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श्रमदान से बनाई एक किमी सड़क
अमर उजाला ब्यूरो, चोरगलिया (नैनीताल)।
Updated Thu, 21 Jul 2016 12:37 AM IST
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श्रमदान से बनाई सड़क
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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लाखनमंडी सड़क निर्माण की मांग को लेकर शासन-प्रशासन से गुहार लगाते-लगाते थक हार चुके ग्रामीणों ने अंतत: स्वयं ही सड़क निर्माण करने का बीड़ा उठाते हुए श्रमदान से एक किमी सड़क का निर्माण कर दिया है। ग्रामीणों के इस प्रयास की पूरे इलाके में सरहाना हो रही है।
कई वर्षों से लाखनमंडी सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण शासन-प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा सड़क निर्माण के लिए कोई पहल नहीं की गई। हर बार चुनावों में इस सड़क सभी दलों का प्रमुख मुद्दा रहा है। चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि सड़क निर्माण के वादे को भूल जाते हैं। इससे पूर्व उमर उजाला ने ‘वन विभाग ने न खुद बनाई सड़क, न बनने दी’ शीर्षक से इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। छह माह बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में कोई काम नहीं हुआ।
कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने श्रम मंत्री हरीश दुर्गापाल से भी सड़क निर्माण की गुहार लगाई थी। श्रम मंत्री ने डीएफओ से बात की तो डीएफओ ने बजट न होने और सड़क निर्माण के लिए नदी से रेता, बजरी, पत्थर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। लेकिन श्रम मंत्री ने भी विधायक निधि से किसी तरह की मदद नहीं की। सभी जगह से निराशा हाथ लगने पर ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क निर्माण का निर्णय लेते हुए श्रमदान से सड़क का निर्माण शुरू कर दिया। सड़क निर्माण के लिए डीएफओ ने जरूर रेता, बजरी, पत्थर इत्यादि की अनुमति दे दी। स्थानीय निवासी आनंद तिवाड़ी ने बताया कि श्रम मंत्री के समक्ष डीएफओ द्वारा रेता, बजरी देने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क बनाने का फैसला लिया।
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ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर जेसीबी तथा ट्रैक्टर ट्राली की व्यवस्था की। वन विभाग द्वारा मिली अनुमति के बाद ग्रामीणों ने चलने लायक सड़क बना दी है। सड़क न होने से बरसात मेें सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है और स्कूली बच्चों और ग्रामीणों जान जोखिम में डाल कर नहर की पटरी के सहारे आवागमन करना पड़ता था। अब कुछ हद तक ग्रामीणों ने राहत महसूस की है।
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कई वर्षों से लाखनमंडी सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण शासन-प्रशासन से गुहार लगा चुके हैं। लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा सड़क निर्माण के लिए कोई पहल नहीं की गई। हर बार चुनावों में इस सड़क सभी दलों का प्रमुख मुद्दा रहा है। चुनाव के बाद जनप्रतिनिधि सड़क निर्माण के वादे को भूल जाते हैं। इससे पूर्व उमर उजाला ने ‘वन विभाग ने न खुद बनाई सड़क, न बनने दी’ शीर्षक से इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। छह माह बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में कोई काम नहीं हुआ।
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कुछ दिन पहले ग्रामीणों ने श्रम मंत्री हरीश दुर्गापाल से भी सड़क निर्माण की गुहार लगाई थी। श्रम मंत्री ने डीएफओ से बात की तो डीएफओ ने बजट न होने और सड़क निर्माण के लिए नदी से रेता, बजरी, पत्थर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। लेकिन श्रम मंत्री ने भी विधायक निधि से किसी तरह की मदद नहीं की। सभी जगह से निराशा हाथ लगने पर ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क निर्माण का निर्णय लेते हुए श्रमदान से सड़क का निर्माण शुरू कर दिया। सड़क निर्माण के लिए डीएफओ ने जरूर रेता, बजरी, पत्थर इत्यादि की अनुमति दे दी। स्थानीय निवासी आनंद तिवाड़ी ने बताया कि श्रम मंत्री के समक्ष डीएफओ द्वारा रेता, बजरी देने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क बनाने का फैसला लिया।
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ग्रामीणों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर जेसीबी तथा ट्रैक्टर ट्राली की व्यवस्था की। वन विभाग द्वारा मिली अनुमति के बाद ग्रामीणों ने चलने लायक सड़क बना दी है। सड़क न होने से बरसात मेें सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है और स्कूली बच्चों और ग्रामीणों जान जोखिम में डाल कर नहर की पटरी के सहारे आवागमन करना पड़ता था। अब कुछ हद तक ग्रामीणों ने राहत महसूस की है।