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नोटबंदी की गाज गांवों पर

Wed, 16 Nov 2016 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी Updated Wed, 16 Nov 2016 01:09 AM IST
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Notbandi casualty of villages
rupees

किसानों के लिए बनाए गए सहकारी बैंकों में 500 और 1000 के नोट न बदलाने का आदेश जारी होने की गाज गांव के लोगों पर गिर रही है। सबसे अधिक प्रभावित किसान हैं। हाल यह है कि आरबीआई के इस आदेश के बाद सहकारी बैंकों में बैंक अधिकारियों को उपभोक्ताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। उनके साथ ग्राहकों की कहासुनी भी हुई।

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जिला सहकारी बैंकों में पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बदलने की रोक लगाने के बाद अफरातफरी मच गई। बैंक में सुबह से लाइन में खड़े लोग परेशान हुए और उन्हें बिना नोट बदले ही वापस जाना पड़ा। उपभोक्ताओं की बैंक कर्मियों से नोट बदलने को लेकर नोकझोंक भी हुई।
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रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने जिला सहकारी बैंक और केंद्रीयकृत सहकारी बैंकों पर पांच सौ, एक हजार रुपए के नोट न बदलने और जमा न करने का फरमान सोमवार को जारी कर दिया। जिला सहकारी बैंकों से किसान काफी संख्या में जुड़े हैं।
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आरबीआई का फरमान मंगलवार को नैनीताल डिस्ट्रिक्ट कोआपरेटिव बैंक के बाहर चस्पा कर दिया गया। बैंक में पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट जमा करने वालों की काफी भीड़ थी। पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बदलवाने वाले ग्राहक भी काफी संख्या में थे।

आरबीआई की रोक के कारण किसी भी जिला सहकारी बैंक में पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट जमा नहीं किए गए। बैंक ने आरबीआई की रोक का हवाला देते हुए नोट बदलने से भी इंकार कर दिया। नोट बदलने और जमा करने को लेकर ग्राहकों की बैंक कर्मियों से नोकझोंक हुई।

बैंक कर्मियों ने ग्राहकों को अपनी मजबूरी बताई। बैंक के महाप्रबंधक बीसी पांडे ने बताया कि पांच सौ, एक हजार रुपए के नोट न जमा किए जा रहे हैं और न ही बदले जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि छोटे नोट जमा हो रहे हैं। पैसा निकालने वाले ग्राहकों को छोटे नोट दिए जा रहे हैं।


दूसरी ओर उत्तराखंड स्टेट कोआपरेटिव बैंक के चेयरमैन संजीव आर्या ने आरबीआई की कार्यकारी निदेशक डा. दीपाली पंत जोशी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से किसानों को परेशानी होगी। निर्णय पर पुनर्विचार करने के साथ छूट दी जानी चाहिए।

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