में दाखिले किए गए हैं। देवलचौड़ संकुल का हाल यह है कि राजकीय प्राइमरी विद्यालय देवलचौड़ में ही छात्र नामांकन कक्षा एक में जीरो है। प्रधानाध्यापक मनोहर लाल का कहना है कि हमने पहले दिन एक भी दाखिला नहीं किया।