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Nainital News: कुमाऊं विश्वविद्यालय के मेरू परिसर के निर्माण की बाधाएं दूर
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नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रस्तावित मेरू परिसर (पटवाडांगर) के निर्माण में आ रही बाधाएं अब समाप्त हो गई हैं। सोमवार को जिला प्रशासन, पुलिस और विश्वविद्यालय की संयुक्त टीम ने परिसर की भूमि और भवनों से अवैध कब्जे हटाकर विश्वविद्यालय का नियंत्रण बहाल कर दिया।
केंद्र सरकार की मेरू योजना के तहत विकसित होने वाला यह परिसर उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। लगभग 100 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य रोजगारपरक शिक्षा और उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देना है। इसके शुरू होने से कुमाऊं विश्वविद्यालय का विस्तार होगा और युवाओं को आधुनिक करियर के अवसर मिलेंगे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीएस रावत ने बताया कि विश्वविद्यालय ने परिसर का विधिवत कब्जा ले लिया है। निर्माण एजेंसी को अगले आठ से नौ महीने के भीतर कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने कहा कि पटवाडांगर में अत्याधुनिक भवनों का निर्माण जल्द शुरू होगा। इससे शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति होगी। विगत कुछ समय से उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद के साथ तालमेल की कमी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ था। कुलपति ने इस मामले को शासन और क्षेत्रीय सांसद के समक्ष उठाया था, जिसके बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया। इस कार्रवाई के दौरान प्रभारी कुलसचिव राकेश विश्वकर्मा, निर्माण कार्य समीक्षा समिति के प्रभारी प्रो. महेंद्र राणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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केंद्र सरकार की मेरू योजना के तहत विकसित होने वाला यह परिसर उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। लगभग 100 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य रोजगारपरक शिक्षा और उच्च स्तरीय शोध को बढ़ावा देना है। इसके शुरू होने से कुमाऊं विश्वविद्यालय का विस्तार होगा और युवाओं को आधुनिक करियर के अवसर मिलेंगे।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीएस रावत ने बताया कि विश्वविद्यालय ने परिसर का विधिवत कब्जा ले लिया है। निर्माण एजेंसी को अगले आठ से नौ महीने के भीतर कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है। उन्होंने कहा कि पटवाडांगर में अत्याधुनिक भवनों का निर्माण जल्द शुरू होगा। इससे शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति होगी। विगत कुछ समय से उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद के साथ तालमेल की कमी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण निर्माण कार्य रुका हुआ था। कुलपति ने इस मामले को शासन और क्षेत्रीय सांसद के समक्ष उठाया था, जिसके बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया। इस कार्रवाई के दौरान प्रभारी कुलसचिव राकेश विश्वकर्मा, निर्माण कार्य समीक्षा समिति के प्रभारी प्रो. महेंद्र राणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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