अब पिंजरे से बाघ को काबू करेंगे वन कर्मी
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अब कार्बेट टाइगर रिजर्व में आदमखोर बाघ पकड़ने या घायल वन्य जीवों का इलाज करने के लिए वनकर्मियों को रिस्क नहीं उठाना पड़ेगा।
पार्क प्रशासन ने दो पिंजरे बनाए हैं। इनके जरिए घायल वन्य जीवों को बेहोश करने के साथ ही खाई या कुएं में गिरे वन्य जीवों को भी सुरक्षित निकाला जा सकता है।
पार्क निदेशक समीर सिन्हा ने बताया कि अब आदमखोर बाघ, गुलदार को ट्रैकुलाइजर गन से बेहोश करने के लिये वनकर्मियों को आसानी के साथ ही सुरक्षा भी मिलेगी।
ये चेनकुप्पी की मदद से पेड़ों के सहारे ऊपर, नीचे भी हो जाते हैं, तो पिंजरे के नीचे पहिये होने से यह जमीन पर भी आगे पीछे हो सकते हैं।
इसके अंदर वनकर्मी के बैठने के लिये कुर्सी के साथ हर ऐंगल पर गन की नाल निकलने के लिये हॉल दिया गया है वह किसी भी डायरेक्शन में पिंजरे के अंदर से ही वन्य जीव को ट्रैकुलाइज कर सकते हैं।
इसके साथ ही यदि कोई वन्य जीव गहरी खाई या कुएं में गिर गया हो तो इसके सहारे वहां जाकर उसे सुरक्षित निकाला जा सकता है। इन पिंजरों का पार्क के अंदर सफल प्रयोग किया जा चुका है।