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एनएसयूआई ने मीमांशा पर लगाया दांव
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।
Updated Sun, 01 Oct 2017 11:58 PM IST
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मीमांशा
- फोटो : अमर उजाला
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एमबीपीजी कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में रविवार को एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद पर अपने पत्ते खोलकर मीमांशा आर्य को प्रत्याशी घोषित किया है। यह पहली बार है जब एमबी कॉलेज में कोई छात्रा अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेगी। हालांकि एनएसयूआई को एबीवीपी की तरह प्रत्याशी घोषित करने में मशक्कत करनी पड़ी। प्रदेश नेतृत्व को खुद यहां आकर घोषणा करनी पड़ी।
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एनएसयूआई की ओर से मीमांशा आर्य और रोहित बहुगुणा अध्यक्ष पद के दावेदार थे। इस कारण एनएसयूआई भी अध्यक्ष पद के लिए अपना प्रत्याशी घोषित नहीं कर पा रही थी। प्रदेश अध्यक्ष श्याम सिंह चौहान और प्रदेश प्रभारी शिवराज मौरे को यहां आकर मीमांशा के नाम का ऐलान करना पड़ा। मीमांशा को टिकट दिए जाने की घोषणा के बाद यह भी साबित हो गया कि एनएसयूआई इस बार अलग तरीके से चुनाव लड़ने की कोशिश में है। एमबी कॉलेज छात्राओं की संख्या ज्यादा है। इसके बावजूद अब तक किसी भी संगठन ने छात्रा को अध्यक्ष पद का प्रत्याशी नहीं बनाया था।
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मीमांशा को टिकट दिया जाना क्षेत्रीय और जातीय समीकरण को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि एनएसयूआई वैसे भी इस बार दबाव में हैं। कांग्रेस के स्थानीय और बड़े नेता इस बार चुनाव में सक्रिय नजर नहीं आ रहे हैं। उधर, मंडी समिति अध्यक्ष सुमित हृदयेश, नितिन बल्युटिया, पूर्व प्रदेश सचिव गुड्डू कार्की, सचिन जलाल, नीमा कोठारी, कोमल जायसवाल, गौरव खनवाल आदि ने मीमांशा को बधाई दी है। एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुमित भुल्लर ने कहा की इस बार संगठन ने एक छात्रा को अध्यक्ष बनाने की चुनौती को स्वीकार किया है। सभी छात्र-छात्राओं के सहयोग से एनएसयूआई अपने उद्देश्य में अवश्य सफल होगी।
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नैनीताल मेें सफल नहीं रहा एनएसयूआई का प्रयोग
छात्रा को अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी बनाने का प्रयोग एनएसयूआई डीएसबी परिसर नैनीताल में भी कर चुकी है। हालांकि वहां उसकी प्रत्याशी स्वाति तिवारी को 1555 मतों से शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
अभिलाष अब उपाध्यक्ष पद पर लड़ेंगे!
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष पद के दावेदार रहे अभिलाष कांडपाल अब उपाध्यक्ष पद पर उतर सकते हैं। अभिलाष कांडपाल की जगह एबीवीपी ने कुलदीप कुल्याल को टिकट दिया था। ऐसे में एबीवीपी का एक धड़ा असंतुष्ट हो गया था। कांडपाल को उपाध्यक्ष पद पर लाने का मकसद एबीवीपी के असंतोष को खत्म करने के रूप देखा जा रहा है।