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अफसरों पर ठोकेंगे मानहानि का दावा
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल।
Updated Thu, 12 Mar 2015 02:06 AM IST
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नगर पालिका बोर्ड की आपात बैठक में मंडल प्रशासन समेत दुर्गापुर आवास आवंटन के संबंध में हुई जांच और एफआईआर में शामिल अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। तय किया गया कि पालिका के खिलाफ एफआईआर न्यायसंगत नहीं है, संबंधित अफसरों के खिलाफ मानहानि का दावा किया जाएगा। उन्होंने पूर्व में की गई जिला प्रशासन की जांच उजागर करने की मांग की।
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बता दें कि बीते दिनों मंडलायुक्त के निर्देश पर हुई जांच में दुर्गापुर में निर्माणाधीन आवासों के संबंध में बनाई गई डीपीआर में धांधली पाई गई। इसमें 200 में से 163 अपात्र पाए गए और 28 में से दो अपात्रों को भवन आवंटित किए जाने का खुलासा हुआ। इस पर पालिका के खिलाफ मल्लीताल कोतवाली में धारा 420 व 465 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। एलडीए सचिव श्रीष कुमार और एलडीए के परियोजना अभियंता सीएम साह की ओर से मंगलवार को तहरीर दी गई थी।
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मामले में बुधवार को बोर्ड बैठक बुलाई गई। सदन में सभासदों ने कहा वर्ष-2008 में संबंधित डीपीआर पालिका ने नहीं, बल्कि शासन के निर्देश पर निजी संस्था ने बनाई थी। आरोप है कि मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच की गई तथा बाद में आयुक्त ने भी अपने स्तर से जांच कराई। बैठक में जिला प्रशासन की जांच को सार्वजनिक करने की मांग की गई।
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सभासदों ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में कार्यरत एकमात्र व्यक्ति को नियम विरुद्ध भवन आवंटन न करने पर पालिका के खिलाफ कार्रवाई हुई है। तय किया गया कि मामले में शासन को भी पत्र लिखा जाएगा। बैठक में पालिकाध्यक्ष श्याम नारायण, ईओ रोहिताश शर्मा, टीएस राजदेव जायसी समेत सभासद डीएन भट्ट, भारती साह, भूपाल कार्की, जीतेंद्र बिष्ट, अजय भट्ट, रेनू आर्या, किरन साह, कैलाश अधिकारी, सुमित प्रसाद, ईशा मारुति साह, जेके शर्मा, सरवर खान, दीपक रुबाली, राजेश अधिकारी, विनोद परिहार, बच्ची चंद्र, असीम बख्श आदि मौजूद थे।
सभासद की शिकायत पर ही हुई थी जांच
नैनीताल। मंडल प्रशासन ने नगर पालिका प्रशासन की आपात बैठक में उन पर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद करार दिया है। कहा कि दुर्गापुर आवास आबंटन के मामले में अनियमितता की शिकायतें पालिका के सभासदों की ओर से ही की गई थी। जिसके बाद ही मंडल प्रशासन स्तर से जांच की गई। प्रशासन ने कहा है किपालिका अपनी गलतियां छिपाने के लिए मंडल प्रशासन पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है और इसके लिए पालिका बोर्ड का दुरुपयोग किया जा रहा है। आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया एक जनहित याचिका के संबंध में हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों पर 17 जुलाई और 22 जुलाई 2014 को बुलाई गई बैठक में पालिका के मनोनीत सभासद सरवर खान व यशपाल रावत की ओर से दुर्गापुर आवास आवंटन में अनियमितता की शिकायत की गई थी। जिसके बाद जिला प्रशासन व अपर आयुक्त स्तर से इसकी जांच कराई गई। जांच में पुष्टि हुई कि दुर्गापुर में स्थाई रूप से आवंटित 28 आवासों में से दो ऐसे परिवारों को आवास आवंटित हुए जिनके नाम 2002 की सर्वेक्षण सूची में नहीं थे और न ही 2008 की डीपीआर में थे। डीपीआर में एक ही परिवार को एक से अधिक बार सूचीबद्ध पाए जाने पर पालिका ईओ को शामिल करते हुए एलडीए सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति ने जांच की। जिसमें 200 में से 37 ही पात्र पाए गए, जिसके बाद ही वैधानिक कार्रवाई की गई है।